स्विमिंग के लिए आज पौने आठ बजे पहुंचे। पूल के पानी में कोई नहीं था। कोच पूल किनारे बैठा मोबाइल समंदर में डूबा हुआ था। पानी हमारा इंतज़ार कर रहा था। हम आहिस्ते-आहिस्ते पानी में उतर गए।
देर तक पूल की साढ़े चार फीट गहराई वाली चौड़ाई में इधर-उधर होते रहे। कई बार गोलाई में चक्कर लगाते रहे। दो से ढाई चक्कर आराम से लगा लिए। मतलब क़रीब पच्चीस-तीस मीटर। पहले पाँच मीटर तैरने में हांफते हुए रुकते थे। अब आराम से दुबारा शुरू हो जाते हैं। शायद स्टैमिना सुधर रहा है।
दो-तीन बार छह फीट गहराई में गए। एकाध मिनट रेलिंग पकड़कर खड़े रहे। नीचे सतह में खड़े होकर देखा सर पूरा पानी में डूब जाता है। वापस लौट आए। एकबार बिना रुके , घूमकर भी लौटे। गहरे में तैर भले लें आराम से लेकिन उधर जाते हुए मन में लगता था -'गहरे में जा रहे। सावधानी से तैरना है।' लौटते हुए पानी में डुबकी लगाने के बाद सीधे होने तक भी सावधानी, जिसमें हलका सा डर का तड़का भी था, बनी रहती। पानी की इज्जत जरूरी है। थोड़ा सा डर भी।
एकबार यह भी देखा कि पानी में कितनी देर तक तैर सकते हैं। यह देखने के लिए एक ही जगह तैरते रहे। करीब पाँच मिनट हाथ-पाँव चलाते हुए पानी में तैरते रहे। इसके बाद भी थके नहीं थे। लेकिन पानी में खड़े हो गए।
तैरते हुए पांव अभी भी बहक जाते हैं। पाँव मेढक की तरह चलने की बजाय सरेंडरी मुद्रा में ऊपर उठ जाते हैं। यहाँ सरेंडर का जोड़ीदार शब्द भी जाना चाहता था लेकिन हमने उसको विनम्रता पूर्वक दूर कर दिया। नादान से दोस्ती जी का जंजाल।
करीब तीन महीने की तैराकी के बाद लगता है पानी से दोस्ती हो गई है। उसका और हमारा तालमेल ठीक सा हो गया लगता है। पानी का मिजाज समझ में आने लगा है। पानी बोलता नहीं है लेकिन इशारे से सब कुछ समझा देता है। आने वाले समय में इस दोस्ती को और पक्की करने का इरादा है।
स्विमिंग सीखना मेरे लिए एक अद्भुत अनुभव रहा है। तैरना सीखने के दौरान हमने करीब 36 पोस्ट्स लिखीं। कल उनको इकट्ठा किया। करीब 80 पेज हुए। मन किया अपने तैराकी सीखने के अनुभवों को किताब की शक्ल दी जाये। किताब का पहला ड्राफ्ट तैयार हो गया है। अब उसको फ़ाइनल करना है। नाम तय करना है।
आप का क्या सुझाव है इस बारे में? बनायें किताब? नाम क्या रखा जाये?
तैराकी का यह वीडियो का बेटे Anany Shukla ने बनाया।
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