Sunday, August 23, 2020

परसाई के पंच -17

 1. नालायक समझे जाने वाले पति की, गरीब मां-बाप वाली पत्नी तिरस्कार ही तो पाती है।

2. हमारे इस विशाल भारत देश में नेता वही होता है जो जोर से बोले या खिलाये-पिलाये।
3. क्योंकि इस जमाने में आदमी की वास्तविक शक्ल से चित्र अच्छे उतरने लगे हैं। इसीलिये प्रेमी प्रेमिका को प्रथम मिलन में ही ’फ़ोटू’ देने की जल्दी करता है।
4. पुरुष पर स्त्री की विजय के अनेक कारणों में सबसे बड़ा कारण यह है कि स्त्री, पुरुष के सम्बन्ध में अपने मनोभावों को प्रकट करने का लोभ कुछ देर के लिये संवरण कर सकती है, पर पुरुष अपनी चाह को व्यक्त करने की उतावली करता है।
5. जैसे हर ’गबदू’ ग्रेजुएट वाइस चांसलर बनने की इच्छा मन में पाले रहता है, उसी प्रकार मोटर का हर मुसाफ़िर ’फ़्रण्ट सीट’ पर बैठने की अभिलाषा रखता है।
6. ये ऐसे लोग होते हैं जो हर कठिनाई को बचाकर किसी प्रकार घिसटते हुये जिन्दगी की राह पर चलते हैं। ये ऐसे मुर्दे होते हैं कि जहां हैं वहीं रहना परम भाग्य समझते हैं। ये सन्तोषी नहीं होते; कायर होते हैं, बुजदिल होते हैं। अपने अधिकारों में से बहुत से ये दूसरों के लिये छोड़ रखते हैं। ये ऐसे लोग होते हैं जो झंझट पसन्द नहीं करते।
7. जहां जीवन की परिभाषा मृत्यु को टालते जाना मात्र हो, वहां जीवन को नापता हुआ वर्ष पास-पास कदम रखता है।
8. आदमी अपने पैसे का बदला वसूल करना चाहता है, चाहे वह प्रतिदान आंसू ही क्यों न हो।
9. रेलवे में घूस लेना इस कदर कानूनी हो गया है कि अगर कोई घूस न दे तो उस पर रेल बाबू दीवानी का मुकदमा दायर करने की भी एक बार सोचता है।
10. भूख का एक स्वर होता है, चाहे वह कुत्ते की भूख हो, चाहे आदमी की भूख हो। भूख का स्वर पहचानने में आप गलती नहीं कर सकते।
11. हममें में से अधिकांश के लिये सहानुभूति भी एक कला बन गयी है। भाषा के वैभव ने हमें क्षमता दी है कि हम चुनिन्दा शब्द उच्चरित करें। नाट्य कला ने सुविधा दी है कि दर्द का भाव चेहरे पर बिछा लें। इससे ज्यादा हम करते भी क्या हैं? सोचकर सन्तोष कर लेते हैं कि ज्यादा कर भी क्या सकते हैं?

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Friday, August 21, 2020

परसाई के पंच-15

 1. मेरा अन्दाज है, इस समय देश में राजनीति के क्षेत्र में लगभग पांच हजार चमचे काम कर रहे हैं। ये प्रधान चमचे हैं। फ़िर इनके स्थानीय स्तर के उपचमचे और अतिरिक्त चमचे होते हैं। ये सब हीनता , मुफ़्तखोरी, लाभ और कुछ वफ़ादारी की ओर से अपने नेता से बंधे होते हैं। इनमें गजब की अनुशासन-भावना होती है। अगर किसी उपचमचे को जनपद को जनपद की सीट का टिकट चाहिये तो वह सीधा नेता के पास नहीं जायेगा। वह प्रधान चमचे से कहेगा और प्रधान चमचा नेता से बात करके उसका काम करायेगा।

