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Wednesday, November 19, 2025

किन्नर से मुलाक़ात



 लक्षद्वीप से लखनऊ गोवा होते हुए लौटे। सुबह नाश्ता करने के बाद फ्लाइट पकड़ी लक्षद्वीप से। होटल से हवाई अड्डे आते हुए सड़क के दोनों तरफ़ की समुद्र की लहरों ने किनारे तक आकर विदाई दी।

छुटका सा हवाई अड्डा है आगाती का। सामान चेक कराकर, बोर्डिंग पास लेकर अंदर गए। रन वे पर छुटका जहाज़ खड़ा था। सुबह गोवा से सवारियाँ लेकर आया था। लौटते में हमको ले जा रहा था।
गोवा पहुँचकर अनन्य दिल्ली की फ्लाइट पकड़ने दूसरे टर्मिनल चला गया। अपन की फ्लाइट 50 किलोमीटर दूर गोवा के दूसरे हवाई अड्डे से थी।
दूसरे हवाई अड्डे के लिए जाते हुए टैक्सी पकड़ी। टैक्सी ड्राइवर ने गोवा के तमाम किस्से सुनाये। भूतपूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पारिकर की तारीफ़ करते हुए कहा -"उनके जैसा कोई नहीं। वो बहुत ग्रेट था।"
पारिकर साहब की तारीफ़ करते हुए उसने मेरी तरफ़ देखकर यह भी कहा -"देखने में आप के जैसे ही थे पारिकर साहब।" हमने चुपचाप उसकी बात सुन ली और उनके किस्से सुनते रहे।
हवाई अड्डे पहुंचकर बोर्डिंग पास बनवाकर लाउंज में तसल्ली से नाश्ता किया। इसके बाद बोर्डिंग का इंतजार करते हुए लैपटॉप पर काम धाम करते रहे। कामधाम मतलब पोस्ट लिखते रहे।
बोर्डिंग शुरू होने के कुछ देर पहले बगल में दो महिलाएँ हमारे बगल वाली सीट पर आकर बैठ गईं। वे आपस में उड़िया और अंग्रेजी में वे आपस में कुछ-कुछ बतियाती रहीं। हम अपना काम में जुटे रहे।
अपना काम ख़त्म करने के बाद हम उनकी तरफ़ मुखातिब हुए। बातचीत शुरू हुई। "आप लोग भी लखनऊ जा रहीं हैं?" से बात शुरू हुई। उन्होंने बताया कि वे लोग मुंबई जा रहे हैं। ट्रांसजेंडर (किन्नर) कांफ्रेंस में भाग लेने के लिए। वहाँ किन्नरों के मसलों पर बात होनी है।
'खूबसूरत महिलायें किन्नर समुदाय से हैं' यह जानकर उनसे बात करने लगे। प्रिया त्रिपाठी Priya Tripathy और प्रियांशी दास Priyanshi Das पुरी में रहती हैं। दोनों साथ रहती हैं। घर वालों से संबंध हैं लेकिन रहती अलग हैं। प्रिया dermatologist हैं। त्वचा संबंधी उपचार करने वाली हैं । । प्रियांशी दास ने MSW की पढ़ाई की है। वे पूरी किन्नर एशोसियेशन की अध्यक्ष हैं।
प्रिया और प्रियांशी से और ज़्यादा बात नहीं हो पाई। उनकी फ्लाइट का समय हो गया था । वे बोर्डिंग के लिए चली गईं।
बाद में प्रिया से बात होने पर उन्होंने अपने बारे में कई बातें साझा की। बचपन में स्कूल में सामान्य बच्चों से अलग तरह का होने और महसूस करने के कारण उनको किस तरह की मानसिक प्रताड़ना सहनी पड़ी इसके अनुभव साझा किए। प्रिया ने बताया कि उनके और प्रियांशी के बीच माँ-बेटी का रिश्ता है।
प्रियांशी समाज में किन्नर समुदाय के लोगों को मिलने वाली स्वीकृति और सम्मान के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। वे इस बारे में पोस्ट लिखती रहती हैं। हाल ही में उनको Priyadarshini Dance Academy की तरफ़ से Odisha Trending Talent 2025 के रूप में सम्मानित किया गया।
प्रिया dermatologist का काम करती हैं। वे अपने इंस्टाग्राम में रील पोस्ट करती रहती हैं। लोकप्रिय गानों पर डांस करते हुए रील बनाती हैं। हाल ही में उन्होंने इंस्टाग्राम किताब पढ़ते हुए फ़ोटो लगाई है जिसका शीर्षक है - You become what you think. आप जैसा सोचते हैं वैसा हो जाते हैं। हमको अच्छा-अच्छा सोचना चाहिए। तभी हम अच्छे बन पाएंगे। समाज अच्छा बनेगा।
किन्नर समुदाय के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं लेकिन प्रियांशी और प्रिया से मुलाक़ात के बाद उनके बारे में जानने की उत्सुकता हुई। पता चला कि भारतीय संविधान के आर्टिकल 14, 15, 16 के तहत किन्नर समुदाय के लोग भी संरक्षण के अधिकारी हैं। प्रियांशी और प्रिया को उनके प्रयासों में सफलता के लिए शुभकामनाएँ।
गोवा से शाम की फ्लाइट पकड़कर हम लखनऊ आये। वहाँ से मेट्रो से अपने घर। इस तरह से हमारी लक्षद्वीप यात्रा संपन्न हुई।
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Tuesday, November 18, 2025

