Sunday, June 22, 2014

पुलिया पर बैठाकर।पप्पी ली




हमारे लिए आम तौलने के बाद रामफल ने अपने परिवार के बारे में बताया:

"यहीं हमारी शादी हुई। अभी सबेरे लड़का आया था खमरिया से। बहू और नाती-नातिन साथ में।बहू शर्मा रही थी। सड़क पार खड़ी रही। फिर हमने उसको बुलाया। डेढ़ साल महीने का नाती है। उसको खिलाया दस पन्द्रह मिनट। यहीं पुलिया पर बैठाकर पप्पी ली उसकी। नाती-नातिन को दस-दस रूपये दिए। फिर वो घर गए। नातिन यहीं स्कूल में पढ़ती है। आठ में है।"

जिस अंदाज में चहकते और खुश हुए पुच्ची लेने की बात रामफल बता रहे थे उससे लगा काश कोई कवि दांत टूटे,ऊँचा सुनने वाले इस पचहत्तर पार के इस धवल केशी बुजुर्ग का सौन्दर्य/वात्सल्य वर्णन करता।

चलते समय टाइम पूछा और बोले-"तीन बजे भतीजा आएगा खाना लेकर। उसके बाद बाजार जायेंगे।"

उनकी फोटो फेसबुक पर दिखाई तो रामफल खुश हो गये। बोले -"पंजाब से एक सरदार आया था। हमारी फोटो खीँच के ले गया था। अख़बार में छापी थी। पहले फल मंडी जीसीऍफ़ के पास थी।पचास साल से फल बेच रहे हैं।"




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