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Sunday, November 25, 2012
देखिये जरा हाथ से लिखे हैं आज
http://web.archive.org/web/20140331070627/http://hindini.com/fursatiya/archives/3620
देखिये जरा हाथ से लिखे हैं आज
By फ़ुरसतिया on November 25, 2012
बहुत दिन बाद आज एक पन्ना हाथ से लिखे। देखिये जरा कईसा लगता है। अगर छोटा लगे तो Ctrl+ दबा के बड़ा करके बांचिये तो जरा।
ब्लॉगिंग की ये खुराफ़ात सभ्य भाषा में इंकब्लॉगिंग कहलाती है। इसमें हम अखबार भी निकाल चुके हैं। देखिये जरा आप भी। अखबार की प्रस्तावना तो देख ही लीजिये न हो तो
ये
नीचे वाला फोटू सुबह-सुबह दफ़्तर आते हुये खैंचा गया। धूप देखिये कैसी
आरामफ़र्मा है पेड़ों के बिस्तरे पर। जलवे हैं भाई धूपरानी के। उनको कोई
दफ़्तर तो जाना नहीं है। पेड़ों से उतरकर अभी जमीन पर पसर जायेंगी।
इस फोटो की धूप-छांह देखकर महेश सक्सेना जी की कविता याद आ गयी:
पुन: तपेगी वात
झरेंगे पीले-पीले पात
सहेंगे मौसम के आघात
बता दो पात-पात पर लिखे गये
अनुबन्धों का क्या होगा!
धूप-छांव में बुने गये
अनुबन्धों का क्या होगा!

ब्लॉगिंग की ये खुराफ़ात सभ्य भाषा में इंकब्लॉगिंग कहलाती है। इसमें हम अखबार भी निकाल चुके हैं। देखिये जरा आप भी। अखबार की प्रस्तावना तो देख ही लीजिये न हो तो
फ़ुरसतिया खाली भये छाप दिहिन अखबार,आप को इतवार मुबारक हो।
खुद तो बैठे मौज से दुखिया सब संसार।
दुखिया सब संसार कि हंसने से डरते लोग
हंसने केवल मात्र से, भाग जायें सब रोग।
हंसत-हंसत रहिये सदा, दुख को न डालो घास
घोड़े, खच्चर खा जायेंगे, फ़िर होगे और उदास।
छोड़ उदासी संगत को, मस्त रहो मेरे भइया,
पढो इसे ,पढ़कर बतलाओ, कैसाहै’फुरसतिया’।
ये
नीचे वाला फोटू सुबह-सुबह दफ़्तर आते हुये खैंचा गया। धूप देखिये कैसी
आरामफ़र्मा है पेड़ों के बिस्तरे पर। जलवे हैं भाई धूपरानी के। उनको कोई
दफ़्तर तो जाना नहीं है। पेड़ों से उतरकर अभी जमीन पर पसर जायेंगी। इस फोटो की धूप-छांह देखकर महेश सक्सेना जी की कविता याद आ गयी:
पुन: तपेगी वात
झरेंगे पीले-पीले पात
सहेंगे मौसम के आघात
बता दो पात-पात पर लिखे गये
अनुबन्धों का क्या होगा!
धूप-छांव में बुने गये
अनुबन्धों का क्या होगा!