लक्षद्वीप की आख़िरी शाम


 

लैगून बीच पर टहलते हुए शाम को गई। वापस पैदल लौटे। बीच से ठहरने की जगह क़रीब पाँच किलोमीटर थी। अभी वहाँ ऐप आधारित वाहन सेवा शुरू नहीं हुई है। मतलब , इस बात की सुविधा नहीं थी कि कहीं खड़े हो गए और एप्प से सवारी बुक कर ली।
जिस रास्ते लौटे वह पतली सड़क थी। सड़क के दोनों तरफ़ घर। आगे चलकर दुकानें शूरू हो गई। जनरल स्टोर, इलेक्ट्रानिक स्टोर और रोजमर्रा के इस्तेमाल के सामान की दुकानें। दुकानों पर खरीदार कम ही दिखे। शायद रात हो जाने के कारण लोग घरों में हो। चहल-पहल कम ही दिखी सड़कों पर।
रास्ते में एक चौराहे पर एक छुटके बोर्ड पर महात्मा गांधी की फोटो के साथ कोई संदेश लगा था। शायद मलयालम में। वहाँ आसपास कोई दिखा भी नहीं जिससे पूछ सकते कि क्या लिखा है इसमें।
एक घर के पास मोटर साइकिलों, गाड़ियों का जमावड़ा था। घर के अंदर तमाम लोग बैठे थे। बाहर खड़े एक लड़के ने बताया कि किसी की मौत हो गई थी। उसके बाद की नमाज और दूसरे कार्यक्रम हो रहे थे।
आगे ही सड़क किनारे कब्रिस्तान दिखा। कब्रें सड़क किनारे तक थीं। कब्रों पर पत्थर लगे थे। उन पर स्थानीय भाषा में दफ़नाये जाने वाले लोगों के विवरण लिखे थे। बगल में लोगों के घर बने हुए थे। आजकल जिस कदर ज़मीन की कमी हो रही है, उसको देखते हुए आने वाले समय में मृतकों को दफ़नाना भी एक चुनौती होता जा रहा होगा।
सड़क किनारे बनी पुलिया पर दो लोग बैठे मोबाइल पर कुछ खेल रहे थे। रास्ता पूछने के बहाने उनसे बात करने लगे। अपना खेलना स्थगित करके वे हमसे बतियाने लगे। जम्फ़र और शफी । उनमें से एक होटल में काम करते हैं , दूसरे मछुआरे हैं। उन्होंने बताया कि वे मोबाइल में 'आन लाइन सट्टा' खेल रहे थे। उनके काम में बाधा न पड़े यह सोचकर हम आगे चल दिए।
सट्टा से करीब 30 साल पहले की एक दफ़्तर के दिनों की घटना याद आई। हमको हमारे साहब ने बात करने के लिए बुलाया था। दफ़्तर दूर था। टहलते हुए पहुंचे। साहब कहीं राउंड पर निकलने वाले थे। हमको देखकर रुक गए। बोले -"कहाँ थे इतनी देर? सट्टा खेल रहे थे क्या?"
हमने कहा -"क्या कह रहे हैं आप?"
साहब को लगा कुछ गड़बड़ बोल गए वो। उन्होंने कहा -"अरे हम ऐसे ही मजाक कर रहे थे।"
