चारबाग रेलवे स्टेशन पर चाय पीते हुए अगल-बगल के नजारे भी देखते रहे। लोग आ-जा रहे थे। स्टेशन से गाड़ियों के आने-जाने की सूचनाएँ प्रसारित हो रहीं थीं। कोने के जीने से स्टेशन से बाहर की तरफ़ आने वाले यात्रियों की भीड़ देखकर लगा कि किसी ने आदमियों से भरा बोरा सीढ़ियों पर उलट दिया हो।
फ़ुरसतिया
हम तो जबरिया लिखबे यार हमार कोई का करिहै
लेबल
Friday, June 26, 2026
संस्कारी युवा पीढ़ी
चारबाग रेलवे स्टेशन पर चाय पीते हुए अगल-बगल के नजारे भी देखते रहे। लोग आ-जा रहे थे। स्टेशन से गाड़ियों के आने-जाने की सूचनाएँ प्रसारित हो रहीं थीं। कोने के जीने से स्टेशन से बाहर की तरफ़ आने वाले यात्रियों की भीड़ देखकर लगा कि किसी ने आदमियों से भरा बोरा सीढ़ियों पर उलट दिया हो।
Thursday, June 25, 2026
मैराथन चाय बालक
कल चारबाग स्टेशन जाना हुआ। बेटे को लेने के लिए। दिल्ली से आने वाली लखनऊ मेल से। गाड़ी राइट टाइम थी। हम थोड़ा जल्दी पहुँच गए। चारबाग स्टेशन के सामने वाली दुकान पर चाय पी।
चाय की दुकान पर अकेला बच्चा था। वही चाय बना रहा था। बन मक्खन भी। बिस्कुट सामने कंटेशनर में रखे था। ज्यादातर लोग चाय पीने वाले थे। कुछ लोग बन मक्खन भी ले रहे थे। दुकान के सामने फुटपाथ पर कुछ लड़के-लड़कियां अपने सूटकेस पर बैठे थे। शायद कहीं बाहर से आए थे। शायद कोई इम्तहान देने आए होंगे। और किसी काम से भी आए हो सकते हैं। लेकिन स्टेशन पर कोई युवा सूटकेस, बैग लिए दिखता है तो यही लगता है कोई इम्तहान देने आया है या इंटरव्यू। यह भी क्या पता इसका इम्तहान भी निरस्त होने वाला है।
सामने ही एक रिक्शेवाला अपने रिक्शे पर सो रहा था। शायद रात में रिक्शा चलाया हो। उसकी सुबह अभी हुई नहीं थी।
चाय पीते हुय बच्चे से बात से बात की। उसने बताया कि वह लगातार 48 घंटे से जगा हुआ है। नींद आ रही। बहुत तेज आ रही है । लेकिन क्या करें? पहले भी कई बार इस तरह लगातार काम कर चुका है। उसका रिलीवर नहीं आया तो मजबूरी में काम पर लगा हुआ है। रिलीवर आयेगा तब छुट्टी होगी। आँखों में नींद की झलक थी। लेकिन बच्चा मुस्कराते हुए बात कर रहा था।
और बात करने पर पता चला बच्चा सीतापुर का रहने वाला है। पिताजी की बीमारी के चलते इंटर के बाद काम में लग गया।करीब डेढ़ साल हो गए काम करते। अब पिताजी ठीक हैं। लेकिन बच्चे का काम जारी है।
48 घंटे जागकर लगातार चाय बेचने की बात सुनकर ताज्जुब व्यक्त किया। उसने बताया कि एक बार लगातार तीन दिन काम किया। तीन दिन मतलब 72 घंटे। मैराथन चाय वाला। बालक ने बताया कि आमतौर पर उसकी ड्यूटी 24 घंटे की होती है। 24 काम फिर आराम। यही 24 घंटे कभी 48 और कभी 72 में बदल जाते हैं।
