Wednesday, October 07, 2015

क्या फायदा पढाई का

अंकुश महोबिया  पुलिया पर
आज दोपहर लंच पर आते हुए अंकुश महोबिया से मुलाक़ात हुई। उम्र 16 साल। शिक्षा कक्षा 4 तक। कंचनपुर में रहते हैं। अभी मामा के पास रिछाई जा रहे थे। तक गये तो रुक गए। पुलिया पर आराम करने के लिए।

4 में जब पढ़ते थे तो रिछाई में रहते थे पिता। रिछाई के स्कूल में ही पढ़ते थे अंकुश। फिर कंचनपुर रहने लगे। स्कूल रिछाई में ही रहा। आने-जाने में परेशानी थी। भटक भी जाते थे कभी-कभी। इसीलिये पढ़ाई छूट गयी। कुछ भी पढ़ नहीं पाता बच्चा।

पढ़ाई छूटने के बाद एक साल मोबाईल की दुकान में काम किया अंकुश ने। मोबाईल पर गेम खेलने का शौक था। जो मोबाइल बनने आते उनके ऐसे ही बटन दबाते रहते। दूकान वाला दस रूपये रोज देता था घर आने-जाने के लिए। वह भी बचा लेते थे अंकुश।

एक साल बाद एक चने की दुकान में नौकरी की। छह साल की। चार महीने पहले छोड़ी नौकरी तब साढ़े चार हजार महीने के मिलते थे। जो पैसे मिलते थे वो घर में दे देते थे। बचत की ।

नौकरी छोड़ने का कारण यह कि पैर में दर्द रहने लगा। घुटने के साथ पेट भी दर्द करता है। कोई इलाज नहीं कराया पर कहते हैं-वात है। हमने पूछा कि इलाज क्यों नहीं कराया? इस पर बोले-'ऐसे ही नहीं कराया।लगा कि अपने आप ठीक हो जायेगा।'


ईंधन के लिए लकड़ी बटोर कर लौटती महिला
हमने अपने सीनियर डॉक्टर शुक्ल को फोन किया। सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद अब पूरे होम्योपैथिक डॉक्टर हो गये हैं। घर पुलिया के पास से गुजरते हैं। हमने पूछा कि अगर वो अभी आ रहे हों तो यहीं दिखा दें बच्चे को।पर उनको अभी आने में देर थी। हमने बच्चे को उनका नाम लिखकर कागज में दिया यह कहते हुए कि इनको जाकर दिखा देना। बच्चा लिखा हुआ पता नहीं पढ़ पाया पर कागज जेब में रख लिया।

अंकुश का छोटा भाई 9 साल का है। बहन 2 साल की। हमने उससे पूछा कि तुमको पढ़ाई करनी चाहिए थी। छोड़ क्यों दी? इस पर वह बोला-हमारा बाप तो पढ़ा लिखा है। लेकिन उसको मजदूर का ही काम मिला। मतलब कहने का कि क्या फायदा पढाई का।

पिता सुशील महोबिया के लिए नाराजगी का भाव भी। बार-बार बाप कहते हुए बात की पिता के बारे में।बोला-जब हमको पढाना चाहिए था तब बाप ने पढ़ाया नहीं। 150 रूपये रोज कमाता है। 90 की दारु पी जाता है। फिर घर का खर्च कैसे चलता है? पूछने पर बोला अंकुश-चल जाता है।ईंधन के लिए लकड़ी बटोर कर लौटती महिला

महोबिया किसलिए लिखते हैं ? क्या महोबे के रहने वाले हैं पिता? पूछने पर बोला-पता नहीं। पर यह पता है की नानी के पापा के पापा महोबे के रहने वाले थे।


बच्चे ने बताया कि उसके पास सैमसंग ग्रैंड 4 मोबाईल था। सेकेण्ड हैण्ड खरीदा था। 20 हजार में। पर वह बाप ने किसी को बेच दिया या दे दिया पता नहीं। एक दिन चार्जर में लगा था। बाप के एक दोस्त का फोन खराब हो गया था। बाप ने उसके कहने पर कुछ दिन के लिए उसको दे दिया अंकुश का मोबाईल। फिर वह वापस नहीँ मिला। दो दिन बाद सिम भी बन्द हो गया।

घर में किसी से पटती नहीं अंकुश की सिवाय दादी के। इसलिए कि -'हमसे कोई कुछ कहता है तो हम फौरन पलट के जबाब दे देते हैं।किसी से दबते नहीं'। बताया अंकुश ने।

हाथ में एक चटकी स्क्रीन वाला छोटा स्मार्टफोन था बालक के। बताया कि यह उसके छोटे भाई का है। हमने पूछा-पटती नहीं किसी से तो भाई का मोबाईल लिए कैसे घूम रहे? इस पर बोला-'ऐसे ही दे दिया उसने। कुछ देर के लिए।'

आगे क्या करोगे पूछने पर बोला -'अब पढ़ेंगे। पिता रोज शाम को पढ़ाता है।अब ठीक से बात करते पापा। दारु कम कर दी है। हमने भी पहले जो मसाला खाते थे वह छोड़ दिया है। अब केवल सुपाड़ी खाते हैं। अगले साल आठवीं में एडमिशन लेंगे।'

डॉ शुक्ल का पता देकर हम चले आये। अंकुश बोला-'कल शाम को जाएंगे पापा के साथ। अगर वो राजी हुए। अभी तो मामा के घर जाएंगे।'

अंकुश से बात करने के दौरान कई महिलाएं सर पर लकड़ियाँ लादे हुए पुलिया के पास से गुजरीं। सुबह से दोपहर तक ईंधन के लिए लकड़ी बटोरकर वे घर लौट रहीं थी।

मैं 'पुलिया पर दुनिया' देखते हुए मेस चला आया।
‪#‎पुलिया‬

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