2. नेता का दुनिया से सम्पर्क सिर्फ़ चमचे के मारफ़त होता है और कुछ दिनों में उसका यह विश्वास हो जाता है कि इस विशाल दुनिया में मेरे चमचों के सिवा और कोई नहीं रहता। अपनी दुनिया को इस तरह छोटा करके जीने क सुख नेता कुछ साल भोगता है और फ़िर उसी नाव पर सुख का बोझ इतना हो जाता है कि नाव नेता को लेकर डूब जाती है। चमचे तैरकर किनारे लग जाते हैं और दूसरे नेता के चमचे हो जाते हैं।
3. नेता मरता रहता है, चमचे अमर होते हैं।
4. कुछ चमचे जीवन-भर सिर्फ़ चमचा बने रहने का व्रत पालते हैं और पचीसों नेताओं को डुबाने का पुण्य प्राप्त करते हैं।
5. चमचा बनना आसान नहीं है। एक अच्छे चमचे का निर्माण कई सालों में होता है।
6. आन्दोलन में जब ऐसा लगता कि इस बार सरकार सख्ती कम करेगी, जेल कम दिनों की होगी और वहां आराम भी रहेगा, तब हर नेता अपने ज्यादा से ज्यादा चमचों को जेल भेजने की कोशिश करता था। तब जेल जाने के लिये वैसी ही होड़ होती थी जैसी अब चुनाव टिकट के लिये होती है।
7. चाहे साम्राज्यवाद हो , चाहे प्रजातन्त्र- दोनों चमचों की बुनियाद पर खड़े रहते हैं।
8. चमचा बड़ी तरकीब से यह बात फ़ैलाता है कि नेता का वह विश्वासपात्र है, उनका आत्मीय है और वे उसकी बात कभी नहीं टालते।
9. आम चमचों से नेता के घर के लोग और नौकर नफ़रत करते हैं। वह चमचा हजारों में एक होता है जिसे नेता भी चाहे, उनका परिवार भी और नौकर भी।
10. किराये पर देने के लिये जब मकान बनवाया जाता है तो खास ख्याल रखा जाता है कि किरायेदार को भूल से भी कोई सुविधा न मिल जाये।
11. कभी-कभी नीरसता से ऊबकर , ये घरघुसी स्त्रियां आपस में शौकिया लड़ पड़ती हैं। कलह से सस्ता मनोरंजन और क्या होगा?

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लोग खुद तक सिमटकर रह गए हैं

 


बहुत दिन बाद सड़क पर निकले। जंगल में ठहरे लोग रात में जंगली जानवरों के डर से रेस्ट हाउस से बहुत दूर नहीं जाते। हम भी कोरोना के डर से बाहर निकलते झिझकते हैं। निकलते भी हैं तो मास्क पहन कर जैसे कि जंगल में शिकारी निकलते समय बंदूक ले लेते होंगे।

कोरोना ने बड़े-बड़ों की सिट्टी और पिट्टी जोड़े से गुम कर रखी है। जैसे आखिरी दिनों में मुगल बादशाह दिल्ली तक सीमित रह गए थे वैसे हो कोरोना काल में 'तमाम' लोग खुद तक सिमट कर रह गए हैं।
लेकिन इन लोगों के अलावा और भी तमाम-तमाम लोग हैं जो कोरोना से डरे बिना मस्त , निर्द्वन्द घूम रहे हैं। मास्क नहीं, दूरी नहीं। कोरोना की ऐसी कम तैसी वाली मुद्रा में लोगों को घूमते देख कोरोना भी डर जाता होगा।
सड़क के दोनों तरफ लोग फुटपाथ पर जमे हैं। यहाँ बनी बेंचों पर बैठने से रोकने के लिए कांटे रखवा दिए गए हैं। कांटो का ताज की तर्ज पर कांटो की बेंच। लेकिन उससे क्या ? बगल में फुटपाथ तो है। लोग साफ-सुथरे फुटपाथ पर बैठे हुए कसरत कर रहे हैं।
एक भाई जी 'ओम' का जाप कर रहे हैं। जोर से। सुनते ही कोरोना घबरा गया होगा -'ये तो शंकर भक्त है। प्रलय के देवता का आदमी। प्रलय होगी तो दुनिया ही नहीं रहेगी। कोरोना भी खल्लास। ' कोरोना 'ओम' की आवाज से 'सुरक्षित दूरी' बनाते हुए निकल लिया होगा।
दूसरे भाई जी कपाल भाती कर रहे हैं। हवा अंदर जा रही है बाहर आ रही है। नापी नहीं लेकिन जितनी हवा अंदर जा रही उतनी बाहर आ नहीं रही होगी। फेफड़े जरूर अपना कमीशन काटकर कम हवा ही भेज रहे होंगे बाहर। बिना कमीशन कोई काम नहीं करता आजकल।
हवा की बात से याद आया कि आजकल अस्पतालों में कोई जाए तो कहा जाता है -'कोरोना टेस्ट करा कर आओ।' कोई मरता हुआ इंसान जाए तो भी पहले कोरोना टेस्ट करा कर पहुंचे अस्पताल। आफत है। इस चक्कर में वे लोग भी मर रहे हैं जो सामान्य उपचार से बच सकते हैं।
हवा जो अंदर जा रही है वह फौरन बाहर आ रही है। कहीं फेफड़े धकियाकर बाहर तो नहीं कर रहे हवा को -'जाओ पहले कोरोना टेस्ट कराकर आओ तब अंदर आओ।' लेकिन ऐसा होगा नहीं। फेफड़े कोई अस्पताल के डॉक्टर थोड़ी हैं जो ऐसा करें।
एक भाई जी फुटपाथ पर कसरत कर रहे हैं। फुटपाथ को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। फुटपाथ दब नहीं रहा। वो ऊपर उठ रहे हैं। खुद ऊपर उठने के लिए भी किसी को नीचे दबाना होता है। क्रिया -प्रतिक्रिया का शाश्वत नियम है।
सूरज भाई बिना मास्क आसमान में टहल रहे हैं। हमने टोंक दिया तो हंसते हुए बोले -' यहां कौन मास्क की जरूरत। अरबों साल की सोशल डिस्टेंसिंग है हमारी तुम्हारी।'
हंसने लगे यह कहकर सूरज भाई। उनकी हंसी से दिशाएं खिलखिला दीं। सुबह हो गयी।