लगातार काम करने का कारण बालक ने बताया -'दुकान जीजा की है। दीदी के घर रहता है। अपनी दुकान है। इसलिए देरी हो जाने के कारण भी करता रहता है।
बालक ने कहा -'जाड़े में चाय बेचने में मजा आता है। उस समय ग्राहक खूब आते हैं। जब ग्राहक आते हैं तो काम करने में मजा आता है।'
एक चाय 15 की और बिस्कुट 5 रुपए का था। हमने बात करने के लालच में एक चाय और पी। चाय बनी भी बढ़िया थी।
सोचा 'माननीय चाय वाले' से कठिन मेहनत तो यह बालक कर रहा है। अनगिनत लोग कर रहे होंगे। लेकिन उनकी चर्चा नहीं होती। आम लोगों की चर्चा नहीं होती। चर्चा ख़ास लोगों की होती है। चर्चा के लिए इंसान खास होना जरूरी होता है। आम लोगों के हिस्से 'चर्चा रस श्रवण' हो आता है।
Friday, June 19, 2026
तैरना सीखने का अठाहरवाँ दिन
आज सुबह तैराकी के लिए निकले। पराग डेयरी चौराहे के पहले एक बच्चा तेजी से सड़क पार करता दिखा। भागता, लड़खड़ाता, झुककर सीधे खड़ा होता। शायद सड़क किनारे के बने किसी घर में रहता होगा। सूरदास जी कृष्ण जी के बालपन का वर्णन करते हुए लिखते हैं :
'किलकत कान्ह घुटुरुवनि आवत ।
मनिमय कनक नंद कै आँगन, बिंब पकरिबैं धावत ॥'
सड़क किनारे रहते घरों के बच्चों के लिए सड़क ही उनका आँगन होती हैं।वहीं वे घुटनों के बल चलना, दौड़ना, भागना सीखते हैं। सड़क रूपी आँगन में मणियाँ नहीं लगी। बिम्ब नहीं बनते यहाँ। बारिश के दिनों में अलबत्ता सड़क के गड्ढों में परछाइयाँ बनती होंगी। बच्चे उन परछाइयों को पकड़ने की कोशिश करते होंगे। लेकिन कोई सूरदास इस पर कोई पद नहीं रचता। हर बच्चे का बचपन कृष्ण के बचपन सरीखा नहीं होता।
बच्चे के गुजरने के इंतज़ार करते हुए कार रोकी। बच्चा डिवाइडर पारकर अपने घर में घुस गया। यहाँ तो सड़क है।हम अपने देश के बच्चे को बचाकर निकल रहे हैं। ईरान, फ़िलिस्तीन में सड़क और घर में खेलते बच्चों का क्या हुआ होगा। खेलते-खेलते कोई मिसाइल उन पर गिरती होगी। वे 'शांत' हो जाते होंगे। युद्ध चलता रहता है। बाद में कभी समझौता होगा। जिन लड़ाई लोलुप, सत्ता लालची बुड्ढों ने युद्ध का बिगुल बजाया होगा वही लोग शांति का मसीहा बनकर पेश होते है। लड़ाई थमती है लेकिन अनगिनत बच्चों, युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों की क़ूबानी लेकर।
आज शुक्रवार को ईरान-अमेरिका में शांति समझौता हुआ। देखना है कि यह सही में लागू हो पाता है क्या। ईरान-अमेरिका में शांति होते ही खबर आई कि यूक्रेन ने रूस की पाइप लाइन पर ड्रोन से हमला कर दिया। लगता है दुनिया हथियारों के सौदागर यह सुनिश्चित करते हैं कि दुनिया के किसी न किसी हिस्से में लड़ाई होती रहनी चाहिए। वे दुष्यंत कुमार के शेर को अच्छे से याद करके अमल में लाते हैं:
