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अरविन्द कुमार जी मेडिकल फिजिक्स के प्रोफेसर , जाने-माने व्यंग्यकार और कथाकार तो पहले से ही हैं। इस बीच वे शानदार और सफल वार्ताकार के रूप में भी स्थापित हुए हैं। आज 21.09.2020 को अरविन्द कुमार जी ने बातचीत के लिए अपन को मौजूद रहने के लिए कहा है। तो हम तैयार हैं। आप भी आइये ऑनलाइन शाम को 8 बजे । क्लिक कीजिए नीचे दिया लिंक और सुनिए बातचीत अरविंद कुमार और अनूप शुक्ल की। बातचीत का लिंक यह रहा
https://www.facebook.com/anup.shukla.14/posts/10220775282745378
1. जिसकी बात के एक से अधिक अर्थ निकलें वह सन्त नहीं होता, लुच्चा आदमी होता है। सन्त की बात सीधी और स्पष्ट होती है और उसका एक ही अर्थ निकलता है।
1. अतिशासन से शासनहीनता के दौर में आ जाना भी क्रान्ति है।
1. ज्ञानी कायर होता है। अविद्या साहस की जननी है।
1. इस देश के ज्ञानी या अज्ञानी सबकी यह विडम्बना है कि वह क्रोध से फ़ौरन किस्मत पर आ जाता है।
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. इधर कुछ डाकुओं , गुण्डों की फ़िल्म बनने लगी है, जिसमें लड़की डाकू से प्रेम करने लगती है। बस मैं देखता हूं कि अनेक किशोर बिल्कुल उन डाकुओं जैसा अभिनय करते हैं, मारपीट करते हैं, क्योंकि डाकू से लड़की प्यार करने लगती है।
1. भारत-भूमि कुछ ऐसी उपजाऊ है कि बाहर से आयी हुई चीज यहां खूब फ़लती-फ़ूलती है। विदेश से आयी हुई प्लेग हमारे गांव-गांव में पहुंच गई और प्लेग की तरह आयी अंगरेज जाति भी खूब फ़ली-फ़ूली।
1. कथावाचक को हम कुलपति बना देते हैं, जुआड़ी को मन्त्री बना देते हैं, अयोग्य को ऊंचा पद और सुयोग्य को नीची जगह, शोषक को शोषितों का नेता, सिंह को भेड़ों की ट्रेड यूनियन का अध्यक्ष, चोर को मजिस्ट्रेट, घूस लेने वाले को घूस पकड़ने वाला – सब यूं ही बना देते हैं।
1. हमारे देश में छोटा आदमी हमेशा ’सैम्पल’ के काम आता है, और कटता है बड़ों की भलाई के लिये।