Wednesday, March 19, 2025

आदमी एक बार प्रोफ़ेसर हो जाये तो जिन्दगी भर प्रोफ़ेसर ही रहता है

 


मरियमपुर अस्पताल के सामने मट्ठा, ब्रेड (बेड लिखा है ठेलिया में ) मक्खन, पाव की ठेलिया के नीचे प्रो. राम किशोर सक्सेना लिख देखकर हमें याद आया कि वर्षों तक हम दुकानों के साथ प्रो. लिखा देखकर सोचते थे कि ये प्रोफ़ेसर लोग दुकान क्यों खोले हुए हैं। दुकान ही खोलनी थी तो प्रोफ़ेसर क्यों हुए ?

बाद में पता चला प्रो. का मतलब प्रोप्राइटर भी होता है।
प्रोफेसर से याद आया मुस्ताक अहमद यूसुफ़ी का डायलॉग -“आदमी एक बार प्रोफ़ेसर हो जाये तो जिन्दगी भर प्रोफ़ेसर ही रहता है , चाहे बाद में वह समझदारी की बातें ही क्यों न करने लगे।”

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