Sunday, May 24, 2015

चाँद की सवारी है, चांदनी का काफिला है

आसमां में टँगे चाँद से हम बोले सुनो,
चले आओ गुरु चाय पिलायें तुमको।

वो मुआ बोला अकेला हूँ ड्यूटी पर मैं,
आया तो सीधे सस्पेंड ,माफ करो हमको।

चांदनी से कहा फिर तुम ही चली आओ ,
वो बोली फोन मिलाती हूँ अभी भाभी को।

आसमान था अँधेरे में बस चाँद था रोशन,
मनो केजरी चमका रहे अकेले हों आप को।

चांदनी पसरी थी, धरती पे करप्शन की तरह,
चाँद को कोई कुछ कहे, ये हिम्मत थी किसकी।

चाँद की सवारी है, चांदनी का काफिला है,
तारे बने बाराती हैं, छटा खिली गजब की।

-कट्टा कानपुरी

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