'मेरे सीने (देश ) में न सही, तेरे सीने (देश) में सही,
हो कहीं भी (युद्ध की) आग लेकिन आग जलनी चाहिए।'
कल डायना नायड की आत्मकथा 'Find a way ' के शुरुआती अंश पढ़े । डायना के पिता (सौतेले) ने बचपन से उनको जल्दी उठकर तैराकी का अभ्यास करने की आदत डाली। उनको ज़ेहन में बचपन से विश्वास दिलाया कि उनका नाम NYAD स्पेशल है। उनकी किसी और सहेली का नाम डिक्शनरी में नहीं होगा लेकिन नायड़ का नाम होगा। यह खास नाम है। डायना नायड ख़ास है।
डायना नायड अपने सौतेले पिता एरिस Aris को अपना असली पिता समझती रहीं। Aris का वर्णन करते हुए डायना नायड ने लिखा है -'वह जालसाज था। बहुभाषी था। 17 भाषाएँ जानता था। वाकपटु था। अपनी लच्छेदार बातों से लोगों को मुग्घ कर लेता था। डायना की सहेलियाँ उसने मिलने के बाद कहती थीं -'इतना शानदार व्यक्तित्व मैंने पहले कभी नहीं देखा।'
लेकिन एरिस Aris का दूसरा रूप भी था। वह असल में जालसाज था। क्रूर था। उसने डायना का 14 वर्ष की उम्र तक यौन शोषण किया। डायना घर में डरकर रहती थी। उनकी माँ जानने के बावजूद डायना को अपाए सौतेले पिता के यौन शोषण से बचा नहीं पायी। इसका उनके मन में अपराध बोध था। उनमें अपने बच्चों को बचाने के लिए, अपने पति के ख़िलाफ़ बोलने की हिम्मत नहीं थी। इसका कारण शायद यह भी था कि वे बचपन में माँ-बाप के प्यार से वंचित रहीं। अपने पति के प्यार को खोने से डरती थी वे। बाद में हालांकि उन्होने अपने पति से तलाक लिया। यह शायद बच्चों की सुरक्षा के लिए बहुत देर से उठाया कदम था।
डायना नायड की आत्मकथा इस मामले में अनूठी है। ख़ासकर इसलिए कि उन्होंने अपने जीवन के निर्माण में शामिल लोगों के बारे में लिखते हुए आख़िर में उनकी अच्छाइयों के लिए उनको याद किया है। सौतेले पिता द्वारा अपने यौन शोषण के बावजूद उन्होंने दो बातों के लिए अपने पिता को धन्यवाद दिया :
"'विजेता' (चैंपियन) के रूप में मेरी खुद की छवि बनाना ।
नींद को छोड़कर तैराकी के अभ्यास को तरजीह देना।"
डायना नायड अपने मैराथन तैराक बनने के पीछे अपने सौतेले पिता द्वारा सिखाई इन बातों को सबसे प्रमुख मानती हैं।
डायना नायड की आत्मकथा अभी पढ़ रहे हैं। बाद में डायना नायड के समलैंगिक होने के पीछे भी कारण उनके सौतेले पिता द्वारा उनका बचपन में किया यौन शोषण कारण रहा? शायद इस बारे में डायना नायड ने आगे लिखा हो आत्मकथा में।