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Wednesday, August 19, 2020

परसाई के पंच-13

 1. वैष्णव बेखटके गबन कर सकता है, चोरी कर सकता है, काला पैसा जमा कर सकता है।

2. किसी प्रकार की आग लग जाय तो शासन को उसकी जांच की कोशिश नहीं करनी चाहिये। विश्वास कर लेना चाहिये कि आग दैवी इच्छा से लगी है। दैवी इच्छा में मनुष्य को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिये।
3. इस कालेज में पैंतीस साल से लघु शंका गृह नहीं बना। अब एकदम लघुशंकागृह बनवा देना बहुत क्रांतिकारी कदम हो जायेगा। क्या हम इतना बड़ा क्रांतिकारी कदम उठाने के लिये तैयार हैं?
4. समाज में कोई भी अच्छी स्त्री किसी शरीफ़ आदमी को प्यार नहीं करती।
5. राकेश की एक आदत है। वह उन स्थानों के आसपास घूमता रहता है, जहां गुण्डे स्त्रियों को तंग करते हैं। ज्योंही किसी सुन्दरी को कोई गुण्डा छेड़ता है, राकेश उससे भिड़ जाता है और उसे पीटकर स्त्री को उसके घर पहुंचा देता है।
6. भारत में साधु बहुत हैं। इससे समाज को बहुत लाभ हैं। इनका काम है आत्महत्या करने वाली स्त्रियों को बचाना और बिछुड़े हुये प्रेमियों को मिलवाना। भारत-साधु-समाज की व्यवस्था के अनुसार सुन्दरियों के आत्महत्या करने के स्थानों के पास एक-एक साधु छिपकर बैठा रहता है। वह चौबीसों घण्टे देखता रहता है कि कौन आत्महत्या करने जा रही है। बारह घंटे में उनकी ड्युटी बदलती है।
7. स्वामी जी हंसे। बोले.” बच्चा तुम संसारी लोग होटल में साठ साल के बूढे ’बैरे’ को ’छोकरा’ कहते हो न! उसी तरह हम तुम संसारियों को ’बच्चा’ कहते हैं। यह विश्व एक विशाल भोजनालय है जिसमें हम खाने वाले हैं और तुम परोसने वाले हो। इसीलिये हम तुमको ’बच्चा’ कहते हैं।
8. जब चुनाव आता है तो , तब हमारे नेताओं को गोमाता सपने में दर्शन देती हैं। कहती हैं- बेटों, चुनाव आ रहा है। अब मेरी रक्षा का आन्दोलन करो। देश की जनता अभी मूर्ख है। मेरी रक्षा का आन्दोलन करके वोट ले लो।
9. इस देश के मनुष्य को सूखा मार रहा है, अकाल मार रहा है, मंहगाई मार रही है। मनुष्य को मुनाफ़ाखोर मार रहा है, कालाबाजारी मार रही है। भ्रष्ट शासन-तन्त्र मार रहा है। सरकार भी पुलिस की गोली से चाहें जहां मनुष्य को मार रही है।
10. गोरक्षा के जुलूस में जब झगड़ा होता है, तब मनुष्य मारे जाते हैं।
11. मनुष्य-रक्षा के लिये मुनाफ़ाखोर और कालाबाजारिये से बुराई लेनी पड़ेगी। यह हमसे नहीं होगा। यही लोग तो गोरक्षा आन्दोलन के लिये धन देते हैं। हमारा मुंह धर्म ने बन्द कर दिया है।

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परसाई के पंच-14

 