Posted in इंक-ब्लागिंग, बस यूं ही | 44 Responses
44 responses to “देखिये जरा हाथ से लिखे हैं आज”
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अब हाथ से लिखा है तो कोई अखबार वाला छाप नहीं पायेगा | यह स्टाइल अच्छी है | राइटिंग आपकी अभी भी उतनी ही अच्छी है | यह सरकारी आदमी के पास लाइनदार रजिस्टर का पन्ना कहाँ से आ गया ,यह जिज्ञासा का विषय है |
amit srivastava की हालिया प्रविष्टी.." ब्लॉग पर पोस्ट पब्लिश करने का मुहूर्त ………" -
हाथ से लिखने में अलग आनंद आता है…
वैसे आप तो कार्टून, कविता, तस्वीर वगैरह चिपका के छोटा-मोटा अख़बार ही तैयार कर दिए
बढ़िया है… इतवार को दफ्तर के मजे लीजिये
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सही है … कुछ न कुछ नया सोच ही लेते हैं … फुर्सत मे
Padm Singh पद्म सिंह की हालिया प्रविष्टी..ज्योति पर्व की हार्दिक मंगल कामनाएँ -
हाथ से लिखे अरसा हो गया, अब मन कर रहा है कि लिखा जाए लेकिन उसे फिर कम्प्यूटर पर लिखना पड़ता है तो एक ही बार के चक्कर में सोच वहीं की वहीं अटक जाती है। वैसे ब्लाग के माध्यम से जो समाचार पत्र धनी हो रहे हैं, उनका धर्म ही धनी होना है और लेखक का गरीब होना। इसलिए इस हिसाब किताब में पड़ना नहीं। पड़ने के चक्कर में नाम छप जाता है उससे भी जाएंगे।
ajit gupta की हालिया प्रविष्टी..केरियर, बॉस और विदेश के कारण विस्मृत पिता और परिवार -
वैवाहिक जीवन मे प्रयोगधर्मिता के लिए “एंगलर” को बधाई !!! आन वाली पीढ़ियों को कुछ नया प्रयोग सीखने को मिलेगा !
Padm Singh पद्म सिंह की हालिया प्रविष्टी..ज्योति पर्व की हार्दिक मंगल कामनाएँ -
आईडिया बिल्कुल फ़ुरसतिया है जी, और आपकी लेखनी के जलवे भी देखने को मिले, आपकी हस्तकला बहुत अच्छी है, अब अगर कलम से कुछ अच्छे अक्षरों में लिखवाना होगा तो अब आपकी मदद ली जायेगी ।
विवेक रस्तोगी की हालिया प्रविष्टी..खोह, वीराने और सन्नाटे -
जब हाथ से लिखता था तो बड़ी हसरत थी कि काश टाइपराटर से लिखा जाता. आज, कंप्यूटरबाज़ी के चक्कर में आज आपने भला याद दिलाया कि हाथ से लिखना तो शायद भूल ही चले हैं आज हम.
अच्छा लगा
Kajal Kumar की हालिया प्रविष्टी..कार्टून :- ज़िंदा क़ौमें ताका करती हैं यहॉं -
वाक्य में 2 आज फ़ालतू आ गए हैं

Kajal Kumar की हालिया प्रविष्टी..कार्टून :- ज़िंदा क़ौमें ताका करती हैं यहॉं -
मस्त है सर जी।
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नकलियों को थोड़ी मेहनत अवश्य करनी पड़ेगी पर पोस्ट तो उतारने लायक है।
प्रवीण पाण्डेय की हालिया प्रविष्टी..शिक्षा – रिक्त आकाश -
वाह शुक्ल जी !! लेकिन यह इतवार को ऑफिस की ओर कहाँ …….
हम सरकारी लोग फाइल पर यदा कदा हिंदी दिवस आदि पर इंक से हिंदी लिख लेते हैं -
वाह!
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अरे गज़ब ….आपकी राइटिंग की तारीफ़ हम पहले भी किसी से सुन चुके हैं , और तो और आपका वर्षों पुराना एक पत्र बांच भी चुके हैं.
जबाब नहीं बहुत ही खूबसूरत लग रही है पोस्ट. -
शानदार, बहुते दिन बाद इंक ब्लॉगिंग किए है
बकिया इतवार तो है ही, हमहू भी वही मना रहे है पिछले ४ रोज़ से।
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पहली बार सुना कि ब्लॉग्गिंग से किसी को आमदनी भी हुई [ये अलग बात है कि चेक आप ने भुनाया नहीं]
आप का एक लेख मैं ने मार्च २०१२ में एक हिंदी समाचार पत्र में भी देखा था.शायद उसका तो आप को ज्ञान भी नहीं होगा …लेख कौन सा था अब मुझे याद नहीं.
इंक ब्लॉग्गिंग का आईडिया बहुत अच्छा लगा..आप को आपत्ति न हो तो यह मैं आईडिया कभी मैं भी प्रयोग में लाऊं .
२००७ में छपा आप का निशुल्क दो पृष्ठों का समाचार पत्र भी बांच लिया.
मेरे विचार में आप के ब्लॉग जितनी अधिक विविधता और नए प्रयोग लिए पोस्ट्स अन्यत्र दिखाई नहीं देतीं.
बधाई!
******हस्तलेख विशेषग्य अब तक आप की लिखाई व् दस्तखत का विश्लेषण कर चुके होंगे!
Alpana की हालिया प्रविष्टी..छोटी-छोटी बातें-
ब्लॉगिंग से आमदनी कई लोगों की हुई है। हो रही है। लेकिन हिन्दी में यह पत्रम्-पुष्पम टाइप ही है।

