Wednesday, March 05, 2025

आदमी एक बार सेल्समैनी का धंधा पकड़ ले तो ज़िंदगी भर सेल्समैन ही रहता है

 


कल मरियमपुर अस्पताल के पास एक ठेले पर खाने का सामान बिकते देखा। उसमें दुकानदार के नाम के आगे प्रो. लिखा था। काफ़ी पहले दुकानों के नाम के आगे प्रो. लिखा हुआ तो देखते सोचते ये प्रोफ़ेसर लोग दुकान क्यों खोले हैं? तब हमको पता नहीं था कि दुकानों के आगे जो प्रो. लिखा होता है उसका मतलब प्रोप्राइटर मतलब दुकान का मालिक होता है।

बाद में मुस्ताक अहमद युसुफ़ी साहब के हवाले से पता चला - "आदमी एक बार प्रोफ़ेसर हो जाये तो जिन्दगी भर प्रोफ़ेसर ही रहता है , चाहे बाद में वह समझदारी की बातें ही क्यों न करने लगे।"
ऐसे ही सेल्समैन का मतलब हम वह इंसान से समझते थे जो गली-गली घूमकर दरवाज़े-दरवाज़े सामान बेचता है। बाद में पता चला कि दुनिया के बड़े-बड़े देशों के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति तक सेल्समैन का काम करते हैं। देश-देश घूमकर या अपने यहाँ लोगों को बुलाकर, घेर-घार कर, कहते हैं हमारा ये हथियार ले लो, हमारे आदमी की बिजली ख़रीद लो, हमारे मालिक की कम्पनी अपने यहाँ लगवा लो।
क्या पता आगे यह भी कहते हों -'हमारा सामान ख़रीद लो, भगवान आपके बच्चों का भला करें। वे ख़ूब फलें-फूलें।' क्या पता विदा होते समय ताली भी बजाते हों।
युसुफ़ी साहब की तर्ज़ पर कहें तो -'आदमी एक बार सेल्समैनी का धंधा पकड़ ले तो ज़िंदगी भर सेल्समैन ही रहता है भले ही उसका मालिक उसको कहीं का राष्ट्रपति/प्रधानमंत्री ही बनवा दे।'
अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के प्रक्रिया के बारे में एक अमेरिकी राष्ट्रपति ने ही कहा था -" अमेरिका में कारपोरेट सड़क चलते किसी आदमी को उठाकर अमेरिका वालों से कहता है -‘ये तुम्हारा नया राष्ट्रपति है।'"
सेल्समैन वाली बात तब ध्यान में आयी जब कल हमने मरियमपुर चौराहे के पास होली की पिचकारी बेचते हुए कुछ बच्चों महिलाओं को देखा। सब लोग अपनी आँखों में रंगीन चश्मा लगाए हुए थे।
रंगीन चश्मा लगाए सड़क पर पिचकारी बेचते लोगों को देखकर यूरोप, अमेरिका के वे राष्टाध्यक्ष याद आए जो बढ़िया लकदक ड्रेस पहने अपना-अपना सामान बेचने-ख़रीदने का मोलभाव करने में लगे हैं। उनको लाखों-लोगों की ज़िंदगी की कोई चिंता नहीं। वे मरे चाहे जिएं, हमारा नुक़सान नहीं होना चाहिए।
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