Thursday, May 28, 2015

नदियां हैं तो जीवन हैं

कल रात ग्वारीघाट गए। रात साढ़े ग्यारह के बाद। नर्मदा जी सोई हुई सी थीं। सोने में खलल न पड़े इसलिए अँधेरा कर रखा था। सूरज का बल्ब बुझा दिया था। जैसे अपने बेडरूम की लाइट बन्द कर ली हो। अँधेरे की काली चादर ओढ़ रखी थी उन्होंने। हल्की हवा चल रही थी। ऊपर चाँद नाइट बल्ब की तरह लटका था।

नदी किनारे तमाम लोग सोये थे। कुछ जमीन पर, कुछ घाट किनारे के तख्तों पर और कुछ सीढ़ियों पर। दुकाने ज्यादातर बन्द हो चुकी थीं। गक्कड़ भर्ता के बोर्ड के नीचे चाय बन रही थी। फूल-मालाओं वाली कुछ खुली दुकानें भी ...बन्द हो रहीं थीं।

कुछ मंडलियां ढोलक,मंजीरे, झांझ, करताल पर भजन कर रहे थे। तीन मंडलियां अलग-अलग भजन गा रहे थे। कोई साफ सुनाई नहीं दे रहा था। लेकिन तीनों मंडलियां तल्लीन थीं भजन में। कुछ मिनट के लिए दो मण्डलियों ने 'भजन विराम' लिया तीसरी के बोल सुनाई दिए:

रेवा महारानी मैया रेवा महारानी
सुंदर सजी है मैया रेवा महारानी।

नदी को भजन सुनाते हुए सुला रहे हैं भक्तगण। थकी हैं नर्मदा मैया। कीर्तन की थपकियों से नींद अच्छी आएगी।

 सुबह फिर लहरों से अठखेलियां करती हुई बहेगी सौंदर्य की नदीं नर्मदा।

लेकिन बह तो अब भी रही है नदी। नदी को विराम कहां। वो तो हम ठहर गए तो लगता है नदी रूकी है।हम जैसे होते हैं वैसे ही दूसरों को देखते हैं। नदी तो अविराम चलती रहती है। समंदर से मिलने की बेचैनी है उसको। गुरुत्वाकर्षण बल की टैक्सी कर रखी है नदी ने। लगातार चलते हुए समुद्र से मिलेगी जाकर। फिर आगे का इंतजाम समुद्र को देखना है। नदी को लिफ्ट कराकर फिर आसमान तक ले जाएगा। सूरज की गर्मी की लिफ्ट से कांट्रेक्ट है समुद्र का। गतिज ऊर्जा को स्थितिज ऊर्जा में बदलना और फिर स्थितिज ऊर्जा को गतिज ऊर्जा में बदलना। नदी,सागर, बादल और फिर नदी में पानी का आना ऊर्जा का रूपांतरण ही तो है।

नदी किनारे नावें खड़ी हैं। रात को नहीं चलती। कोई आता होगा तो कहने पर शायद कोई पार ले जाता होगा। दूसरी तरफ गुरूद्वारे की रौशनी नदी के पानी पर पड़ रही है। वहां कुछ चमक रही हैं नर्मदाजी।

एक आदमी मोटर साइकिल पर आया है। नर्मदा नगर में रहता है। बोला--' हम नर्मदा के सरकारी नौकर हैं।रोज हाजिरी देते हैं यहां इनके दरबार में।' कुछ परिवार कार से आये हैं नर्मदा दर्शन करने।

चलने लगते हैं तो कुछ माँगने वाले आ जाते हैं। साथ के मित्र कुछ देते हैं उनको। देखते हुए कुछ और लोग आ जाते हैं। एक को कुछ देकर दोनों को बाँट लेने की हिदायत देकर चल देते हैं हम। पीछे देखते हैं वो आपस में मिले पैसे का हिसाब कर रहे हैं। रात के 12 से ज्यादा बज गए हैं। मांगने वालों की दुकान कभी बन्द नहीं होती।

नदियां लाखों वर्षों से बह रही हैं। कितनी सभ्यताएं, साम्राज्य उन्होंने बनते, बिगड़ते देखें होंगे। चुपचाप बहते हुए। कितने लोगों को जीवन दिया होगा, कितनों को अपने साथ ले गयीं होंगी। 'नदियां हैं तो जीवन हैं' कहते हुए आदमी हर वह काम कर रहा है जो नदियों को खत्म करने के कारण हो सकते हैं।

कल ग्वारी घाट से आते हुए सोचा कि हफ्ते एक दिन किसी न किसी घाट पर अवश्य जाया करेंगे। दो चार घण्टे बैठेंगे। नर्मदा नदी के किनारे-किनारे साइकिल यात्रा का विचार थोडा और मजबूत हुआ।

आप भी मन करे तो अपने आसपास किसी नदी, तालाब को देखने जाया करें। उसके किनारे बैठें। अच्छा लगेगा।
फिलहाल आज इतना ही। बाकी फिर कभी। मजे से रहें ।

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