1. हमारे यहां जिसकी पूजा की जाती है उसकी दुर्दशा कर डालते हैं। यही सच्ची पूजा है। नारी को भी हमने पूज्य माना और उसकी जैसी दुर्दशा की, सो तुम जानते हो।
2. दूसरे देशों गाय दूध के उपयोग के लिये होती है; हमारे यहां यह दंगा करने और आन्दोलन के लिये होती है।
3. अगर गोरक्षा का कानून बन जाये तो यह देश अपने आप समृद्ध हो जायेगा। फ़िर बादल समय पर पानी बरसायेंगे, भूमि खूब अन्न देगी और कारखाने बिना चले भी उत्पादन करेंगे।
4. भगवान रखना भी एक झंझट है। वह हर बात पर दंड देने लगता है।
5. जनता जब आर्थिक न्याय की मांग करती है, तब उसे किसी दूसरी चीज में उलझा देना चाहिये, नहीं तो वह खतरनाक हो जाती है।
6. अगर इस जनता को गोरक्षा आन्दोलन में न लगायेंगे तो यह बैंको के राष्ट्रीयकरण का आन्दोलन करेगी, तन्ख्वाह बढ़वाने का आन्दोलन करेगी, मुनाफ़ाखोरी के खिलाफ़ आन्दोलन करेगी। उसे बीच में उलझाये रखना धर्म है बच्चा।
7. चन्दा-चन्दा सब एक। मुझे तो लगता है कि बड़ा अनाथालय है। अनाथालय के लड़के बैण्ड बजाकर चन्दा मांगते हैं और ये देशसेवा वाले नारे लगाकर। वे अनाथों की परवरिश के लिये मांगते हैं और ये देश की परवरिश के लिये।अच्छा , फ़िर दूसरों को तो रुपया-दो रुपया देकर टाला जा सकता है पर ये देश-रक्षा वाले तो बहुत मुंह फ़ाड़ते हैं। कहते हैं- दो हजार दीजिये, तीन हजार दीजिये।
8. देश की रक्षा करना है तो यह तो मैंने माना। पर जरा किफ़ायत से करो न ! देश रक्षा क्या किफ़ायत में नहीं हो सकती?
9. हर बड़े आदमी का -कम से कम एक (चमचा) होता है। जिनकी हैसियत अच्छी है, वे एक से ज्यादा चमचे रखते हैं।
10. सारे फ़रिश्ते भगवान के चमचे हैं। शैतान ने भगवान का चमचा बनने से इन्कार किया , तो उसे स्वर्ग से निकाल दिया गया -जैसे गैर-चमचे को चुनाव-टिकट नहीं दिया जाता।
11. सबसे ज्यादा चमचे राजनीतिक क्षेत्र के नेताओं के होते हैं। इतिहास साक्षी है कि दुनिया में जितनी उथल-पुथल हुई है, वह महापुरुषों के कारण नहीं बल्कि उनके चमचों के कारण हुई है। जब भी चमचे ने अपनी अक्ल से कुछ किया है, तभी उपद्र्व हुये हैं। इसलिये हरबड़ा आदमी विश्वहित में इस बात की सावधानी बरतता है कि उसका चमचा कभी भी अपनी अक्ल का उपयोग न करे।

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Tuesday, August 18, 2020

परसाई के पंच-12

 

1. इस कौम की आधी ताकत लड़कियों की शादी करने में जा रही है। पाव ताकत छिपाने में जा रही है - शराब पीकर छिपाने में, प्रेम करके छिपाने में, घूस लेकर छिपाने में ..... बची पाव ताकत से देश का निर्माण हो रहा है-तो जितना हो रहा है, बहुत हो रहा है। आखिर एक चौथाई ताकत से कितना होगा।
2. बारात की यात्रा से मैं बहुत घबराता हूँ, खासकर लौटते वक्त जब बाराती बेकार का बोझ हो जाता। अगर जी भरकर दहेज न मिले , तो वर का बाप बारातियों को दुश्मन समझता है।
3. बस सचमुच चल पड़ी और हमें लगा कि यह गाँधीजी के असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलनों के वक्त अवश्य जवान रही होगी। उसे ट्रेनिंग मिल चुकी थी। हर हिस्सा दूसरे से असहयोग कर रहा था। पूरी बस सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौर से गुजर रही थी।
4. काली शेरवानी और बड़े बाल मुझे कई रूप दे देते हैं। नेता भी दिखता हूँ , शायर भी और अगर बाल सूखे बिखरे हों तो जुम्मन शहनाई वाले का भी धोखा हो जाता है।
5. झूठ अगर जम जाए तो सत्य से ज्यादा अभय देता है।
6. कुत्ते भी रोटी के लिए झगड़ते हैं, पर एक के मुंह में रोटी पहुंच जाए तो झगड़ा खत्म हो जाता है। आदमी में ऐसा नहीं होता। प्रेम से चाय पिलाई जाती है, तो नफरत के कारण भी। घृणा भी आदमी को उदार बना देती है।
7.नियम के पाबंद ऐसे होते हैं कि अगर उनका नियम है कि भोजन के बाद सौ गज चलेंगे, तो जहां दो सौ गज खत्म होते हैं, वहां पहले से खाट बुलवा लेंगे।
8. बहुत लोगों की लाशें ज्यादा उपयोगी होती हैं। कई लोगों को देखकर लगता है, ये अगर जल्दी लाश हो जाएं तो दुनिया का कितना भला कर जाएं।
9. सबटेनेंट होते ही आदमी बदल जाता है। छः फुटा अपने को बौना समझने लगता है। एक खूबसूरत आदमी सबटेनेंट हो गया तो उसने मुहल्ले की स्त्रियों की तरफ देखना बन्द कर दिया। वह अपने को बदसूरत समझने लगा था। एक जालिम पुलिस अफसर कुछ महीनों के लिए सबटेनेंट हो गए थे, तो वे मुलजिम की तरह बर्ताव करने लगे।
10. विश्वविद्यालय के कुलपति अगर सबटेनेंट हो जाएं तो वे अपने को ऐसा छात्र समझने लगेंगे, जो परीक्षा में दबा-दबा नकल कर रहा है।
11. पुलिस कॉन्सटेबल को इंस्पेक्टर साहब कहने से वह छोड़ देता है।

