शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो गया। काक्रोच जनता पार्टी ने आंदोलन खत्म कर दिया। इसे युवाओं (जेन Z ) की जीत बताया गया। यहाँ जेन Z का मुकाबला सरकार से था। आईटी सेल बनाम जेन Z का था। व्हॉट्सएप और इंस्टाग्राम का था। जेन Z ने अपनी रील, वीडियो की मिसाइलों से बीजेपी के आई टी सेल के आयरन डोम के धुर्रे उड़ा दिए।
जेन Z की रील, वीडियो और पोस्टर देखकर उनकी रचनात्मकता, wit, humor और पंच देखकर जैसा महसूस हुआ, बयान करना मुश्किल। पटना प्रदर्शनकारियों के वीडियो रील देखकर लगा कि क्या बच्चे हैं।
- एक बच्चा पूछता है - टीयर गैस का इंतजाम नहीं किया।
-एक बच्चा बेरिकेटिंग को रेल बनाकर सड़क पर मजे करने लगा।
-वाटर कैनन चलने पर बच्चे रेन डांस करने लगे।
-लाठी चार्ज के समय बच्चे राष्ट्रगान गाने लगे। पुलिस वाले शायद ठिठक गए होंगे।
-जंतर-मंतर पर एक बच्चा अपने माथे पर पोस्टर लगाए थे ‘लाठीचार्ज होने पर जगा देना।’
-एक लड़का के ख़ाली पोस्टर को देखकर किसी ने पूछा -'इसमें कुछ लिखा नहीं है?' बच्चे ने जबाब दिया -'इसमें प्रधानमंत्री जी की खूबियां लिखी हैं। केवल सच्चे अंधभक्त को दिखेंगीं।'
- एक लड़के का पुलिस वाले ने पीछा किया। पकड़ नहीं पाया। हाँफ गया। बच्चे ने उसका वीडियो बनाकर पोस्ट कर दिया। साथ में पुलिस वाले को समझाइस भी -'फिटनेस पर ध्यान दिया करो।'
-एक लड़की बड़ी मासूमियत से पुलिस वाले से पूछ रही थी -'आपको लाठी चार्ज के लिए आदेश कैसे मिलते हैं? तेज मारना है, धीरे मारना है, खोपड़ी खोलना है? क्या आदेश मिलता है?'
इसी तरह के अनगिनत रील्स, वीडियो, मीम्स से सोशल मीडिया भरा पड़ा है। अधिकांश मीम्स प्रधानमंत्री जी @को संबोधित करते हुए हैं। इन रील्स ने प्रधानमंत्री जी को नॉन बायलॉजिकल से आम इंसान बना दिया। यह इस आंदोलन की उपलब्धि है। एक के साथ एक फ्री वाले अंदाज़ में।
प्रशांत किशोर ने इस पर ट्वीट करते हुए लिखा -' Whatsapp के जनरेशन ने मोदी को बनाया है और Instagram की जनरेशन ने मोदी को जमीन पर का दिया।'
कई लोग युवाओं की इस जीत से दुखी हैं। उनका मानना है कि सरकार को 'सरेंडर' नहीं करना चाहिए था। विदेशी हाथ, देश को अस्थिर करने वाली ताकतों का हाथ होने की बातें भी कही जा रही हैं। जेन Z की भाषा से भी लोग दुखी हैं। और भी तमाम दुख हैं पुरानी पीढ़ी के। पीढ़ियों के संघर्ष में ऐसा होना स्वाभाविक है।
यह आंदोलन एक नीट पेपर के लीक होने से उपजा आंदोलन नहीं था। देश के तमाम युवाओं के संचित आक्रोश का प्रकटीकरण था। देश में लगातार नौकरी, रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं। बार-बार पेपर लीक होने से लोगों में निराशा उपज रही है। युवाओं का भविष्य अनिश्चित है। ऐसे सवाल हिंदू ख़तरे में है, सनातन खतरे में है, देश को बाहरी ताकतों से खतरा है , सरकार का विरोध करने वाले देश द्रोही हैं का हव्वा खड़ा करके बहुत दिनों तक नज़रअंदाज़ नहीं किए जा सकते। अपनी असफलताओं को ढकने के लिए बनवायी गई फ़िल्मों के असर सिनेमहाल में रहने तक ही रहते हैं।
यह लिखकर पोस्ट करने से पहले से मैं सोच रहा हूँ -'काश मैं भी जेन Z की तरह कोई सटीक रील या पोस्टर बना सकता।' इस पोस्ट की जगह इंस्टाग्राम पर उसे अपलोड करता। फ़िलहाल यहीं सही।

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