डायना नायड की यह आत्मकथा अंग्रेजी में हैं। किसी शब्द का मतलब डिक्शनरी में खोजने में समय लगता है। कल इसका उपाय मैंने यह निकाला कि गूगल के एआई वर्जन में जाकर किताब के पेज का फ़ोटो उसमें अपलोड करके निर्देश देते हैं -'हिंदी में अनुवाद करो (ट्रांसलेट इन हिंदी) । पूरे पेज का हिंदी अनुवाद फौरन सामने आ जाता है। उसको हम फटाक से पढ़ लेते हैं। कभी-कभी अंग्रेजी भी पढ़ते हैं जो कि हिन्दी के साथ पढ़ने में बेहतर समझ आती है।
आज पूल में अभ्यास किया। सर पानी में झुकाकर रखें रहे। पाँव चलाते रहे। सर उठाकर तैरते हुए साँस लेने में कुछ प्रगति हुई । लेकिन पूरी सफलता नहीं मिली। अलबत्ता अब हाथ चलाना सीख लिया है। यह पता चल गया कि कैसे हाथ चलाने से सर ऊपर उठेगा, साँस लेने के लिए। सबसे बड़ी बात कि सीखने में हड़बड़ी वाली भावना अब नहीं है। तसल्ली से तैरने का आनंद ले रहे हैं । तैरना मजेदार है। तैरते हुय साँस लेना सीखना है। सीख ही जाएँगे।
आज हमारा तैरना सीखने का अठाहरवाँ दिन था।
Wednesday, June 17, 2026
तैराकी सीखने का सोहलवाँ दिन
आज सुबह तैराकी के लिए सही समय पर पहुँच गए। ठीक आठ बजे। पढ़कर जो आए थे उसपर अमल शुरू किया। सबसे पहला सबक यह कि तैरते समय सर पर नीचे रखना है। जैसे हाई कमान के सामने मंत्री, संतरी, सांसद, विधायक रखते हैं। केवल साँस लेते समय सर उठाना है। बाक़ी समय सर नीचे ही रखना है। स्वीमिंग पूल के फर्श की तरह निगाह। कॉलेज के जमाने में रैगिंग के दिनों में जूनियर्स को अपने शर्ट की तीसरी बटन देखने को कहा जाता था। तीसरी बटन देखने का रिवाज तो लड़कों में था। लड़कियों में क्या रिवाज था यह पता नहीं। यह जरूर याद है कि उन दिनों में लड़कियों/लड़कों का अनुपात 1:50 से भी नीचे ही था।
सर लगातार नीचा करके तैरने में लगा यह सही पोज है। पहले अक्सर सर बार-बार ऊपर करते थे। लड़खड़ा जाते थे। समर्पण मुद्रा में तैरने में तैरना सहज लगा। पहले बार-बार सर उठाकर ऊपर देखने में संतुलन गड़बड़ा जाता था। सर नीचे करके तैरने के साथ पांव लगातार चलाते रहना था। आज इसका अभ्यास किया। हमने तय किया कि रोज-रोज़ नई तरह से सीखने की बजाय मूल बात पर फ़ोकस करना जरूरी है। रोज़-रोज़ पोज बदलने में कोई फ़ायदा नहीं। पहले का अभ्यास छूट जाता है। तैराकी कोई राजनीति तो है नहीं जो दलबदल की तरह पोजबदल करके कुछ हासिल हो।
साथ सीखते बच्चे ने मुझे फिर से सिखाया। उसका एक दाँत टूटा हुआ है। उसने बताया स्कूल में खेलते समय टूट गया। दूध का दाँत है। इसकी जगह नया दांत आयेगा। क्या उसे चाय का दाँत कहाँ जाए। पूल किनारे बैठे पक्षी को देखते हुये उसने कहा -'वह ईगल हम लोगों की तरफ़ देख रहा है। कहीं काटेगा तो नहीं?'