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Monday, August 17, 2020

परसाई के पंच- 11

 1.हारा हुआ राजा रनिवास में जाता था, हारा हुआ नेता आध्यात्म में जाता है।

2. हर कुत्ता जन्म से ही आत्मज्ञानी होता है। वह जानता है कि मैं कुत्ता हूं और मेरा काम भौंकना है। कई लोग अपने कुत्ते को ’टाइगर’ कहते हैं, पर कुत्ता अपने को कभी शेर नहीं समझता। वह अपने सच्चे स्वरूप को पहचानता है।
3. हर इमारत या पुल में से चन्द्रा साहब का एक मकान पैदा हो जाता था। छोटी इमारत होती तो , तो किसी मकान का गुसलखाना ही उसमें से निकल आता था।
4. जिस जाति के हृदय से विश्वास उठ जाये, उसका पतन अवश्य होता है।
5. वास्तव में मकान मालिक का दरजा ईश्वर के पास ही है। ईश्वर ने सृष्टि रची, पृथ्वी बनायी, आकाश बनाया लेकिन मकान नहीं बनाये। मनुष्य पृथ्वी पर खुले आकाश के नीचे तो रह नहीं सकता था। तब मकान मालिकों ने मनुष्यों के रहने के लिये मकान बनाये। जो किराये के लिये मकान बनवाते हैं , वे ईश्वर के समान ही पूज्य हैं।
6. जो मां अपने बेटे को जितना प्यार करती है, बहू को उतना ही दुख देती है।
7.चाहे कोई दार्शनिक बने, सन्त बने या साधु बने, अगर वह लोगों को अंधेरे का डर दिखाता है तो जरूर अपनी कम्पनी का टार्च बेचना चाहता है।
8. रीडर (पढने वाला) उस अध्यापक को कहते थे, जिसे कक्षा में पढाना नहीं आता और वह पाठ्य-पुस्तक या कुंजी कक्षा में पढकर काम चला लेता था।
9.एम. ए. एक ऐसी परीक्षा थी जिसे पढने के बाद तीन वर्ष बेकारी का कोर्स करना पड़ता था।
10. विद्या पढने से नहीं वरन गुरुकृपा से प्राप्त होती है।
11. महाभारत युद्द न होता अगर भीष्म की शादी हो गयी होती। और अगर कृष्न मेनन की शादी हो गयी होती तो , तो चीन हमला न करता।

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Thursday, August 13, 2020

आयुध वस्त्र निर्माणी ने बनाई विशेष वर्दी

 



भारत सरकार के आत्म निर्भर अभियान के अंतर्गत आयुध वस्त्र निर्माणी, शाहजहाँपुर ने 11 अगस्त को बहुत ऊंचाई पर प्रयोग में आने वाली वर्दी आयुध निर्माणी बोर्ड के महानिदेशक एवं चेयरमैन श्री हरिमोहन जी Hari Mohan द्वारा 'लांच' की गयी।

