Monday, May 18, 2015

अंकल जी आइसक्रीम खा लीजिये

जबसे साइकिलिंग का चस्का लगा है तबसे चाय बाहर चाय की दुकान पर ही पीने का मन होता है। जैसे बड़े बड़े लोग सेल्फ़ी लेने के लिए विदेश दौरे पर चल देते हैं वैसे ही हम चाय पीने का मन होते ही 3 किमी दूर व्हीकल मोड़ की चाय की दूकान के लिए निकल लेते हैं।अपने अपने शौक की बात है।

आज शाम को भी कमरे पर आते ही निकल लिए।चाय की दुकान पर तीन लड़के बैठे हुए। घुटन्ना( बरमूडा) धारण किये एक बालक सिगरेट के सुट्टे मारते हुए अपने मोबाइल की तस्वीरें और वीडियो दूसरे बच्चों को दिखाता जा रहा था। सिगरेट पर जमती राख को झटका मारकर गिराता जा रहा था। इतनी मंहगी सिगरेट राख में बदलती देखकर लगा कि सिगरेट में भी पॉज बटन टाइप कुछ होना चाहिए जिससे जब सिगरेट न पी जा रही हो सिगरेट का आगे सुलगना बन्द हो जाए और वह राख में न बदले।

कुछ देर बाद उसके दूसरे साथी ने उससे सिगरेट झटक ली। इस बीच पहले वाले बालक ने खांसने की कार्यवाही शुर कर दी। दूकान पर और भी बालक अलग अलग तरह से सिगरेट फूंक रहे थे। कोई धुँआ ऊपर की तरफ मुंह करके छोड़ रहा था तो कोई सीधे मुंह करके सामने।

चाय लेने से पहले मैंने दूकान वाले को बताया कि हमारे पास 100 रूपये का नोट है। छुट्टा नहीं है। उसने कहा उसके पास भी फुटकर नहीं हैं। हमने फिर 5 रूपये का भजिया का पैकेट भी लेने की बात कही तो वह चाय देने राजी हो गया।

आलू भजिया के साथ चाय पीकर सौ रूपये का नोट दिया। बाकी पैसे लेकर वापस चल दिए। बाजार में एक दूकान पर रिन साबुन लेने रुके। दूकान की मालकिन से उनकी तबियत पूछी तो उन्होंने मेरा भी समाचार पूछा यह कहते हुए -'बहुत दिन बाद आये। यहीं रहते है कि बाहर चले जाते हैं।'

इनकी दूकान 31 साल से है। आजकल 2000 रूपये किराया है। इस्टेट में रहवासी लोगों की होती कमी के चलते बिक्री कम होती जाती है। किराया हर पांच साल में बढ़ जाता है।

हमने माता जी के घुटने के दर्द के बारे में पूछा तो बोलीं -' ठीक है। टहलने से आराम मिलता है।' हमने कहा -'साइकिल चलाया करो। दर्द एकदम ठीक हो जाएगा।' इस पर वो खिलखिलाकर हंसने लगीं। हमने उनको उनकी फ़ोटो दिखाई तो बेटे से बोलीं-'फोटो में आँख हमेशा बन्द हो जाती है।' बेटे ने कहा-'अच्छी आई है फोटो।' सुनकर वे खुश टाइप हो गयीं।

दस रूपये का रिन साबुन और आलू भुजिया के पैकेट लेकर पैसे दिए तो पता चला कि चाय वाले का दिया एक नोट फटा है। पहले सोचा कि अभी चलें बदलने। लेकिन फिर सोचा कि उसको भी कोई टिका गया होगा। कल देखेंगे अगर न चला नोट।

रास्ते में कल का इंटरमीडिएट का 86% वाला बालक मिला। गन्ने की ठेलिया पर कोई ग्राहक नहीं था। हम भी चाय पीकर आये थे सो रस नहीं पिए। बच्चे से पूछा-'मार्कशीट लाये हो?' वह बोला -'भूल गए अंकल।कल पक्का दिखा देंगे।' बालक आइसक्रीम की हथठेलिया से आइसक्रीम खरीद कर खा रहा था। कोन में आइसक्रीम भरवाते हुए उसने मुझसे भी पूछा-'अंकल जी आइसक्रीम खा लीजिये।' हमने कहा-'तुम खाओ। हमने अभी चाय पी है।'

कमरे पर लौटते हुए 10 बज गये थे। उप्र में एक सब्जी बेचने वाले के बच्चे के टॉप करने की खबर आ रही थी। बहुत अच्छा लगा।समय समय पर ऐसे उदाहरणों से यह विश्वास पुख्ता होता है कि मेहनत और लगन तमाम दूसरी कमियों की भरपाई करके सफलता तक पहुंचा सकती हैं।

आप मजे करिये। हम भी खाना खाते हैं। शुभ रात्रि।

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