उस दिन 9 फ़रवरी थी। हमारी शादी की सालगिरह। साथ के लोग सुबह ही मुबारकबाद दे चुके थे। घर परिवार के लोगों के फ़ोन भी आ चुके थे। 36 साल हुए थे उस दिन शादी को। इसके पहले हर 9 फ़रवरी को देश में रहे। यह पहला मौक़ा था जब हम इस मौक़े पर देश के बाहर थे।
हम लोग बस में बैठकर चले ही थे कि हमारे समूह के एक साथी टंडन जी घोषणा की -'अब जयमाल होगा।'
टंडन जी ने अंजनेयार मंदिर से चलते समय दो माला ख़रीद लिए थे। उनको अपने पास से निकालते हुए हम लोगों को जयमाल का आदेश दिया।
बस में हम पीछे बैठे थे। श्रीमती जी बीच में। हमको बस के बीच वाले भाग में आने को कहा गया। जयमाल के लिए एक-एक माला हम लोगों को थमा दिए गए।
सड़क पर चलती बस में 36 साल पुराना जोड़ा बस के इधर-उधर होने के चलते हिलते-डुलते पास आया और जलमाल की रस्म हुई। जयमाल के दौरान दूल्हे-दुल्हन के साथी बने साथ के लोग पहले आप, पहले आप करते हुए उकसाते रहे।
जय माल के बाद मज़े लेने का सिलसिला शुरू हुआ। डायलाग बाज़ी हुई:
-भारत से भागकर श्रीलंका में रचाई शादी।
- प्रेमी-प्रेमिका ने विदेश में किया जयमाल।
-बस में हुआ जयमाल। बारातियों के हुए गाल लाल।
इसी तरह की बयानबाज़ी के बाद के बस में डांस का सिलसिला शूरु हुआ। जिसको भी ज़रा भी हिलना-डुलना आता था उसने बस के बीच में आकर या अपनी जगह ही बैठे-बैठे ठुमकते हुए डांस-यज्ञ में अपनी-अपनी आहुति दी।
बस में हुए डांस के वीडियो देखते हुए अभी एक महीने पहले लौट गए और वे सब गाने सुन रहे हैं जिन पर बस में ठुमके लगाए गए :
-रिश्ता दिल से दिल के एतबार का।
-ज़रा पास आओ तो चैन आ जाए।
-आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर।
-आई जवानी सर पे मेरे
-ओ किसी डिस्को में जाएँ।
जयमाल, जुमलेबाज़ी और गाने-बजाने के साथ-साथ लोगों के पास मौजूद खाने के डब्बे भी खुलते गए और बस में टहलते रहे। हम लोग खाते-पीते, गाते-बजाते, आसपास के नज़ारे देखते आगे बढ़ते रहे।
क़रीब दो घंटे बाद हम लोग उनाबतूना के लोया-बीच होटल पहुँचे। हमको यहाँ दो दिन रुकना था।
होटल के लॉन में लोग क्रिकेट खेल रहे थे। स्थानीय लोगों का कोई मैच चल रहा था। इतवार का दिन होने के कारण छुट्टी के दिन लोग पिकनिक मना रहे थे। लॉन के बाद दोपहर का समुद्र लहरा रहा था। होटल की लाबी में बैठे वहाँ का नजारा देखते हुए और कमरों में जाने का इंतज़ार करते हुए हमने वहाँ का वीडियो बनाया। कमेंट्री की। यह भी सोचा कि अब घूमते हुए वीडियोबाज़ी किया करेंगे।
शाम को सब लोग समुद्र किनारे जमा हुए। दोपहर को जो माला जयमाल के लिए प्रयोग किए थे वे अभी साथ में थे। उनका उपयोग करते हुए समुद्र के किनारे दुबारा सभी जोड़ों के साथ जयमाल हुआ। फ़ोटो लिए गए। जो लोग अकेले आए थे उनका उनके समुचित साथियों के साथ वीडियो शूट हुआ।
हमारी मस्ती देखकर समुद्र की लहरें भी इठलाते हुए समुद्र किनारे की तरफ़ आतीं रहीं। अपनी हाज़िरी लगाकर, मस्ती लेते हुए वापस लौटतीं रहीं। वापस लौटकर शायद उनसे किनारे के किस्से सुनकर लहरों की दूसरी टुकड़ी भी लपककर किनारे की तरफ़ आतीं-जातीं रहीं। समुद्र शायद उनको हल्ला मचाते हुए रोकने की कोशिश कर रहा था लेकिन जब मस्ती छाई हो तो कौन किसकी सुनता है।
यह सब देखते हुए सूरज भाई मुस्करा रहे थे। उनकी मुस्कान से लग रहा था मानो कह रहे हों, ख़ूब ग़दर काट रहे हो। मज़े करो।
थोड़ी देर में सूरज भाई विदा हो गये लेकिन लोगों की मस्ती का सिलसिला मुसलसल जारी रहा। हमने वहाँ भी वीडियो कमेंट्री की।
अंधेरा होने पर हम लोग वापस लोग अपने-अपने कमरों में लौट आए।
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