आयुध निर्माणी बोर्ड, कोलकता द्वारा संचालित इस कार्यक्रम में महानिदेशक एवं चेयरमैन के साथ आयुध निर्माणी बोर्ड , कोलकता के सदस्य श्री सी.एस. विश्वकर्मा, सदस्य श्री ए.के.जैन, सदस्य वित्त , उपमहानिदेशक श्री गगन चतुर्वेदी तथा श्री प्रकाश अग्रवाल उपस्थित थे। कार्यक्रम का शानदार संचालन श्री गगन चतुर्वेदी ने किया।
1914 में स्थापित आयुध वस्त्र निर्माणी, शाहजहाँपुर में हर तरह की वर्दी, कम्बल, जर्सी, मोजे आदि का उत्पादन होता है। इसके अलावा टेंट आदि भी यहां बनाये जा चुके हैं। ऊंचाई पर प्रयोग में आने वाली वर्दियों का उत्पादन यहां की विशेषता है।
भारत सरकार की आत्मनिर्भर योजना विदेशों से आयात किये जाने वाले सामान को अपने देश में बनाने की योजना है। इस क्रम में आयुध वस्त्र निर्माणी, शाहजहाँपुर में ECWCS मतलब एक्ट्रीम कोल्ड वेदर क्लाडिंग सिस्टम बनाकर लांच किया गया।
ECWCS सिस्टम 18000 फुट से अधिक ऊंचाई पर काम आने वाली वर्दी है जहां तापमान शून्य से 50 डिग्री नीचे रहता है और हवाओं की रफ्तार 40 किमी/घण्टा तक रहती है।
यह सिस्टम तीन भागों में है। अंदर वाला सिस्टम शरीर के पसीने को बाहर भेजता है। बीच वाला सिस्टम शरीर की गर्मी को अंदर रखता है। सबसे ऊपर वाला सिस्टम हवा, बर्फबारी और तेज हवाओं से मुकाबला करता है।
अभी तक यह वर्दी सिस्टम विदेश से आयात होता है। देश में बनने के बाद लगभग 100 करोड़ विदेशी मुद्रा की बचत होगी। हमारे उत्पाद की कीमत विदेशी कीमत से कम होगी।
हमारी वर्दी का ट्रायल आईटीबीपी द्वारा किया जा चुका है। हर मायने में यह वर्दी के मानकों और आराम के लिहाज से उपयुक्त पाई गई। सेना से इसका ट्रायल होने के बाद इसका उत्पादन शुरू होगा।
ठंड में आराम के लिए वर्दी का वजन कम होना चाहिए और वर्दी की क्लो वैल्यू अधिक होनीं चाहिए। क्लो वैल्यू मतलब सर्दी में आराम महसूस करने का पैमाना। बिना कपड़े के इंसान की क्लो वैल्यू शून्य होती है। जाड़े के कपड़े , शूट आदि की क्लो वैल्यू लगभग 1.0 होती है। एस्किमो जो कपड़े पहनते हैं उनकी क्लो वैल्यू 4.0 होती है। ECWCS जो आयुध वस्त्र निर्माणी, शाहजहांपुर में बना है इसकी क्लो वैल्यू 5.5 है। मतलब बहुत ऊंचाई पर 'सर्दी में भी गर्मी का एहसास' होगा इसे पहनकर। इसका वजन है केवल 4.5 किलोग्राम।
इस ड्रेस सिस्टम में सारा सामान देशी है। इसको बनाने में आईआईटी दिल्ली से शुरुआती सहयोग मिला।
उत्पाद की लांचिंग वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा महानिदेशक और चेयरमैन द्वारा की गई। इस मौके पर अन्य निर्माणियों के उत्पादों की भी लांचिंग हुई और कुछ ग्राहकों को सौंपे भी गए।
कोरोना काल में जब सब कुछ ठप्प सा है, स्थगित है तब आयुध निर्माणियां काम कर रही हैं, नित नए प्रतिमान रच रही हैं आने ध्येय वाक्य -'विनाशय च दुष्कृताम' के साथ।

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परसाई के पंच- 10

 1. अगर अकालग्रस्त आदमी सडक पर पडा अखबार उठाकर उतने पन्ने खा ले, तो महीने भर भूख नहीं लगे। पर देश का आदमी मूर्ख है। अन्न खाना चाहता है। भुखमरी के समाचार नहीं खाना चाहता।

2. अकाल हमारी महान भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख तत्व है। द्रोणाचार्य जैसे वीर तक भूखे मरते थे।
3. जीने की इच्छा गोंद होती है जो शरीर जोड़े रहती है। मरने की इच्छा में पोषक तत्व होते हैं।
4. मैं सपनों से परेशान हूं। वे कितने सुखी हैं , जिन्हें सपने नहीं आते। मुझे लगने लगा है कि वही सुख की गहरी नींद सोता है, जिसे सपने नहीं आते।
5. सुअर और कुत्ता ऐसे प्राणी हैं जिन्हें सपने नहीं आते। पर अब अन्न का दाना न मिलने से चूहे को भी सपने आते हैं।
6. इन परोपकारी आदमियों से भगवान बचाये ! जो करेंगे, उसका दस गुना किस्सा दसों बार सुनायेंगे।
7. परोपकारी आदमी भी क्या मुसीबत है ! आप उपकार न करना चाहें, तो भी वह आपका भला करने पर हमेशा उतारू रहेगा।
8. भगवान को भारत से हर वर्ष एक निश्चित मात्रा में पूजा मिलती है। तीन चौथाई पूजा-स्तुति उन सरकारी नौकरों की तरफ़ से मिलती है, जो सस्पेण्ड हो जाते हैं, जिनकी तरक्की रोक ली जाती है या जिन पर घूस आदि के मामले चलते हैं।
9. भगवान की सत्ता नौकरों के ’कण्डक्ट रूल्स’ और ’इन्डियन पेनल कोड’ पर टिकी हुई है।
10. यदि भारत सरकार अपने कर्मचारियों के खिलाफ़ कार्रवाई न करे तो मध्यम वर्ग से भगवान का नाम उठ ही जाये।
11. असन्तुष्ट कर्मचारी सरकारी दल के लिये खतरनाक होते हैं।
12. जिसके हाथ में फ़िल्मी पत्रिका है, वह बगल में बैठे भगवान से भी बात नहीं करेगा।
13. धरमचन्द बहुत ईमानदार था क्योंकि ग्राहक से बात करते हुये वह ’ईमान से’ कहता जाता था। वह सच्चा आदमी था क्योंकि वह कपड़े की दर और उधारी का हिसाब ’भगवान की कसम’ खाकर बताता था।
14. ये साहब लोग ही आज की द्रौपदी हैं, मंहगाई के दु:शासन ने जिनके कपड़े छीन लिये हैं।
15. निठल्लों को दूसरे की विजय पर जय बोलने और फ़ूल बरसाने के अतिरिक्त और काम ही क्या है?
16. धर्म, धन के हिसाब से टीमटाम धारण कर लेता है।
17. तरुण-तरुणी के मिलने के उचित कारण बेवकूफ़ ही खोजते हैं।
18. मैं रात-दिन हर सफ़ल लेखक के प्रति ईर्ष्या से जलता रहता हूं। ईर्ष्या से बढकर कोई तप नहीं है।
19. राज्य का आधार धन है। राजा को प्रजा से धन वसूल करने की विद्या आनी चाहिये। प्रजा से प्रसन्नापूर्वक धन खींच लेना, राजा का आवश्यक गुण है।
20. शोध का प्रयोजन ही ही यह है कि जिसमें जो चीज न हो , उसे खोजा जाये।
21. प्रजातन्त्र इस वक्त ऐसा पक गया है कि एक आदमी के मर जाने या भूखा रह जाने की धमकी से 50 करोड़ आदमियों के भाग्य का फ़ैसला हो रहा है।

