कछुआ संरक्षण संस्थान देखते हुए क़रीब-करीब शाम हो गयी थे। अगला स्पॉट श्रीलंका का प्रसिद्ध बेंटोटा बीच था।
चूँकि हम दो दिन से लाया बीच होटल के पास के समुद्र तट पर कई बार टहल चुके थे इसलिए कुछ लोगों का मत हुआ कि वापस होटल लौटा जाए। होटल वहाँ से क़रीब दो घंटे की दूरी पर था। लेकिन 'कुछ लोगों' से कुछ ज़्यादा लोग बेंटोटा समुद्र तट देखने की इच्छा वाले निकल आए। लिहाज़ा हम लोगों की बस चल पड़ी बेंटोटा बीच की तरफ़।
बेंटोटा बीच श्रीलंका का प्रसिद्ध समुद्र तट है। यह अपनी सुनहरी रेत, साफ नीले पानी और ताड़ के पेड़ों से घिरी तटरेखा के लिए प्रसिद्ध है। यह धूप सेंकने, तैरने और विंडसर्फिंग, जेट स्कीइंग और स्नोर्कलिंग जैसे पानी के खेलों का आनंद लेने के लिए एक आदर्श स्थान है।
बेंटोटा नाम की नदी भी है वहाँ। नाव सफ़ारी के लिए एकदम सही है, जहाँ पक्षियों, मगरमच्छों और जल मॉनीटरों सहित विविध वन्य जीवन को देखने का मौका मिलता है। आगंतुक कयाकिंग और नदी में मछली पकड़ने जैसे जल खेलों में भी शामिल हो सकते हैं।
बेंटोटा बीच हनीमून मनाने वालों और जोड़ों के लिए भी एक लोकप्रिय गंतव्य है। शांत वातावरण, शानदार रिसॉर्ट्स और सुंदर सूर्यास्त के साथ मिलकर एक रोमांटिक माहौल बनाता है। समुद्र तट पर मोमबत्ती की रोशनी में डिनर का आनंद लें या अपने प्रियजन के साथ तट पर आराम से टहलें। हालाँकि हममें से कोई इस सुविधा का लाभ उठाने का सुपात्र नहीं था। लोग या तो वर्षों पहले के शादी-सुदा था या फिर कुंवारे थे।
जब हम बेंटोटा बीच पर पहुँचे तो सूरज डूबने के लिए तैयार हो रहा था। समुद्र में उतरते हुए अपनी किरणों की आख़िरी खेप वह समुद्र किनारे भेज रहा था।
वहाँ लोग समुद्र किनारे टहलते , नहाते, फ़ोटो खिंचाते दिखे। एक बच्चा समुद्र किनारे की गीली रेत में गड्डा करके आराम से गड्डे की कुर्सी जैसी बनाकर बैठ गया था। समुद्र की लहरें किनारे की तरफ़ आतीं, उसको भिगोते हुए और आगे की तरफ़ जाती फिर वापस समुद्र में मिलने के लिए लौट जातीं। वह बच्चा आराम से गड्डे की कुर्सी में बैठा लहरों को आते-जाते देखते आनंदित होता रहा।
कुछ देर बाद शायद वह गड्डे में बैठे-बैठे बोर हो गया तो गड्डे से निकलकर बाहर आया और भागता हुआ समुद्र की तरफ़ भागता चला गया और पानी में नहाने लगा। उसके परिवार के लोग भी उसके साथ थे।
बच्चे के गड्डे में बैठे रहने और फिर बोर होकर उठने और पानी में जाने को देखकर मुझे लगा कि कोई समाज भी बहुत दिनों तक पतन के गड्डे में बैठा नहीं रह सकता। कभी न कभी वह पतन से ऊबकर बाहर आएगा और आगे बढ़ेगा।
वहीं पास में कुछ विदेशी धूप स्नान कर रहे थे। समुद्र किनारे आधी चौड़ाई के तख़्त डाले पीठ के बल लेते हुए आसमान की तरफ़ आँख मूँदकर लेटे हुए थे। बीच-बीच में इधर-उधर नज़ारे गुज़ारते हुए मुआयना भी चलता रहा उनका।
हमारे साथ के लोग समुद्र के किनारे खड़े होकर फ़ोटो खिचा रहे थे, वीडियो बना रहे थे। हमने भी समुद्र के किनारे खड़े होकर अपनी आवाज़ में कमेंट्री करते हुए वीडियो बनाया।
वहाँ कुछ बच्चे पतंग भी उड़ा रहे थे। दो पतंगे आसमान में अग़ल-बग़ल उड़ती हुई एक-दूसरे के पास टहल रहीं थीं। शायद दोनों के बीच पेंच-विराम था इसलिए एक दूसरे को काटने के लिए पतंगों के पेंच नहीं लड़ रहे थे।
चूँकि सूरज समुद्र में डूब रहा था इसलिए समुद्र के पानी के साथ तरफ़ पीठ फ़ोटो खिंचाने में फ़ोटो/ वीडियो काले-सफ़ेद आ रहे थे। इसका उपाय लोगों ने ब्लैक एंड व्हाइट फ़ोटो खिंचाते हुए किया। उनमें से कुछ फ़ोटो देखकर लगा कि ब्लैक एंड व्हाइट फ़ोटो की भी बात ही कुछ और होती है। एकाध फ़ोटो समुद्र तट के लंबवत खड़े होकर भी खिंचवाए जिनमें लोगों की शक्लें पहचान में आ रहीं थीं लिहाज़ा बिना किसी हिचक के कहा जा सकता था कि फ़ोटो अच्छे आए हैं।
डूबते सूरज की रोशनी में समुद्र तट की सुनहरी रेत और समुद्र का पानी चमकता दिख रहा था। ऐसा लग रहा था मानो सूरज विदा होते समय रेत और पानी को चमकदार सुनहरी रोशनी की टिप दे रहा हो।
समुद्र किनारे के वीडियो बनाते हुए विदेशी सैलानी जब कैमरे के सामने आते तो उँगलियाँ अपने आप कैमरा को ज़ूम कर देतीं। हमारे साथ के लोग शिकायत भी करते सुनाई दिए एकाध वीडियो में -"शुक्ला जी हमारी फ़ोटो नहीं ले रहे हैं।"
थोड़ी देर बाद शाम हो गयी और हम लोग वापस होटल की तरफ़ चल दिए।
#श्रीलंका, #shrilanka-25
https://www.facebook.com/anup.shukla.14/posts/pfbid02ZT6jXeRdaZgzeoo3YP2NFuEVGNtJ8sLfEHTJ5P1wf4Aa9n11xTYvG3BHe923vXK1l

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