Thursday, March 06, 2025

हंसने का मतलब यह नहीं कि आप जीवन की गम्भीरता को नहीं समझते


 हंसने का मतलब यह नहीं कि आप जीवन की गम्भीरता को नहीं समझते। इसका मतलब यह है कि आप जीवन की व्यर्थता को समझ चुके हैं- Neeraj Badhwar ('बातें कम SCAM ज़्यादा ' पेज नम्बर 10)

नीरज बधवार हमारे समय के सबसे लोकप्रिय और बेस्टसेलर घराने के व्यंग्य लेखकों में हैं। उनकी किताबें 'हम सब Fake हैं' और 'बातें कम Scam ज़्यादा' बहुचर्चित, बहुबिक्रित और बहु पठित रही हैं। दोनों किताबें मेरे पास हैं यह साबित करने के लिए ही दूसरी किताब का उद्धरण लिखा।
विसंगतियों को पकड़ने और उनको फ़ौरन जुमलों में व्यक्त करने में नीरज को कमाल का अभ्यास है। राजनीति, क्रिकेट और सामाजिक पक्षों, जिन पर अक्सर राजनीति की छाया रहती है, पर उनकी जुमलेबाज़ी 'काबिल-ए-चोरी' मानी जाती है। बड़े-बड़े सूरमा उनके 'ख़ज़ाना-ए-जुमला' पर हाथ साफ़ करते हुए उन पर उनके ही जुमले को चोरी किया हुआ बताते हैं।
आज के शरीफ़ इंसानों की तर्ज़ पर नीरज खुद अपनी तारीफ़ करने में संकोच करते हैं लेकिन जो लोग उनके बारे में जानते हैं वे बताते हैं:
"राजस्थान के श्रीगंगानगर में पले-बढे नीरज बधवार ने कॉलेज खत्म होने तक जिन्दगी में सिर्फ़ तीन काम किये- टी.वी. देखना, क्रिकेट देखना और देर तक सोना। इनमें किसी में कोई कैरियर नहीं बना सो जर्निलिज्म का को१र्स करने के बाद 2023 तक टाइम्स ऑफ़ इंडिया (डिजिटल) में क्रिएटिव एडिटर के तौर पर काम करने के बाद से पूर्णतः स्वतंत्र लेखन, सीधे शब्दों में कहें तो आजकल बेरोज़गार हैं। खुद को मूलतः व्यंग्यकार और भूलत: पत्रकार मानने वाले हिन्दी के सबसे बीहड़ वनलाइनर नीरज व्यंग्य के हल्के में कई काम कर चुके हैं। हास्य-व्यंग्य न्यूज पोर्टल से शुरु करते हुये फ़ेकिंग न्यूज और क्रिकेट मैच की व्यंग्यात्मक रनिंग कमेंट्री तक उनके खाते में हैं।"
नीरज बधवार के बेरोज़गार होने के कारण की पड़ताल करने पर पता चला कि नीरज जी के ज़्यादातर जुमले विपक्ष के लोगों पर होते हैं। उनकी इस प्रवृत्ति के कारण ही सरकार ने उनको बेरोज़गार रखा है यह मानते हुए कि एक बेरोज़गार इंसान के पास रोज़गार वाले इंसान के मुक़ाबले रोज़गार का एक मौक़ा ज़्यादा होता है।
नीरज बधवार से पिछले दिनों झाँसी में बुंदेलखंड लिट्रेचर फ़ेस्टीवल में मुलाकात हुई। नीरज जी का सत्र जुमलेबाज़ी पर था। उन्होंने आजकल की मीडिया की प्रकृति पर बहुत अच्छी बातचीत की।
आजकल नीरज जी छोटे-छोटे वीडियो बनाकर विविध मुद्दों पर अपनी राय रखते हैं। दो दिन पहले विराट कोहली की पारी ने आस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ भारत की जीत की नीव रखी। नीरज ने अपने वीडियो में बहुत अच्छे तरीक़े से समझाया है कि विराट की इस पारी के पीछे उनकी मेहनत, लगन और समर्पण है। वीडियो का लिंक टिप्पणी में।
विराट कोहली से तो हम व्यक्तिगत तौर पर परिचित नहीं हैं लेकिन ख़ुशी की बात है हम नीरज बधवार को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं। नीरज जिस मेहनत और लगन से अपना काम करते हैं उसमें भी बहुत कुछ है सीखने को। झाँसी में जब हम लोग मेला घूमने (मैं आलोक पुराणिक) निकल रहे थे तब नीरज अपनी रिपोर्ट/लेख अख़बार में भेजने के लिए होटल में रुके थे। इस चक्कर में लंच भी छूट गया उनका और शाम को भूखे पेट ही जुमलेबाज़ी करनी पड़ी उनको।
नीरज बधवार की तारीफ़ का कारण यह है कि आने वाले समय में जल्द ही नीरज जब विराट कोहली से सीख लेकर अपनी मेहनत, लगन और समर्पण के चलते और बड़े आदमी बन जाएँगे तब हम लोगों को बताएँगे - हम भी नीरज जी को जानते हैं। उनसे हमारे इतने दोस्ताना सम्बंध हैं कि वे हमारी खुलेआम तारीफ़ का भी बुरा नहीं मानते।

https://www.facebook.com/share/p/18B6r4Rt3o/

No comments:

Post a Comment