Saturday, May 09, 2015

बड़ा अपराध छोटे अपराधी का अपराध बोध कम करता है

सुबह जल्दी उठे। टहलने निकले तो सड़क पर लोग हमसे पहले ही निकल चुके थे।कुछ तेज तेज कुछ खरामा खरामा।

एक बुजुर्ग एक पेड़ के नीचे कन्धों को उचकाते हुए गोल गोल घुमा रहे थे। मानों कन्धों की कपाल भाति कर रहे हों।हम इतनी तेज कन्धा घुमाएं तो कन्धा उतर कर लटक जाए।

एक महिला दूसरी महिला से बतियाती हुयी हाथ की पालीथीन में गोबर बटोर रही थी। दो बच्चियां सड़क के किनारे पानी की मोटी पाइप पर बैठी पसारे बतिया रहीं थीं।

व्हीकल मोड़ पर चाय की दुकाने खुली नहीं थीं अभी। पीछे देखा सूरज भाई पेड़ की आड़ में छिपे मुस्करा रहे थे। आगे बस स्टैंड पर एक भाई बीड़ी सुलगा रहे थे।बीड़ी सुलगाने के बाद एकाध सुट्टा मारने के बाद हाथ में लेकर कुछ सोचने सा लगे। मुझे दुष्यंत कुमार का शेर याद आ गया:

हाथों में अंगारे लिए सोच रहा था,
कोई मुझे अंगारों की तासीर बताये।
मोड़ पर चाय की दूकान पर दो सिपाही चाय पीने के बाद चाय के पैसे देते दिखे। अंदर जीसीएफ के दो कर्मचारी सुरती मलते मिले। रात की शिफ्ट थी उनकी। 6 बजे छुट्टी होती है। लेकिन आज रिलीवर जल्दी आ गया तो जल्दी छूट गए।

दूकान वाला सुबह के नाश्ते के लिए समोसा बनाने की तैयारी कर रहा था। उबले आलू को दिगम्बर करने के बाद मैदा माड़ रहा था। तसले में मैदे को उठाते पटकते हुए देखकर लगा कोई फेसबुक पर किसी स्टेट्स को फटाफट लाइक डिस्लाइक कर रहा हो।

दुकान 20 साल से चला रहे दुकानवाले ने बताया कि 20 साल से चला रहे हैं दुकान। 500 किराया है। सुबह 5 बजे से शाम को 5 बजे तक खुलती है। मोड़ की दूकान निजी लोगों की संपत्ति होती तो किराया हजारों में और चलन समय 24×7 होता।

लौटे तो देखा भाई जी अभी भी बीड़ी हाथ में थामे बस स्टैंड पर विराजमान थे।एक दुसरे भाई अपने स्वस्थ शरीर को पूरे विस्तार से फैलाये खड़े जमीन सींच रहे थे। एक और बन्धु सड़क से नीचे उतरकर मन्जन कर रहे थे। हाथ में स्टील के लोटे में पानी से कुल्ला करते हुए।

एक जगह दो महिलाएं सर पर घड़ा लादे खडी थीं। हमको देखा तो बोलीं-'जरा उतरवा दो भैया।सर गर्म हो गया।' हमने उनके सर से टोकरी उतरवाई लेकिन उसके पहले फोटो खींची। फिर अपने को धिक्कारा भी। उनका सर बोझ के कारण गर्म हो रहा है और तुमको फोटो खींचने की पड़ी है।


इस पर ईस्वामी का लेख याद आया। उस लेख का विषय यह था कि चीजें अपना उपयोग करवाती हैं।प्रमोद महाजन को गोली लगी थी तब लिखा गया था यह लेख। इसमें यह था कि प्रमोद महाजन के भाई के यहां बन्दूक थी तो उसने अपना उपयोग करवाया। न होती तो शायद उनके भाई का गुस्सा सस्ते में निपट जाता।

आज अख़बार में खबर यह भी थी कि पाकिस्तान में तालिबान एक हेलोकापटर में दो देशों के राजदूतों को मार गिराया। पाकिस्तान में तालिबान हैं तो वे भी अपना होना सार्थक कर रहे हैं। चीजें अपना उपयोग करवाती हैं।अपने यहां भी गुस्सा,अराजकता, कट्टरता, असहिष्णुता और जाहिलियत बढ़ती जा रही है।यह भी अपना उपयोग करवाएगी।

हमने अपना देश दुनिया से जोड़कर अपना अपराध बोध हल्का कर लिया। ऐसे ही जैसे सौ पचास हजार का घपला करता आदमी अपना अपराध बोध यह सोचकर कम कर लेता है कि लोग तो अरबों खरबों का घपला करते हैं।

बड़ा अपराध छोटे अपराधी का अपराध बोध कम करता है।

सुबह सुबह हम भी कहां अपराध और अपराध बोध की बात करने लगे।

चलिए आप का दिन शुभ हो।

कल मेरी बिटिया स्वाति और दामाद निष्काम के विवाह की वर्षगांठ पर आपकी शुभकामनाओं और आशीर्वाद के लिए आभार।

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