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Wednesday, August 12, 2020

परसाई के पंच- 9

 1. साहित्य का काम अच्छी दुकान या अच्छी नौकरी लगने तक ही होता है।

2. बाराती से ज्यादा बर्बर जानवर कोई नहीं होता। ऐसे जानवरों से हमेशा दूर रहना चाहिये।
3. लौटती बारात बहुत खतरनाक होती है। उसकी दाढ में लड़की वाले का खून लग जाता है और वह रास्ते में जिस-तिस पर झपटती है।
4. इस देश में लड़की के दिल में जाना हो, तो मां-बाप के दिल की राह से जाना होता है।
5. बुजुर्ग का खास ’प्रिवलेज’ (विशेष हक) है कि किसी भी औरत को घूर सकता है और कोई बुरा नहीं मानता।
6. इस देश के युवकों को प्रेम पर मरना भी तो नहीं आता। प्रेम में मरेंगे , तो घिनापन से। मरते किसी और कारण से हैं, मगर सोचते हैं कि प्रेम पर मर रहे हैं।
7. जनता की पुकार कभी-कभी , मेमने की पुकार जैसी होती है। वह पुकारता है मां को और आ जाता है भेडिया।
8. सरकार का काम राज करना है, रोजी-रोटी की समस्या हल करना नहीं है।
9. यहां वही सो सकते हैं, जिन्हें यहां से तन्ख्वाह मिलती है। ऐसा नियम है। यह नियम पूरे देश में लागू है कि जिसे जहां से तन्ख्वाह मिलती है, वह वहां सो सकता है।
10. जिस राजनेता के आसपास सुन्दरियों का गुच्छा होता है, उसे मिलने वालों का टोंटा नहीं पड़ता।
11. किसी राज-कर्मचारी को भाई मत कहना। वह मनुष्य होने में अपनी अप्रतिष्ठा समझता है। उसे ’देवता’ कहना चाहिये।
12. वोट देने वाले से लेकर साहित्य - मर्मज्ञ तक जाति का पता पहले लगाते हैं।
13. कुछ मैंने ऐसे भी देखे हैं , जो गुलदस्ता इस तरह लेते हैं जैसे कुंजड़े की टोकरी से गोभी चुरा रहे हों। एक नेता गुलदस्ता ऐसे पकड़ते हैं, जैसे लट्ठ पकड़े हों।
14. जिस समाज के लोग शर्म की बात पर हंसे और ताली पीटें, उसमें क्या कभी कोई क्रांतिकारी हो सकता है?
15. साधारण आदमी नौकरी, बीबी और बच्चों के जीवन में सार्थकता ढूंढ लेते हैं।
16. अमेरिकी समाज वह समाज है जो बर्बरता से एकदम पतन पर पहुंच गया है- वह सभ्यता के स्टेज से गुजरा ही नहीं।
17. योगी का अभिनय करना आसान है, ईश्वर का अभिनय करना भी आसान है। मगर पागल का अभिनय करना बड़ा मुश्किल है।
18. मैं जानता हूं कि आध्यात्म भी धन्धा है। अमोह भी धन्धा है। निर्लोभ भी धन्धा है। अपरिग्रह भी धन्धा है। अहिंसा तक धन्धा हो गया है।
19. अमेरिका हो आने से ईश्वर खुद ही पास सरक आता है, और ईश्वर पास सरक आये तो धन्धा ही धन्धा है।
20. मुझे ऐसे लोग भले लगते हैं जो छोटी-छोटी चीजों से प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। मैं इन चीजों पर हंसता हूं, तो दुख भी होता है कि वह कोई अच्छी बात नहीं कर रहा हूं।
21. गणतन्त्र-परेड कुछ घंटे होती है, अकाल-परेड महीने में हर रोज होती रहती है। राशन-दुकान पर खाली झोला लिये खड़ी फ़ौज में उन फ़ौजियों से ज्यादा जोश होता है।

