Monday, March 24, 2025

जिन्दगी ऐसी नदी है जिसमें देर तक साथ बह नहीं सकते

 रमानाथ अवस्थी जी अद्भुत गीतकार थे। उनके गाए गीतों के मुखड़े उस समय के लोगों के जेहन और ज़बान पर छाए रहते थे। जिन लोगों ने उनको आमने-सामने बैठकर सुना होगा, उनका जादू वे ही महसूस कर सकते हैं। रमानाथ अवस्थी जी का एक गीत मुझे अक्सर याद आता है:

"आज इस वक्त आप हैं लेकिन,
कल कहां होंगे कह नहीं सकते।
जिंदगी ऐसी नदी है जिसमें
देर तक साथ बह नहीं सकते।"
यह गीत मैंने उनसे करीब 27-28 साल पहले (1998-1999 ) शाहजहांपुर के कवि सम्मेलन में सुना था । उस समय तक उनकी बाई पास सर्जरी हो चुकी थी। गाकर गीत कम पढ़ने लगे थे। स्वास्थ्य अच्छा नहीं था। लेकिन हमारे आग्रह पर वे शाहजहांपुर आये। और गीतों के अलावा यह गीत उन्होंने गाकर पढ़ा था। तबसे मेरे मन में बसा है उनका यह गीत। मेरे पास इस गीत का आडियो मौजूद था। इसको वीडियो में बदलकर यूट्यूब में पोस्ट कर रहा हूँ ताकि अधिक से अधिक लोगों तक पहुँच सके। गीत का लिंक टिप्पणी में दिया है। सुनकर अपनी प्रतिक्रिया दीजिए। रमानाथ जी की बातचीत और गीत इस प्रकार है:
" कविता सुनाने से पहले दो शब्द कहने का मन है। कविता लिखना जितना कठिन है उससे कठिन है उसके साथ होना। हमारे मंच पर और हमारी आडियंस में बहुत अच्छे-अच्छे लोग विराजमान हैं। आप सबका मैं कविता के इस क्षण में स्वागत करता हूं और ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि आपका अधिक से अधिक समय शब्द के साथ कटे। शब्द कभी हमको आपको धोखा नहीं देता। मैं आपसे एक बड़े दिल से प्रार्थना कर रहा हूं। आपका शहर (शाहजहांपुर) जहां एक बलिदानी शहर है वहीं पर इस शहर के कुछ कवियों ने अपनी कविता के द्वारा इस शहर को बहुत बड़ा नाम दिया है। दामोदर स्वरूप ’विद्रोही’ , अग्निवेश शुक्ल आपने इनको अवश्य ही सुना होगा। मैं बहुत प्रसन्न हूं कि श्रोताओं में आपके शहर के इतने गण्यमान कवि उपस्थित हैं। आप सबको मैं अपना स्नेह प्रदान करता हूं।
आप मुझको शान्ति से सुनेंगे तो मुझको बड़ा अच्छा लगेगा क्योंकि दिल से जो सुना जाता है वही भजन भी होता है और वही शब्द भी होता है। ये जो ताली या जो आशीर्वाद के बहाने जो ताली बजवाने का सिलसिला है, क्षमा करिये ये शुद्ध कवि को शोभा नहीं देता। जो कुछ मेरे पास शब्द हैं मैं आपको दे रहा हूं। आप मेरे पास शब्दों के पास होने की कृपा करें। बस! इतना ही मैं निवेदन करता हूं। आप अपने हाथों को कष्ट न दें। मैं आपसे बिल्कुल नहीं कहूंगा कि आप ताली बजाइये, आप मुझे आशीर्वाद दीजिये। ये मैं आपसे आग्रह बिल्कुल नहीं करूंगा। मेरा आग्रह है कि अगर आप मुझको सुनते हैं तो यही मेरे लिये आपका सबसे बड़ा आदर होगा,प्रेम होगा। मैं पहले कुछ पंक्तियां आपको सुना रहा हूं। उसके बाद दो-एक गीत आपको छोटे-छोटे सुनाना चाहता हूं। अगर आपका हिसाब-मेरा हिसाब ठीक रहा। पहले कुछ पंक्तियां हैं:
आज इस वक्त आप हैं,हम हैं
कल कहां होंगे कह नहीं सकते।
जिंदगी ऐसी नदी है जिसमें
देर तक साथ बह नहीं सकते।
वक्त मुश्किल है कुछ सरल बनिये
प्यास पथरा गई तरल बनिये।
जिसको पीने से कृष्ण मिलता हो,
आप मीरा का वह गरल बनिये।
जिसको जो होना है वही होगा,
जो भी होगा वही सही होगा।
किसलिये होते हो उदास यहाँ,
जो नहीं होना है नहीं होगा।
आपने चाहा हम चले आये,
आप कह देंगे हम लौट जायेंगे।
एक दिन होगा हम नहीं होंगे,
आप चाहेंगे हम न आयेंगे॥
-रमानाथ अवस्थी"

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