बगल में तैरती बच्ची ने सुनकर कहा -'वह ईगल नहीं कौआ है। काटेगा नहीं।'
मेरे साथ तैरता बच्चा उसकी बात अनसुनी करते हुए पूल से निकलकर बाहर चला गया। इसके बाद पूल में डाइव करके फिर साथ में तैरने लगा।
पूल में सिखाने वाली बच्ची एक बुजुर्ग महिला का हाथ पकड़कर उसको तैरना सिखा रही थी। हाथ पकड़कर पानी में उनको घसीटते हुए पैर चलाने को कह रही थी। महिला कुछ देर अभ्यास करने के बाद रुककर आराम करने लगी। हमने कोच बालिका से शिकायत की -'तुमने हमको तैरना नहीं सिखाया। अभी तक हम ठीक से तैर नहीं पाते।'
बच्ची ने हमको शुरुआती दिनों में कई बार गाइड किया है। मेरी बात के जबाब में उसने कहा -'आप तो सीख गए हैं अंकल। प्रैक्टिस करते रहिए। परफेक्ट हो जायेंगे।'
साथ तैरते बच्चे के पिता बाहर से उसकी गतिविधि देख रहे थे। फोटो भी ले रहे थे। हमने उनसे अपना तैरने का वीडियो बनाने को कहा। उन्होंने कहा -'ठीक।'
वीडियो बनवाने के लिए हम पूल के अंदर थोड़ी दूर से (करीब छह -सात मीटर) तैरते हुए किनारे तक आए। वीडियो बना। मेरे मोबाइल पर भेज भी दिया उन्होंने।
वीडियो देखते हुए अपनी कई कमियाँ पता लगी। एक तो पाँव सीधे की जगह थोड़े मुड़े हुए थे। दूसरे पाँवों के आपस में तालमेल का अभाव था। दोनों पांव किसी प्रदेश के मुख्यमंत्री और आलाकमान द्वारा थोपे उप मुख्यमंत्री की तरह अलग-अलग बयान बाजी जैसी करते दिखे। हाथ के मूवमेंट देखकर भी लगा कि इनको बहुत फैलाने की जरूरत नहीं। औक़ात में रहने से ज़्यादा कुशलता से तैर सकेंगे। यह भी लगा कि अगर रोज़ वीडियो बनायें तो बेहतर समझ सकेंगे अपने मूवमेंट।
तैरते हुए, अभ्यास करते हुए आज एक दो बार सर ऊपर करके साँस भी ले ली। ऐसा लगा मानो पूल के पानी को झांसा देकर हवा गटक ली हो। जल्दी ही तैरते हुए नियमित साँस लेना सीख जाएँगे।
आज हमारा तैरना सीखने का सोहलवाँ दिन था।
हाथ ब्रेस्टस्ट्रोक और पांव फ्रीस्ट्रोक
शनिवार को शाम को गए स्वीमिंग के लिए। साथ में तैरते एक बच्चे ने कहा -'हम आपको सिखाते हैं स्वीमिंग।' हमने कहा -'सिखाओ।'
Tuesday, June 16, 2026
राजनीतिक पार्टी में निवेश
टीएमसी के बागी विधायकों/सांसदों के NCPI में विलय समाचार सुने। NCPI को पिछले चुनाव में कुल 822 वोट मिले थे। जबकि बागी सांसदों को कुल एक करोड़ वोट मिले थे। मतलब NCPI के वोटों से 12000 गुना। अपने से बारह हज़ार गुना छोटी पार्टी में विलयातुर सांसदों को देखकर कृष्ण बिहारी नूर का यह शेर याद आता है :
"मैं एक कतरा (बूँद) हूँ, मेरा अलग वजूद तो है,
हुआ करे जो समंदर मेरी तलाश में है।"
यह एक खुद्दार इंसान का बयान है। अपने स्वाभिमान को बचाकर रखने की ज़िद है। बूँद भले ही छोटी है लेकिन उसका अलग अस्तित्व है। सागर से मिलने पर उसका अस्तित्व मिट जाएगा। यहाँ तो सागर (बागी सांसद) बूँद (NCPI) में मिलने को छटपटा रहा है।
लेकिन खबर यह भी है कि वे सागर में नहीं महासागर (NDA) में मिलेंगे। यह मिलन द्वारा उचित माध्यम (NCPI) होगा। एकदम सरकारी अंदाज़ में। टीएमसी के सासंद NCPI के कंटेनर में जमा होंगे। NCPI का कंटेनर NDA के समन्दर में उलट दिया जाएगा। तर्पण होगा टीएमसी के बागी सांसदों का।
