Wednesday, October 14, 2015

हँसता हुआ आदमी कभी बूढा थोड़ी होता है

सुबह जब निकले आज तो देखा सड़क पर खूब चहल-पहल थी। एक भाई दोनों हाथों को एक के बाद एक उठाते, नीचे गिराते तेजी से टहल रहे थे। मानों उन्होंने हाथ में डम्बल थाम रखे हों।वाक करते हुए एक्सरसाइज भी करते जा रहे हों।

छट्ठू सिंह अपने सथियों के साथ टहलते मिले। तबियत पूछी तो साथी लोग बोले- 'छट्ठू सिंह जवान हो रहे हैं। आजकल फिर से दूध पीने लगे हैं।' हम बोले-'छट्ठू सिंह बूढ़े कब हुए थे? वो तो हमेशा जवान लगते हैं। हँसते रहते हैं। हँसता हुआ आदमी कभी बूढा थोड़ी होता है।' इस पर सब हंसने लगे।मने सब जवान हो गए।

रॉबर्टसन लेक की तरफ गए। झील का पानी अलसाया सा लेटा था। कोई लहर पानी को जगाती तो पानी फिर कुनमुनाकार सो जाता। एक मकान के पिछवाड़े जलते बल्ब का प्रतिबिंब झील पर पड़ रहा था। ऐसा लगा मानों बल्ब झील में ही जल रहा हो।


आसमान की लालिमा झील पर इस तरह दिख रही थी गोया लालिमा अपनी 'सेल्फी' ले रही हो। झील के पानी में अपनी शक्ल देखने के बाद दिशाओं से पूछा होगा लालिमा ने- 'बता तो कैसी लग रही हूँ।' दिखाएँ बोली होंगी- 'गजब यार। आज लगता है बिजली गिर कर रहेगी।' इस पर लालिमा लाज - लाल होते हुए बोली होगी दिशाओं से -' बहुत दुष्ट हो तुम लोग। हमेशा मजाक सूझता है तुम लोगों को।'

पंकज टी स्टाल के सामने की दुकान पर दो भट्टियां सुलग रहीं थीं। बड़ी भट्टी से राख नीचे गिर रही थी। पास-पास सुलगती दो भट्टियां एक ही छत के नीचे रहते दो लोगों की तरह चुपचाप सुलग रहीं थीं। एक दूसरे से बिना कुछ बोले। बीच का लोहे का रॉड उनके बीच विभाजक रेखा की तरह खड़ा था। दोनों को सुलगने से ही फुर्सत नहीं थी कि आपस में कुछ बात करें।

एक बच्चा कूड़ा बीनने के बाद उसमें से काम लायक कूड़े को अलग कर रहा था। मूलत: प्लास्टिक का सामान। दस रुपये किलो में बिकता है प्लास्टिक का कूड़ा। सामानों में दारू की बोतल, पन्नी, फ़ाइल कवर, सीएफएल जैसी तमाम सामान कूड़ा हो चुके सामान थे। विभिन्नता में एकता का एहसास दिलाते हुए।


एक खिलौना भी था कूड़े में। बच्चा उसे बड़े ध्यान से देखता रहा। हमने उसी समय फोटो खींची तो उसने खिलौना बोरी में फेंक दिया मानों कोई गलत काम करते देख लिया हो किसी ने। हमने पूछा -'क्यों फेंक दिया खिलौना?' वो बोला-'स्कूल में भर्ती करा दोगे आप।' पहले भी किसी ने फोटो खींची थी और बोले थे-'स्कूल में पढ़ाई करो।'


मन किया किसी चैनल वाले की तरह उससे पूछें कि खिलौना खेलने का मन करता है क्या? कब खेला कभी खिलौने से ? इसी तरह के सवाल के मार्मिक सवाल पूछते हुए बताएं कि देश का दुर्भाग्य कि खिलौने खेलने की उम्र वाले बच्चे कूड़े के ढेर बीनते हुए अपना भविष्य बना रहे हैं। पर हम कोई चैनल वाले तो हैं नहीं जो यह सब पूंछते।