हमने साहब से कहा -" सर, मजाक तो ठीक है। हमको भी मजाक की आदत है। आपका मजाक तो हमने सह लिया। लेकिन आप हो सकता है हमारा मजाक न सहन कर पायें।"
साहब ने कुछ कहा नहीं। चुपचाप राउंड पर चले गए। दुबारा फिर कभी हँसी-मजाक नहीं हो पाया।
आज इस घटना को याद करते हुए लगा कि हमारी और साहब की उम्र और पद में काफ़ी अंतर था। लेकिन हमको लगता रहा कि कोई बात ग़लत लगे तो जबाब जरूर दिया जाना चाहिए। स्वतः स्फूर्त तरीक़े से होता रहा मेरे साथ हमेशा। इसका हमको नुकसान भी हुआ कई बार लेकिन यह सुकून हमेशा रहा कि चुप नहीं रहे।
आगे आगाती के मुख्य चौराहे पर कई जगह जाने के संकेतक लगे थे। एक चाय की दुकान पर बैठे लोग बतिया रहे थे। हम बार-बार बची हुई दूरी मोबाइल में देखते जा रहे थे। आगे फ़ेमिली रेस्टोरेंट भी खुला था लेकिन लोग बहुत कम थे वहाँ। सड़क पर इक्का-दुक्का वाहन और लोग गुजरते हुए दिख रहे थे।
हमारे ठहरने वाली जगह के पास दूसरे रेस्ट हाउस में लोग जमा थे। स्थानीय कलाकारों बाँस डाँस (बंबू डांस) कर रहे थे। ज़मीन की सतह से बाँस उठाते-रखते हुए उसके बीच से गुजरते हुए डांस। यह मिजोरम का एक पारंपरिक और प्राचीन नृत्य है। इसे चेराव (Cheraw) के नाम से भी जाना जाता है। इस नृत्य में, नर्तक क्षैतिज रूप से रखे गए बांस के खंभों के बीच कूदते और चलते हैं, जबकि अन्य लोग बांस को थामे रहते हैं और एक लयबद्ध पैटर्न बनाते हैं। डांस वीडियो आप इस पोस्ट पर पहुँचकर देख सकते हैं -https://www.facebook.com/share/v/178B7L9wqy/
कलाकारों ने कुछ देर डांस करने के बाद बाहर से आए लोगों से कहा कि वे भी डाँस करें। एक महिला और एक पुरुष ने चुनौती स्वीकार की। कलाकारों ने उनको सिखाया। महिला ने तो पहली बार में ही ठीक से डांस कर लिया। लेकिन पुरुष ने कुछ ग़लतियाँ करने के बाद अंतत: कर ही लिया। दोनों के डांस अभ्यास के बाद उनका शो ख़तम हो गया। हम भी अपने होटल लौट आए। डिनर करके कुछ देर समुद्र के किनारे टहले। लहरों का शोर सुना। इसके बाद कमरे पर आकर सो गए।
यह हमारे लक्षद्वीप प्रवास की आख़िरी रात थी। अगले दिन हमको वापस लौटना था।
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Wednesday, November 12, 2025

