Thursday, August 28, 2014

पुलिया पर रोआबदार लोग

आज पुलिया पर ये भाई लोग मिले। दायीं तरफ़ वाले भाई बाईं तरफ़ वाले को बता रहे थे कि कैसे उन्होंने लेबर को ऐसे हडकाया। यहां लगाया, वहां लगाया। साहब से कह दिया ऐसे नहीं चलेगा। वैसे चलेगा। बातचीत से पता चला कि किसी अधिकारी के यहां काम करते हैं। चेहरे का रोआब देखकर और कुछ पूछने की हिम्मत न पड़ी। देरी भी हो रही थी काम पर जाने की। चुपचाप खरामा खरामा चलते हुये दफ़तर दाखिल हो गये। कमरे में जमा होकर काम करने लगे।
फ़ोटो: आज पुलिया पर ये भाई लोग मिले। दायीं तरफ़ वाले भाई बाईं तरफ़ वाले को बता रहे थे कि कैसे उन्होंने लेबर को ऐसे हडकाया। यहां लगाया, वहां लगाया। साहब से कह दिया ऐसे नहीं चलेगा। वैसे चलेगा। बातचीत से पता चला कि किसी अधिकारी के यहां काम करते हैं। चेहरे का रोआब देखकर और कुछ  पूछने की हिम्मत न पड़ी। देरी भी हो रही थी काम पर जाने की। चुपचाप खरामा खरामा चलते हुये दफ़तर दाखिल हो गये। कमरे में जमा होकर काम करने लगे।

Wednesday, August 27, 2014

पुलिया पर पलक

इस बच्ची का नाम पलक है। केन्द्रीय विद्यालय में पढती है। कक्षा 5 में। रांझी में रहती है। स्कूल से वापस लौटते समय छाता सहेजती और कैरियर पर अच्छे से बैठती दिखी कल पुलिया के पास।
फ़ोटो: इस बच्ची का नाम पलक है। केन्द्रीय विद्यालय में पढती है। कक्षा 5 में। रांझी में रहती है। स्कूल से वापस लौटते समय छाता सहेजती और कैरियर पर अच्छे से बैठती दिखी कल पुलिया के पास। 

Tuesday, August 26, 2014

पुलिया पर अतुल

आज ’सर्वहारा पुलिया’ पर अतुल से मुलाकात हुई दोपहर को। बीएससी पास अतुल रेलवे का कप्म्टीशन देने जबलपुर आये हैं। गांव में पढाई-वडाई होती नहीं थी सो नंबर सेकेंड क्लास के ही आये। शहर में नौकरी के लिये तैयारी के साथ कम्प्यूटर का भी काम सीख रहे हैं।

अतुल सिहोरा के रहने वाले हैं। पिता खेती करते हैं। तीन बहनों में अकेले, सबसे छोटे हैं। स्वाभाविक है दुलरुवा भी। जीजा जीसीएफ़ फ़ैक्ट्री में काम करते हैं। वेल्डरी का काम दोस्त आ रहा था कंचनपुर से तो उसका इंतजार कर रहे थे पुलिया पर बैठकर।

अंगौछे से हवा डुलाते बैठे थे अतुल। हमने फ़ोटो खैंचा तो बोले अच्छा नहीं आया होगा। पसीना आ रहा था इसलिये। लेकिन जब हमने फ़ोटो दिखाया तो देखकर खुश हो गये। दुबारा देखा।

अतुल का फ़ेसबुक खाता है लेकिन बहुत दिन से बंद है।

फ़ोटो: आज  ’सर्वहारा पुलिया’ पर अतुल से मुलाकात हुई दोपहर को। बीएससी पास अतुल रेलवे का कप्म्टीशन देने जबलपुर आये हैं।  गांव में पढाई-वडाई होती नहीं थी सो नंबर सेकेंड क्लास के ही आये। शहर में नौकरी के लिये तैयारी  के साथ कम्प्यूटर का भी काम सीख रहे हैं। 

अतुल सिहोरा के रहने वाले हैं। पिता खेती करते हैं। तीन बहनों में अकेले, सबसे छोटे हैं। स्वाभाविक है दुलरुवा भी। जीजा जीसीएफ़ फ़ैक्ट्री में काम करते हैं। वेल्डरी का काम दोस्त आ रहा था कंचनपुर  से तो उसका इंतजार कर रहे थे पुलिया पर बैठकर।

अंगौछे से हवा डुलाते बैठे थे अतुल। हमने फ़ोटो खैंचा तो बोले अच्छा नहीं आया होगा। पसीना आ रहा था इसलिये। लेकिन जब हमने फ़ोटो दिखाया तो देखकर खुश हो गये। दुबारा देखा।

अतुल का फ़ेसबुक खाता है लेकिन बहुत दिन से बंद है।