Thursday, June 19, 2014

क्या जरूरी है करें विषपान शंकर की तरह



आज दोपहर को पुलिया पर जामुन बिकती दिखी।

जामुन बेचने वाले भाई राम मोहन गुप्ता ने बताया कि अलग-अलग तरह के फसल बेचते हैं। पांच छह सौ की बिक्री रोज हो जाती है। बीस रूपये पाँव के हिसाब से बेंच रहे थे। हमने भी पाव भर तौला लिए। जामुन को एक छोटी हडिया में नमक के साथ डालकर उसके मुंह पर पालीथिन पहना कर हिलाते हैं तो जामुन मुलायम हो जाती है। स्वाद बढ़ जाता है।

जामुन खाते हुए राहत इन्दौरी का शेर याद आ गया:

क्या जरूरी है करें विषपान शंकर की तरह,
सिर्फ जामुन खा लिए और होंठ नीले हो गए।


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