लेकिन जिस तरह का उचक्कापन और अवसरवादिता टीएमसी के बागी सांसदों ने दिखाई है उसके खिलाफ बागी लोगों को एतराज होगा। बगावत का मतलब किसी स्थापित सत्ता, नियम, या अधिकार (Authority) के खिलाफ खुले तौर पर विरोध या विद्रोह करना है। यहाँ तो स्थापित सत्ता से जुड़ने का काम हो रहा है। भगोड़ेपन को बागी कहना ठीक नहीं।
पानसिंह तोमर फ़िल्म का डायलग याद आता है -"बीहड़ में तो बागी होते हैं, डकैत मिलते हैं पार्लियामेंट में।" हो सकता है कोई भूतपूर्व बागी टीएमसी के भगोड़े लोगों द्वारा ख़ुद को बागी कहने के ख़िलाफ़ याचिका डाल दे।
टीएमसी के चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी के खिलाफ माहौल बनना सहज बात हो सकती है। लेकिन जिस बेशर्म तरीके से उनसे जुड़े सासंद उनसे अलग होकर एकदम ख़िलाफ़ पार्टी से जुड़ने का उपक्रम कर रहे हैं वह शर्मनाक है। सत्ता में रहते विरोध करके अलग हो जाते तो बहादुरी समझ में आती। इस तरह के धोखेबाजी समाज के लिए धोखेधड़ी की एक और मिशाल कायम करना हुआ। लोग बेशर्मी से किसी को धोखा देंगे और नजीर में कहेंगे -'इन लोगों ने भी तो किया था। जब वे कर सकते हैं तो हम क्यों न करें।' अलग तरह की पार्टी कहलाने के नारा लगाने वाली पार्टी के लोग अपनी हर चिरकुटई को बेशर्मी से सही ठहराते हुए कहती है -' हमारे पहले वाली पार्टी ने भी तो किया था ऐसा?'
अरे जब पहले वाली की तरह आप भी गड़बड़ कर रहे हैं तो आपमें और उनमें अंतर क्या है? अन्तर शायद इस बात का है कि वो थोड़ा शर्माते हुए करती थी, अब सब धांधली, गड़बड़ी खुल्लमखुल्ला हो रही है। गड़बड़ियों में खुलापन आ गया है। पारदर्शिता आई है।
अवसरवादिता , धोखाधड़ी आज की राजनीति का जरूरी तत्व हो गया है। जो धोखा देना नहीं जानता, मौके के हिसाब से पाला बदलना नहीं जानता वह शायद राजनीति के लिए मिसफ़िट है।
NCPI की स्थापना में एकाध लाख रुपए खर्च हुए थे। सांसदों और विधायकों द्वारा इस पार्टी को ज्वाइन करने के बाद इसकी क़ीमत अरबों में हो जायेगी। इससे अच्छा रिटर्न आन इन्वेस्टमेंट और कहाँ होगा आज के दिन। NCPI को अपना नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड में लिखवाने के लिए अप्लाई कर दे देना चाहिए। निवेश पर सबसे तेज लाभ का रिकार्ड।
क्या पता कल को आपस की बातचीत में शेयर के बिजनेस करने वाले राजनीतिक पार्टी बनाने में पैसा लगाने लगें। आपस की बातचीत में कहने लगें -' सोचते हैं कुछ शेयर बेचकर दो-चार राजनीतिक पार्टी बना लें। आजकल इन पर अच्छा रिटर्न मिल रहा है।'
क्या आप भी कोई राजनीतिक पार्टी बनाने की सोच रहे हैं।
Monday, June 15, 2026
कार का पंचर बनवाते हुए वीडियोग्राफी
शनिवार को स्वीमिंग पूल सुबह बारिश के कारण बंद हो गया था। शाम को गए। जाते समय कार के डैशबोर्ड में दायीं तरफ़ बल्ब जैसा जला। हमें लगा कोई वार्निंग है। हमने दायें-बायें देखा। समझ में नहीं आया। एक दिन पहले घर से सामने तिराहे पर जली कार का ध्यान आया। हमें लगा हमारे साथ भी कोई हादसा न हो जाये। हम शीशा खोलकर गाड़ी चलाते हुए गए स्वीमिंग पूल तक। कार का एसी ऑन, शीशा खुला। बेवक़ूफ़ी के सौन्दर्य का मुजाहिरा।