लैगून बीच पर खरीदारी और सेल्फी



 लक्षद्वीप प्रवास के आख़िरी दिन हम फिर से लैगून बीच घूमने गए। हम मतलब मतलब मैं, अनन्य और सुमन गुप्ता जी। बलवंत गुप्ता जी होटल में ही रहे। बाक़ी लोगों के घर पहुँचने या रास्ते में होने के मेसेज आने शुरू हो चुके थे।

लैगून बीच करीब पाँच किलोमीटर दूर है होटल से। ऑटो से गए। शाम हो गई थी। सूरज भाई अपनी दुकान समेटने की तैयारी में लगे थे। हमको देखकर खुशी से लाल हो गए। हमने उनके कई फोटो खींचे। खूबसूरत लग रहे थे।
सबसे पहले अपन गिफ्ट वाली दुकान पर गए। एक दिन पहले हैट का आर्डर देकर आए थे। दुकान पहुंचे तो दुकान पर मौजूद जसमीरा ने बताया हैट आ गए हैं। हमने कुछ हैट लिए। कुछ माला और कान की बालियाँ भी। चलते समय दुकान में मौजूद लोगों के फोटो लिए।
हैट के साथ जसमीर का फ़ोटो लिया। दुकान में खड़े फोटो साफ़ नहीं आया तो दुकान के बाहर आकर उसने फ़ोटो खिंचाया। अच्छा आया फोटो। हैट के साथ अपना फ़ोटो देखकर जसमीरा खुश हो गई।
चलने के पहले कुछ और लोग याद आ गए। हमने कुछ सामान और ले लिया। दुकान वालों ने कुछ आइटम 'गिफ्ट' के लिए देने की पेशकश की। हमने मना करते हुए उसके पैसे दिए। गिफ्ट इसलिए भी मना किया क्योंकि उन लोगों ने बताया था कि पंद्रह लोगों की रोजी-रोटी चलती है दुकान के काम से। यहाँ भी बिक्री कम ही होती है। हज़ार -डेढ़ हज़ार की ख़रीद में भी सौ रुपए की गिफ्ट ले लें तो ठीक नहीं।
फिर उन लोगों कोई अचार देते हुए कहा -"ये ले जाइए। 'अच्चा' है। टेस्टी है।" हमने कहा -"मछली का तेल है। हम नहीं खाते। वापस कर दिया।" दुकान में मौजूद लोगों के V बनाते हुए फ़ोटो लेने के बाद फिर बीच पर टहलने लगे।
बीच पर ही I Love laigoon लिखा हुआ सेल्फी /फोटो प्वाइंट था। हमने वहाँ खड़े होकर कई फ़ोटो खिंचाए। कोई अच्छा नहीं आया। अच्छा नहीं आया मतलब हमारी टी शर्ट पर जो लिखा था -"झाड़े रहो कलट्टरगंज" उसका फ़ोटो साफ़ नहीं आ रहा था। चेहरा तो खैर जैसा है वैसा ही आयेगा। कैमरा कोई चेहरा थोड़ी बदल देगा। आख़िर में एक ठो सेल्फी लिए जिसमें "झाड़े रहो कलट्टरगंज" साफ़ आ रहा था। सेल्फी में शक्ल देखकर ऐसा लग रहा है कि कोई दुखी आत्मा है। लेकिन "झाड़े रहो कलट्टरगंज" चमक रहा है।
पास में ही एक पिता अपने बच्चे को बालू में खिला रहा था। नारियल के खोल के आधे टुकड़े में बालू भरकर खाली कर रहा था। पिता बार-बार नारियल का खोल बच्चे की तरफ़ फेंक रहा था। बच्चा उसमें बालू भरता ख़ाली करता जा रहा था। पिता फ़ोन पर बात करते हुए बच्चे को खिला रहा था। बच्चा प्यारा लग रहा था।
पास में ही कुछ बच्चे बालू में फुटबॉल खेल रहे थे। सारे बच्चे नंगे पांव थे। पेनाल्टी स्ट्रोक की तैयारी चल रही थी। गोलकीपर गोल पर चौकन्ना खड़ा हो गया। बच्चे ने भागते हुए किक लगाई । गेंद लुढ़कते हुए गोलकीपर तक पहुंची। उसने गोल बचा लिया। बच्चों ने ताली बजाते हुए उसका हौसला बढ़ाया। अब दूसरा बच्चा किक के लिए तैयार होने लगा।
बच्चों को फुटबॉल खेलते छोड़कर हम आगे बढ़े। कुछ दूरी पर एक आदमी बच्चों को कसरत करा रहा था। गोल घेरे में बच्चों को बैठाए हुए अलग -अलग आसन। उनके पास एक फुटबॉल रखी थी। बातचीत से पता चला वो बच्चों को फुटबॉल सिखाते हैं।
हमारे साथ की सुमन गुप्ता जी ने बच्चों को इकट्ठा करके हँसना सिखाया। सब बच्चे फुटबॉल सीखना छोड़कर 'हा, हा, हा ' करने लगे। कुछ देर तक बच्चों को सिखाने के बाद हम लौट पड़े। बच्चे फिर फुटबॉल खेलने लगे होंगे।
शाम हो गई थी। हमारे साथ के लोग वापस लौटने के लिए कहने लगे। हमने पैदल आने को कहते हुए उनको वापस भेज दिया। हमको आगाती के गली -मोहल्ले देखने थे।
साथियों को विदा करते हुए हम कुछ देर और घूमे। बीच पर ही एक पेड़ की जड़ें देखकर लगा जैसे बुढ़ापे में पेड़ के हाथ की नसें दिखने लगीं हों।
एक बार फिर सादिया दुकान पर चाय पी। उसके पापा , छोटी बहन के साथ उसकी फ़ोटो ली। पीछे के बल्ब के चलते फ़ोटो साफ़ नहीं आई थी। कुछ देर उनसे बात करके फिर वापस चल दिए। वीडियो के देखने के लिए पोस्ट का लिंक नीचे दिया है।
पोस्ट से जुड़े वीडियो यहाँ देखे: https://www.facebook.com/share/v/17G2gBcbDt/
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Monday, November 10, 2025

