Monday, October 12, 2015

डू यु नो हू वाज डिस गनेश शंकर?

आज हमारी छुट्टी है।पितृ विसर्जनी अमावस्या की। पर ये स्टेट्स ससुरे किधर फूट लिए। आज जब इनका सबसे ज्यादा काम है तब ये दिख नहीं रहे। लगता है ये भी निकल लिये बिहार चुनाव में।
डर बस यह है कि कहीं कोई बेचारे हमारे निरीह स्टेटस को यह समझकर न धुन डाले कि ये कोई इनाम वापस करने आये हैं। उससे भी बड़ा डर यह कि कहीं कोई हमारे किसी स्टेटस को पकड़कर कोई इनाम न दे दे। यह डर इसलिए ज्यादा बढ़ गया कि आजकल कोई भी इनाम किसी को भी दे दिया जाता है।

हमें हमेशा यह डर लगा रहता है कि कल को हमारा कोई चिरकुट मसखरा स्टेटस हमारे ही इनबॉक्स में सन्देश भेजे- 'डैडी ये देखो हमको गनेश शंकर विद्यार्थी मेडल मिला है। डू यु नो हू वाज डिस गनेश शंकर? एनी आइडिया?'

इनाम हमेशा सुपात्र लोगों को मिलने चाहिए।जैसे अब्बी किन्हीं बादल जी को 'भारत का नेल्शन मण्डेला' बताया गया। कल को नेशनल मंडेला जी के नाम पर किसी इनाम का एलान हुआ तो पहला इनाम सुपात्र होने के नाते बादल जी को मिल ही जाना चाहिए।

सूचना: माननीय प्रात:स्वत: स्मरणीय( अपनी टिप्पणियों से स्वयंम अपना स्मरण कराने वाले) श्री 1008 भाई Mukesh Sharma जी की सलाह पर इस स्टेटस को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाता है। सुबह के 8 बजकर 55 मिनट पर।

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