Monday, May 04, 2015

नालन्दा बुक स्टॉल....

कल यह आदमी रावतपुर के पास दिखा। भद्दर धूप में सड़क के किनारे अपनी चुटकियों में फंसे रूपये के सिक्के को आपस में बजाता हुआ कह रहा था- "फ़ार्म भरना है।प्राइवेट इंजीनियरिंग कालेज खोलना है। मेडिकल बनवाना है। हरसहाय जगदम्बा सहाय। डीएबी कालेज। नालन्दा बुक स्टाल। हीरालाल खन्ना.......।"मतलब कानपुर से जुडी तमाम संस्थाओं और प्रसिद्द व्यक्तियों के नाम ले रहा था। अटल बिहारी बाजपेयी जी का भी नाम लिया।

पास के दूकान वाले ने बताया- "दिनेश बुक स्टॉल वालों का भाई है। दिमाग गड़बड़ा गया है।" इसके बाद उसने उससे कुछ कहा लेकिन वह व्यक्ति हाथ के सिक्के बजाता रहा। -"फार्म भरना है। इंजीनियरिंग कालेज खोलना है।"

हमने भी कुछ बात करने की कोशिश की। लेकिन वह उसी तरह व्यस्त रहा।-" फ़ार्म भरना है। कालेज खोलना है। नालन्दा बुक स्टॉल....."।

हम चुपचाप चले आये। रास्ते में एक ऊंट दिखा। ऊंट की लगाम एक बच्चे के हाथ में थी। ऊंट पर बैठा आदमी इधर-उधर देखता रहा। ऊंट एक पेड़ के पास रुककर पत्तियां खाने लगा।


अपने यहां 100 स्मार्ट सिटी बनने की बात चल रही है। अगर कभी बने भी तो उनमें कानपुर का भी नाम होगा क्या? सबसे ज्यादा कमाई कानपुर से होती है। सबसे ज्यादा आबादी कानपुर की है। सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार भी कानपुर देता है।

खैर अभी तो जबलपुर आ गए। जब बनेगा कानपुर स्मार्टसिटी तब देखा जाएगा।

कल मेरे बेटे के जन्मदिन पर आप सबकी शुभकामनाएं मिलीं। सभी का आभार।धन्यवाद।

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