लैगून बीच पर खरीदारी

 'सैंड बैंक' से लौटते हुए शाम हो गई थी। लौटते हुए कुछ लोग वेस्टलैंड से होटल चले गए। बाक़ी लोग पास ही स्थित लैगून बीच गए। खरीदारी करनी थी लोगों को ताकि लक्षद्वीप ट्रिप की सनद रहे।

लैगून बीच पर ज़्यादा भीड़ नहीं थी । बहुत कम सैलानी थे वहाँ। ज्यादातर स्थानीय लोग ही थे। आसपास के घरों में रहने वाले। महिलाएं, बच्चियाँ आपस में बतिया रहे थे। बच्चे बीच किनारे बालू में खेल रहे थे।बुजुर्ग लोग भी इधर-उधर बैठे गप्प रट थे। लहरें समुद्र के उछल-कूद रहीं थीं।
खरीदारी के लिए वहाँ एक ही दुकान थी। सीप, मूँगे से बने हुए सामान, हैट, लक्षद्वीप लिखे हुए चाबी के गुच्छे, फ्रिज मैग्नेट जैसी चीजें। सीप, मूँगे वाले सामानों में हैंड बैंड, कान की बालियाँ और माला प्रमुख थे। दाम भी ज़्यादा नहीं था। सौ रुपए की बालियाँ, हैंड बैंड। डेढ़ सौ रुपए का हैट।
महिला साथियों ने छाँट-छाँट कर, देख-देख कर तमाम सामान ख़रीदे। तसल्ली होने पर ही। हमने पहले तो सोचा कि क्या करेंगे ख़रीदकर। सब बेकार। कोई जरूरी थोड़ी है कुछ लेना, ले जाना। लेकिन दुकान के पास जाने पर कुछ ईयर रिंग और माला ले लिए। इसके बाद हैट भी पसंद आया तो वो भी ले लिये। हैट खूबसूरत लग रहे थे। कीमत डेढ़ सौ होने के कारण और ख़ूबसूरत लगे। दो हैट लेने के बाद सोचा कि और ले लिए जाएँ। लेकिन तब तक ख़त्म हो गए थे। हमें अगले दिन भी रुकना था तो कुछ और हैट का आर्डर दे दिया।
सामान खरीदने के बाद पास की दुकान पर चाय पीने गए। काउंटर पर चाय देने वाली बच्ची से चाय पीते हुए बात की। उसकी पढ़ाई लिखाई के बारे में पूछा। उसने बताया कि वह नवोदय विद्यालय में पढ़ती है। हाई स्कूल में। छुट्टियों में घर आई है। पिता की चाय की दुकान है। इसलिए चाय की दुकान पर सहायता के लिए आ गई। नाम बताया उसने सादिया।
सादिया के पापा और उसका भाई भी दुकान में थे। मुझे लगा भाई छोटा होगा। लेकिन उसने बताया कि भाई बड़ा है। ग्याहरवीं में पढ़ता है।
नवोदय विद्यालय में बच्चे हॉस्टल में रहते हैं। कंप्टीशन से सेलेक्ट होते हैं बच्चे। हमारे कई दोस्त नवोदय स्कूल के पढ़े हैं। मतलब पढ़ने में अच्छी होगी सादिया। मुझसे बात करते हुए मोबाइल पर अपने दोस्तों से चैटिंग भी करती जा रही थी सादिया। पूछने पर बताया कि स्कूल के दोस्तों का ग्रुप है। उसी में मेसिजिंग हो रही है।