हमें कभी भी, किसी भी हाल में हार नहीं मानना चाहिए
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| स्वीमिंग पूल |
कल डायना नायड की ऑटोबायोग्राफी (Find a way) पर आधारित फ़िल्म Nyad (नेटफ़्लिक्स पर) देखी। दो घंटे की इस फ़िल्म में डायना नायड द्वारा पाँचवे प्रयास में क्यूबा से फ्लोरिडा की 103 मील (165.76 किलोमीटर) दूरी तैरकर पार करने का विवरण है। इनमें पहला प्रयास डायना नायड 28 साल की उम्र में किया था। असफल रहीं। मैराथन तैराकी के कई रिकार्ड बनाने के बाद उन्होंने तैराकी छोड़ दी।
60 साल की उम्र में, अपनी माँ की मृत्यु के बाद, उनको अपना बचपन का सपना फिर याद आया। उन्होंने फिर से तैराकी शुरू की। तीन बार फिर असफल रहीं। समुद्र में पायी जाने वाली भयंकर जहरीली जेली फिर के डंक से मरते-मरते बचीं। भयंकर समुद्री तूफ़ान में फँसकर मरते हुए बची। उनके साथियों ने मान लिया कि वे शायद इस उम्र में इस काम के लायक नहीं हैं। उनकी पक्की सहेली बोनी और मुख्य नेविगेटर जॉन बार्टलेट ने उनके पाँचवे प्रयास में जुड़ने से मना कर दिया था (फ़िल्म के अनुसार)। लेकिन डायना नायड की जिद थी कि वे फिर प्रयास करेंगी।
बोनी और जॉन बार्टलेट डायना की जिद के चलते उनसे फिर से जुड़े। डायना ने 103 मील की दूरी तैरकर पार की। क्यूबा से फ्लोरिडा की 103 मील की यह दूरी तय करने में डायना को 110 मील 177 किलोमीटर तैरना पड़ा। यह दूरी उन्होंने करीब 53 घंटे में तय की। मतलब तैरने की गति लगभग 3.34 किलोमीटर प्रतिघंटा रही।
फ्लोरिडा पहुँचने वहाँ जमा भीड़ को संबोधित करते हुए डायना नायड ने तीन बाते कहीं :
1. हमें कभी भी, किसी भी हाल में हार नहीं मानना चाहिए (Never Ever Give up)
2. अपने सपनों को पूरा करने के लिए आपकी उम्र कभी भी ज़्यादा नहीं होती (You are never too old to chase your dream)
3. यह देखने में भले ही एक व्यक्ति का खेल लगता है, लेकिन असल में यह एक टीम वर्क है (It looks like a solitary sport, but it's a team)
डायना नायड ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी कोच बोनी स्टोल और अपनी 35 लोगों की मेडिकल और नेविगेशन टीम को दिया, जिनके बिना यह मुमकिन नहीं था।
डायना नायड के मुख्य नेविगेटर जॉन बार्टलेट इस अभियान के दौरान बीमार थे। इसके बावजूद वे इससे जुड़े। अभियान की इस ऐतिहासिक सफलता (2 सितंबर 2013) के कुछ ही महीनों बाद, 10 दिसंबर 2013 को 66 वर्ष की आयु में जॉन बार्टलेट का सोते समय अचानक निधन हो गया था।
अपने सपने पूरा करने की ज़िद, मेहनत, लगन और समर्पण के साथ टीम वर्क के कारण डायना नायड ने अपना बचपन का सपना पूरा किया। उस समय उनकी उम्र 64 वर्ष थी। उनके पहले और बाद में भी अभी तक यह दूरी किसी ने तैरकर (बिना शार्क पिंजड़े के) किसी ने तय नहीं की है।
डायना नायड़ की कहानी बताती है -कोई काम नहीं है मुश्किल, जब किया इरादा पक्का।
आपका भी कोई सपना है जिसे आप पूरा करना चाहते हैं?
Saturday, June 13, 2026
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