15 साल का कूड़ा बीनने वाला बच्चा प्रकाश अपनी माँ के साथ रहता है। पिता नहीं रहे। सौ-पचास रूपये काम लेता है कूड़ा बीनकर । पांचवी तक पढ़ा है। 4 बजे निकला था कूड़ा बीनने। अब घर जायेगा। दिन में कोई काम नहीँ करता।गांव से आया था शहर पढने। हॉस्टल में रहा दो-तीन दिन। मन नहीं लगा तो भाग आया। किसी के कहने से नहीं पर खुद पढाई करेगा दो साल बाद।


बच्चा गले में पड़ी चेन मुंह में दबाये कूड़े में मिली एक किताब की फोटो ध्यान से देखता रहा। कुछ देर बाद किताब बोरे में फेंक दी। हमारे कहने पर किताब उठाकर दुबारा वह पोज दिया।

लौटते में सूरज भाई दिखे। हमने उनसे पूछा कि आधी रात में क्यों नहीं चमक रहे थे। अब चमकने से क्या फायदा हब सब तरफ उजाला हो गया है। सूरज भाई बोले-'पगला गए हो का? रात को हमें थोड़ी चमकना होता है। और बुड़बक यह उजाला हमारी ही वजह से तो है।' हमने कहा -उ सब मत बताओ। तुम्हारे ऊपर तोहमत लगानी थी सो लगा दी। रात जब सबसे ज्यादा अँधेरा था तब तुम नहीं चमके तो सुबह जब उजाला हो गया तो तुम्हारा चमकना बेकार है।

सूरज भाई मुस्कराते हुए चमकते रहे। हमारे ऊपर हंस भी रहे होंगे। लेकिन हमने जो हमें जो कहने को कहा गया था , जो तोहमत लगानी थी वह हमने बिना कोई दिमाग लगाये सूरज भाई से कह दिया।

पुल के नीचे देखा। एक आदमी चूल्हे में दाल पका रहा था।दाल चुर रही थी।इस बीच वह आँख बन्द करके झपकी ले रहा था।


दीपा स्कूल के लिए तैयार हो रही थी। उसके पापा रिक्शा लेकर चले गए थे। आज वुधवार को सफेद ड्रेस थी उसकी। कोठरी के अंदर से वह अपनी मुट्ठी में कुछ लाई और मुझे दिखाया। मुट्ठी में उसकी पासपोर्ट साइज फोटो थी। उसके पिता ने बताया था कि उसका आधार कार्ड बनना है। पूछा कैसी है फोटो? हमने कहा-'बहुत अच्छी।' फिर अपने ज्यामेट्री बॉक्स में रखी एक और फोटो दिखाई उसने। उसके भाई की फोटो है वह जो गांव में पढ़ता है इंटर में। अपनी बहन की कोई फोटो नहीं है उसके पास।

हमसे बात करते हुए दीपा बैठकर सीसे में देखते हुए अपने बाल काढ़ती रही। सर में ऊँगलियों से बालों के बीच पगडण्डी बनाते हुए चोटी की। सर का पीछे का हिस्सा दिखाकर हमसे पूछा -'चोटी ठीक हुई पीछे।' हमने कहा-हाँ।


हमने जो फोटो लिए थे वह उसको दिखाए। उसने सब देखे।फिर हमने उसको 'सेल्फी' लेना सिखाया। चार सेल्फी ली बच्ची ने। हमने पूछा-सबसे अच्छी कौन है ? उसने एक फोटो बताई।फिर हमसे पूछा -'आपको कौन सी अच्छी लगी?' हमने बतायी जिसमें वह मुस्करा रही थी। फिर उसने कहा-'मेरे शेरू की भी एक फोटो खींचिए।' शेरू मने उसका कुत्ता। मैंने कहा-'तुम खुद खींचो।' उसने खींची।खुश हुई।

हम लौटकर मेस आ गए। पोस्ट लिख डाली। अब जाते हैं दफ्तर। आप लोग मजे से रहिये। मस्त। बिंदास। मुस्कराते हुए।

Post Comment

Post Comment

No comments:

Post a Comment

Google Analytics Alternative