हमारे बारे में पूछने पर हमने अपना नाम बताया तो बोली -"हमारे स्कूल में कई टीचर शुक्ला हैं।" उसने यह भी कहा -" शुक्ला, मिश्रा वगैरह उधर के ही होते हैं।" अपने प्रिंसिपल के बारे में बताया " त्रिवेदी हैं।" मतलब ट्रांसफर पर गए होंगे। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के होंगे। लक्षद्वीप में ड्यूटी कर रहे हैं। जहाँ हम गए मजे के लिए वहाँ से वापस आने के वे छटपटा रहे होंगे।
सादिया अंग्रेजी में बात कर रही थी। टूटी-फूटी हिंदी भी जानती थी। लेकिन बात अंग्रेजी में ही हुई। हमको लगा जब हम हाईस्कूल में थे तब हमारी अंग्रेजी कितनी टूटी-फूटी , लड़खड़ाती हुई थी। जबकि यह बच्ची सहजता से बतिया रही थी।
हमने सादिया का फ़ोटो लिया। उसको दिखाया तो खुश हो गई। बोली -'मुझे भेज दो।' मैंने उसके व्हॉट्सएप पर भेज दिया। भाई और पिता के साथ भी ली फोटो। काफ़ी देर तक बातचीत हुई उससे। अपने स्कूल, दोस्तों, अध्यापकों के बारे में बताती रही। चाय और दूसरे सामान भी बेचती रही। इसके बाद हम लौट आए।
यह दिन हमारे लक्षद्वीप ट्रिप का आख़िरी दिन था। अगले दिन अधिकांश लोगों को जाना था। रात को डिनर के बाद फिर समुद्र बीच पर बैठे। सभी ने अपनी अपनी यादें साझा कीं। ज्यादातर महिला साथियों ने अपने बच्चों के जन्म से जुड़ी यादों को अपने जीवन की यादगार घटना बताया। पुरुष साथियों की यादगार घटनाओं में उनकी पढ़ाई और कैरियर से जुड़ी यादें थीं।
अगले दिन सुबह नाश्ते के बाद लोग विदा होना शुरू हुए। विदा होने के पहले सबके साथ ग्रुप फ़ोटोग्राफ़ हुआ। इसके बाद पहली खेप में विदा होने वालों की वीडियो ग्राफी भी हुई। किरन शुक्ला जी सबसे गले मिलकर रोने की एक्टिंग करते हुए विदा हुई तो लोगों ने गाना -"बाबुल की दुआयें लेती जा, जा तुझ को सुखी संसार मिले।" (वीडियो लिंक टिप्पणी में)
ट्रिप के साथियों को विदा करने के बाद हम लोग वापस अपने कमरे में पहुँचे। आराम किया। हमको अगले दिन निकलना था। शाम को एक बार हमको फिर लैगन बीच जाना था। घूमने के अलावा हमको गिफ्ट आइटम भी लेने थे।
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Friday, November 07, 2025