Tuesday, August 11, 2020

परसाई के पंच-8

 1. जो लोग समय तय करके भी घर नहीं मिलते, वे मुझे भगवान के एजेण्ट मालूम होते हैं।वे हमें अभ्यास कराते हैं कि कैसे बिना ऊबे, अवमानना की अवहेलना करके अनिश्चित काल के लिये किसी दरवाजे पर इन्तजार किया जाता है।

2. इन्तजार से प्रेम बढता है। हर क्षण वही मन में रहता है और आंखें फ़ाटक पर बिछी रहती हैं। प्रेम का नाम इसी बात से तो होता है कि कौन आपका इतनी देर इन्तजार करता है।
3. समय की पाबन्दी के लिये जितनी सावधानी चाहिये, उससे कम समय पर न मिलने के लिये नहीं चाहिये। मैं घर ऐसे समय वक्त जाता हूं, जब उनके मिलने की बिल्कुल सम्भावना नहीं है- और वे मिल जाते हैं। उनके जहां होने की उम्मीद है वहां न होकरे वे वहां होंगे, जहां उनके होने की उम्मीद नहीं है।
4. सत्य की टीमटाम हो लोग पूछने लगते हैं कि इसका खर्च कौन सा-सा असत्य दे रहा है?
5. सत्य पास ही मिलता है तो मैं उसे ग्रहण कर लेता हूं। दूर नहीं जाता सत्य के लिये। उसमें रिक्शा किराया लग जाता है।
6. जिसे छह-छह महीने वेतन न मिले, वह वैसे ही आध्यात्मिक हो जाता है। कहते हैं जनक ’विदेह’ थे। याने देह की सुधबुध नहीं रहती थी। यह तपस्या का परिणाम नहीं था। जिसके घर चार लड़कियां बिन ब्याही बैठी हों, वह विदेह हो ही जायेगा।
7. सच्चा ईमानदार वह होता है, जो सबको बेईमान मानकर चले।
8. जिस प्रकार शादी के मौसम में अधिक रेशमी कपड़ा बिकता है। समय आने पर हम सज्जनों को उसी तरह पहचान लेते हैं, जिस तरह कि खाता बही जब्ती होने पर बिक्रीकर इन्स्पेक्टर के रिश्तेदारों को पहचान लेते हैं।
9. हमारी शिक्षा-दीक्षा ’लालफ़ीतावाद’ में हुई है जिसका प्रथम सिद्धांत ही देर करना है।
10. नियम के कारण ही एक कुलटा कहलाती है और दूसरी प्रवित्रता। कुलटा का कुल मिलाकार पुरुष-सम्पर्क पतिव्रता से कम होता है, तो भी।
11. अर्जुन ज्ञानी हो गया और लड़ने लगा। यानी ज्ञानी वह जो हमेशा लड़ने को तैयार रहे।
12. कुछ करो, तो आधे अच्छे काम होते हैं और आधे बुरे। कुछ नहीं करने से कोई बुरा काम नहीं होता। बुरा करने से यही अच्छा है कि बैठे-बैठे अच्छा सोचा करो।
13. जिसकी टेबल पर फ़ाइलों का जितना बड़ा ढेर होगा, वह उतना ही दीर्घायु होगा और उतना ही बड़ा देशसेवक होगा।
14. केन्द्रीय सरकार को सहज हिदायत देनी चाहिये कि जो अपना काम पूरा कर देगा, उसे नौकरी से निकाल दिया जायेगा। वह मरकर अपनी सेवा से वंचित करना चाहता।
15. लोग अपने काम में दखल नहीं देने देते, जब तक आप उनका भला न करने लगे।
16. अब मुझे समझ में आया कि लोग स्वार्थी क्यों हो जाते हैं। वे दूसरों का भला करना चाहते हैं, पर कोई उनसे भला कराने को तैयार नहीं होता। निराश होकर वे अपना भला करने लगते हैं। लोग उनकी निन्दा करते हैं, पर वे दया के पात्र हैं। वे मजबूरी में स्वार्थी हो जाते हैं।
17. अगर चाहते हो कि कोई तुम्हें हमेशा याद रखे, तो उसके दिल में प्यार पैदा करने का झंझट न उठाओ। उसका कोई स्कैन्डल मुट्ठी में रखो।
18. देखो, साहब जब खुद तबादला करता है, तब वह दण्ड देता है। और जब किसी की प्रार्थना पर करता है, तब वह कृपा होती है। कृपा करने का कोई नियम शासन में नहीं है, पर सजा देने की छूट है।
19. ये बड़े-बड़े अफ़सर बेचारे बहुत कमजोर होते हैं। ये तबादले से ज्यादा कुछ कर ही नहीं सकते। अगर ये कहें कि मैं तुम्हें मार डालूंगा, तो समझो कि तबादला करेंगे।
20. गाली वही दे सकता है, जो रोटी खाता है। पैसा खानेवाला सबसे डरता है। जो सरकारी कर्मचारी जितना नम्र होता है, वह उतने ही पैसे खाता है।
21. भ्रष्टाचारी अगर जल्दी मर जाये, तो परिवार को बड़ी सुविधा होती है।