लेख तो अखबार वाले जब पसन्द आता है या जरूरत होती है उठा लेते हैं। कभी पूछकर कभी बिना पूछे। सब ब्लॉगरो के साथ भी ऐसा होता होगा।
इंकब्लॉगिंग का आइडिया प्रयोग करिये। मजेदार रहेगा।
तारीफ़ के लिये धन्यवाद!
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एक अच्छे इंक पेन की तलाश में हूँ ..उसके बाद प्रयोग करेंगे!
वैसे इंक ब्लोगिंग के थोडा प्रचलित होते ही ,अनुमान है उस के बाद कहीं हस्तलेख की समीक्षाओं की बाढ़ आ जाएगी जैसे आज कल पुस्तक समीक्षाओं की आती है!
Alpana की हालिया प्रविष्टी..बरसे मेघ…अहा!
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लिखावट में अभी बचपना झलकता है.. हिन्दी/देवनागरी में लिखा है इसलिए भी हो सकता है.. कमाल का आइडिया है सुकुल जी!! अब तो हमसे भी छूट गया है लिखना.. कविता वगैरह लिखने का हमारा अपना स्टाइल है.. कागज़ पर तिरछा लिखना मतलब डायागोनली. और हाँ लाइनवाले कागज़ पर लिखना पसंद नहीं.. सादे कागज़ पर!!
अनोखा अन्दाज़ आपका.. ग्रेट!!
सलिल वर्मा की हालिया प्रविष्टी..चोखेर बाली -
खर्रे बनाने की पुरानी कलाकारी अभी तक बाकी है आपमें | आशा है खर्रा समझ गये होगे
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.
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मस्त इंकब्लॉगिंग रही यह तो, वह भी दफ्तर जाने से पहले की…
… -
वाह! बढ़िया लिखे हैं. हैंड राइटिंग भी आपकी ठीकै ठाक है. दस में से सात लम्बर मिल जायेंगे
हम भी एक बार इंक ब्लॉगिंग करके देखेंगे.
aradhana की हालिया प्रविष्टी..Free Custom Design with a Premium Theme Purchase on Black Friday -
धन्यवाद फेसबुक का…………..बर्ना ये पोस्ट तो छूटी ही गया था………….
कट्टा कानपुरी वाली अनुबंध टूटी जा रही है……………….
प्रणाम. -
[...] पोस्टें हाथ से लिखी। हाशिये का लिखा पढ़ने में गर्दनें [...] -
राइटिंग तो बहुत धाँसू टाइप है आपकी
फुरसतिया टाइम्स फिर से निकला जाए
देवांशु निगम की हालिया प्रविष्टी..राम भरोसे की चाय भरोसे !!!! -
देख लिए!!
सच्ची बताओ , पहले रफ में लिख कर बाद में फेयर तो नहीं किया है| काहे से कि एक बार हमहूँ टिराई मारे तो ५ लाइन में ४ बार काटे| -
इससे याद आया पहले हमारी हैण्ड राइटिंग अच्छी थी. अब घसीट देते हैं.. बस पठनीय रह पाता है. कभी वो भी नहीं. बस इतना है कि अपना लिखा पढ़ लेते हैं

Abhishek की हालिया प्रविष्टी..वो लोग ही कुछ और होते हैं – III -
अरे, ब्लागिंग से आमदनी -जितनी भी सही, हुई तो !वैसे तो आश्चर्य ही हुआ कि ऐसा भी होता है .
बहुत दिनों बाद हाथ से लिखा देखा ,इतना साफ़-सुथरा – स्थानीय रंग भी जम रहा है.. -
[...] देखिये जरा हाथ से लिखे हैं आज [...] -
The places over the internet can a certified psyciatrist put up stories (or blog sites) to help them to grow to be fashionable?
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इन्कब्लोगिंग का अपना अलग अदाज है पर इसके प्रचलित न होने के पीछे कई कारण हैं..
सर्च इंजन आपके पोस्ट के कंटेंट को इंडेक्स नहीं कर पाते… आप आगे कभी रिफरेन्स के लिए खुद अपनी पोस्ट से ही कॉपी-पेस्ट नहीं कर सकते.. मोबाइल और छोटी स्क्रीन के डिवाइसेज पर तस्वीर में लिखे टेक्स्ट को पढना एक सरदर्द है… और अंत में सबकी हैंडराइटिंग आपके जैसी सुन्दर नहीं है..
लेकिन इमेज के साथ टाइप किया हुआ टेक्स्ट भी नीचे दे दिया जाये तो सिनेमा और नाटक दोनों का आनंद मिल सकता है…
सतीश चन्द्र सत्यार्थी की हालिया प्रविष्टी..हाथी और जंजीरें
प्रणाम.
Kajal Kumar की हालिया प्रविष्टी..कार्टून :- कैसे ये सिर जिनपे लाल टोपी रूसी
प्रवीण पाण्डेय की हालिया प्रविष्टी..शिक्षा – रिक्त आकाश
amit srivastava की हालिया प्रविष्टी.." ब्लॉग पर पोस्ट पब्लिश करने का मुहूर्त ………"
लेकिन दायें -बाएँ लिखा पढने के लिए गर्दन घुमानी पड़ी जो कष्टदायक है .
Alpana की हालिया प्रविष्टी..हाइकु
Abhishek की हालिया प्रविष्टी..वो लोग ही कुछ और होते हैं – III
बहुत दिनों बाद हाथ से लिखा देखा -इतना साफ़-सुथरा – खूब अच्छा लगा ..