'सैंड बैंक' माने 'समुद्र की चाँद' पर मस्ती



 लक्षद्वीप में तिनकारा द्वीप के पास काफ़ी देर समुद्र में तैरने कुछ देर स्नार्कलिंग करने के बाद हम पास में ही स्थित 'सैंड बैंक' देखने गए।

'सैंड बैंक' नाम सुनकर लगता है बालू का बैंक होगा कोई। दूसरा मतलब बालू का किनारा भी होता है। समुद्र में low tide के समय लहरें किनारे से दूर हो जाती हैं। समुद्र के अंदर की बालू दिखने लगती है। हर तरफ़ से पानी से घिरी सफेद बालू बहुत खूबसूरत लगती है।
स्नार्कलिंग वाली जगह से कुछ ही दूर पर 'सैंड बैंक' था। उसके पास ही पहुँचकर स्टीमर का लंगर डाला गया। स्टीमर की सीढ़ी के सहारे पानी में होते हुए बालू तक पहुँचे।
समुद्र के पानी से घिरा 'सैंड बैंक' समुद्र की गंजी चाँद की तरह लग रहा था। सफेद, खूबसूरत गंजी चाँद के हर तरफ़ सफ़ेद, हरा और नीला समुद्र का पानी। आती-जाती लहरें 'सैंड बैंक' को पानी में भिगोकर वापस चली जाती थीं। बालू का कुछ हिस्सा पानी में डूब जाता। कुछ पर पानी नहीं जा पाता। लहरें उसको नहीं भिगो पाती। वे दुबारा कोशिश करतीं। जिस हिस्से को भिगोने में असफल रहतीं वो हिस्सा मानो मुस्कराता हुआ समुद्र की लहरों को टीली लिली करता रहता। खूबसूरत नजारा।
'सैंड बैंक' पर पहुँचकर हम लोगों ने देर तक वहाँ खड़े होकर, उसके पास के पानी में जाकर, फिर वापस आकर, भीगकर, ठहरकर फिर मजे दौड़कर पानी में घुसकर मजे लिए। फोटो खिंचवाये। ऐसा लग रहा था अपने घर के बाहर किसी मैदान में दोस्तों के साथ खेल रहे थे। बार-बार पानी में आवा-जाही करते हुए , ख़ूबसूरत नज़ारा देखते हुए, उन नज़ारों के फ़ोटो लेते, वीडियो बनाते हम लोग 'सैंड बैंक' का खूबसूरती से रूबरू होते रहे।
'सैंड बैंक' के पास पानी घुटनों तक था। लेकिन कुछ आगे जाकर पानी अचानक गहरा हो गया था। हमको अंदाज़ नहीं था इसका। लेकिन साथ में आए जसीम ने बताया कि पानी का रंग उसकी गहराई बताता है। नीला पानी मतलब गहरा समुद्र। समुद्र के पानी में चलते हुए इसे दिखाया भी। घुटनों तक पानी में चलते हुए वह पूरा पानी में डूब गया। ऐसे जैसे कोई बहुत गहरी पानी की खाई हो वहाँ। वहाँ पानी का रंग नीला था। वह जगह किनारे से बमुश्किल दस मीटर की दूरी पर होगी। उस दिन अंदाज़ हुआ कि पानी का भी अपना अलग व्याकरण होता है। हम उससे कितना अनजान हैं।
पता चला कि जनवरी में महीने में इसी जगह पर अपने प्रधानमंत्री जी ने कुर्सी डालकर फ़ोटो खिंचवाई थी। उनकी स्नार्कलिंग वाली ड्रेस में फोटो भी आई थी। पता नहीं उन्होंने स्नार्कलिंग की थी या फिर ड्रेस पहनकर फोटो खिंचवाई थी। ऐसा इसलिए लिखा क्योंकि समुद्र के नीचे में पानी में देर तक रहना सुरक्षा कारणों के लिहाज से प्रधानमंत्री के लिए ख़तरनाक है।
बाद में मैंने प्रधानमंत्री जी 'सैंड बैंक' पर अकेले कुर्सी डाले बैठे फ़ोटो भी देखी। हमको लगा कि महत्वपूर्ण पद पर होना इंसान को कितना अकेला कर देता है। जिस जगह पर हम लोग आम इंसान की तरह संग-साथ में मस्ती करते हुए, फोटो खिचाते , वीडियो बनाते , गाना गाते, डांस करते मजे कर रहे थे वहां प्रधानमंत्री जी अकेले, चुपचाप कुर्सी डाले, चेहरे पर गंभीरता ओढ़े बैठे हैं। यह भी लगा कि कुर्सी इंसान को कितना अकेला कर देती है।
'सैंड बीच' पर लोगों ने तरह-तरह के पोज में फोटो खिंचाए। गुप्ता दंपति के रोमांटिक पोज में फ़ोटो खींचे गए। पोज के लिए -'ऐसे देखें, ऐसे खड़े हों, ऐसे पास आयें' घराने के डायरेक्शन हम लोगों ने दिए।प्रधानमन्त्री जी की तरह कुर्सी तो हम लोग लाए नहीं थे लेकिन बालू में बैठकर, चश्मा लगाकर फोटो हमने लिए। अनन्य ने अपने सिग्नेचर स्टाइल में पानी में टहलते हुए वीडियो बनवाया। किरन शुक्ला जी ने जसीम के साथ बहुत प्यारा डांस किया। अनन्य ने पानी में मजे करते हुए लोगों का इंटरव्यू लिया। उसके कैसा लग रहा है पूछने पर सबने कहा -'बहुत अच्छा ।'
देर तक 'सैंड बैंक' में मस्ती करने के बाद हम लोग वापस लौटे। लौटते समय हमने लाइफ़ जैकेट नहीं पहनी। पानी में स्टीमर खेल के मैदान से लौटते बच्चों जैसा उछलता-कूदता चल रहा था। करीब घंटे भर के बाद हम लोग वेस्टर्न जेटी पहुंचे। वहां से कुछ लोग वापस होटल की तरफ़ चले गए। कुछ लोग लैगून बीच की तरफ़ गए। वहाँ उनको ख़रीदारी करनी थी।
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