1. नालायक समझे जाने वाले पति की, गरीब मां-बाप वाली पत्नी तिरस्कार ही तो पाती है।
लेबल
Sunday, August 23, 2020
परसाई के पंच -17
Friday, August 21, 2020
परसाई के पंच-15
1. मेरा अन्दाज है, इस समय देश में राजनीति के क्षेत्र में लगभग पांच हजार चमचे काम कर रहे हैं। ये प्रधान चमचे हैं। फ़िर इनके स्थानीय स्तर के उपचमचे और अतिरिक्त चमचे होते हैं। ये सब हीनता , मुफ़्तखोरी, लाभ और कुछ वफ़ादारी की ओर से अपने नेता से बंधे होते हैं। इनमें गजब की अनुशासन-भावना होती है। अगर किसी उपचमचे को जनपद को जनपद की सीट का टिकट चाहिये तो वह सीधा नेता के पास नहीं जायेगा। वह प्रधान चमचे से कहेगा और प्रधान चमचा नेता से बात करके उसका काम करायेगा।
लोग खुद तक सिमटकर रह गए हैं
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बहुत दिन बाद सड़क पर निकले। जंगल में ठहरे लोग रात में जंगली जानवरों के डर से रेस्ट हाउस से बहुत दूर नहीं जाते। हम भी कोरोना के डर से बाहर निकलते झिझकते हैं। निकलते भी हैं तो मास्क पहन कर जैसे कि जंगल में शिकारी निकलते समय बंदूक ले लेते होंगे।
Wednesday, August 19, 2020
परसाई के पंच-13
1. वैष्णव बेखटके गबन कर सकता है, चोरी कर सकता है, काला पैसा जमा कर सकता है।
परसाई के पंच-14
https://www.facebook.com/anup.shukla.14/posts/10220557289535684
Tuesday, August 18, 2020
परसाई के पंच-12
https://www.facebook.com/anup.shukla.14/posts/10220550416123853
Monday, August 17, 2020
परसाई के पंच- 11
1.हारा हुआ राजा रनिवास में जाता था, हारा हुआ नेता आध्यात्म में जाता है।
Thursday, August 13, 2020
आयुध वस्त्र निर्माणी ने बनाई विशेष वर्दी
भारत सरकार के आत्म निर्भर अभियान के अंतर्गत आयुध वस्त्र निर्माणी, शाहजहाँपुर ने 11 अगस्त को बहुत ऊंचाई पर प्रयोग में आने वाली वर्दी आयुध निर्माणी बोर्ड के महानिदेशक एवं चेयरमैन श्री हरिमोहन जी Hari Mohan द्वारा 'लांच' की गयी।
परसाई के पंच- 10
1. अगर अकालग्रस्त आदमी सडक पर पडा अखबार उठाकर उतने पन्ने खा ले, तो महीने भर भूख नहीं लगे। पर देश का आदमी मूर्ख है। अन्न खाना चाहता है। भुखमरी के समाचार नहीं खाना चाहता।
Wednesday, August 12, 2020
परसाई के पंच- 9
1. साहित्य का काम अच्छी दुकान या अच्छी नौकरी लगने तक ही होता है।
Tuesday, August 11, 2020
परसाई के पंच-8
1. जो लोग समय तय करके भी घर नहीं मिलते, वे मुझे भगवान के एजेण्ट मालूम होते हैं।वे हमें अभ्यास कराते हैं कि कैसे बिना ऊबे, अवमानना की अवहेलना करके अनिश्चित काल के लिये किसी दरवाजे पर इन्तजार किया जाता है।

