Saturday, April 12, 2025

ज़ेवर वाले पत्थरों की खान और शो रूम



 मसाला बगीचा देखने के बाद हम लोग प्राकृतिक रत्न की खान देखने गए (Natural Moonstone Gems Mine )। मीटियागोडा (Meetiyagoda) में स्थित यह खान होटल लाया बीच से 80 किलोमीटर और कोलम्बो से 105 किलोमीटर दूर थी।

खान के नाम पर बचपन में सुनी खानों के नाम याद आते हैं। कोलार सोने की खान है। चासनाला खान में दुर्घटना हुई थी। 1975 में हुई चासनाला खान दुर्घटना में खान में पानी भर जाने से 375 लोग मारे गए थे। खानों के काम करने वाले कितनी ख़तरनाक स्थितियों में काम करते हैं यह सोचकर ही घबराहट होती है। यह सोचते हैं कि जो लोग इन खानों में रोज काम करते होंगे उनकी मन:स्थिति कैसी होती होगी?
जिस जगह को खान बताया गया वहाँ दो चौकोर मुँह वाले कुँए बने थे। नीचे जाने के लिए सीढ़ियाँ बनीं थीं। रोशनी के लिए लम्बे तार के सहारे बल्ब लटका था। अंदर एक दिया जैसा कुछ जल रहा था। जलते दिए से अंदर आक्सीजन की स्थिति पता चलती है। दिया जल रहा है,मतलब कुँए (खान) में आक्सीजन है। जब तक दिया जल रहा है तब तक खान में काम करने वाले सुरक्षित हैं।
खान में तीन लोग काम कर रहे थे। लेकिन ऊपर से दिख नहीं रहे थे। शायद काम करने की जगह अंदर कहीं होगी। ऊपर से आवाज़ देने पर एक आदमी काम करने की जगह से बाहर आया और अपनी शक्ल दिखायी। कुछ देर में वह फिर अंदर चला गया। खान में ओझल हो गया।
जो खान हमने देखी वह दस साल पुरानी है। मतलब दस साल से इसमें पत्थर (Gems) निकल रहे हैं। 30 मीटर गहरी खान में दो सुरंगें हैं जिनसे पत्थर निकलते हैं। इन्हीं लोगों की एक दूसरी खान 55 साल पुरानी थी जिसे बंद कर दिया गया क्योंकि उसमें से पत्थर निकलना बंद हो गया था। बंद होने के समय वह खान 150 मीटर गहरी थी। इस खान से 50 से अधिक तरह के पत्थर निकलते हैं।
श्रीलंका की खानों में खासतौर पर दो तरह के पत्थर निकलते हैं एक ब्लू सफ़ायर जो कि श्रीलंका का नेशनल स्टोन है। दूसरा मून स्टोन जो कि इस खान से निकलने वाला प्रमुख स्टोन है। मून स्टोन भी दो तरह के होते हैं एक नीला, दूसरा सफ़ेद। सफ़ेद पत्थर दुनिया की कई जगहों पर मिलता है लेकिन नीला मून स्टोन श्रीलंका की ख़ासियत है। नीले मून स्टोन का ज्योतिष के अनुसार बड़ी माँग रहती है।
खान में काम करने वाले नीचे खुदाई करके मिट्टी सहित पत्थर ऊपर बाल्टी में भरते जाते हैं। बाल्टी कुँए से ऊपर आकर नीचे से आए सामान को एक हौद में पलट देती है। हौद में पानी भरा हुआ था। उसमें छन्नी से मिट्टी छानकर पत्थर अलग कर लिए जाते हैं। उन पत्थरों को अलग-अलग छाँटकर उनसे रत्न बनाए जाते हैं।
खान के पास खान से निकले पत्थरों को तराशने के काम होता है। तरह-तरह मशीनों की सहायता से पत्थरों की कटाई, घिसाई, रगड़ाई, चमकाई होती है। तरह-तरह के आकार वाले रत्नों पर अलग-अलग तरह से काम कर रहे थे कामगार। उन कामगारों में एक बच्ची भी थी जो हाल ही में अपनी पढ़ाई पूरी करके या कहें छोड़कर काम करने आई थी। उसका काम शुरुआती घिसाई का था।
पत्थरों को निकलते, उन पर काम होते और उनको आभूषणों में बदलते देखने के बाद उनका शोरूम देखा गया। तरह-तरह के आभूषण बिक्री के लिए उपलब्ध थे वहाँ। अलग-अलग दाम पर। कुछ भी न ख़रीदने का संकल्प लेकर पहुँचे लोगों ने भी कुछ न कुछ ख़रीद ही लिया। कुछ लोगों को याद आया कि उनको उनके ज्योतिषी ने कोई रत्न पहनने के लिए कहा था जो यहाँ मिल रहा है। असली और सस्ता भी। लोगों ने लपक लिया। ऐसा लग रहा था कि लोगों के पास से पैसा आज़ाद होने के लिए हुड़क रहा था।
शो रूम में चाय-पानी का भी इंतज़ाम था। जो बच्ची कुछ देर पहले एक मशीन पर पत्थर घिस रही थी वही लोगों को चाय-पानी कराने के काम में लगा दी गयी थी।
लोगों ने जम कर ख़रीदारी की। कुछ लोगों को तो सामान वहीं डिलीवर हो गया। कुछ लोगों के आभूषण होटल में देने का तय हुआ। बाद में कुछ लोगों ने अपने ज्योतिषी से कंफ़र्म किया तो पता चला कि उन्होंने ग़लत रत्न वाला आभूषण बनवा लिया था। लेकिन अब वापसी की कोई गुंजाइश नहीं थी क्योंकि आभूषण पर काम हो चुका था। लोगों ने यही सोचकर मन को बहलाया कि नहीं कुछ तो उपहार देने के काम आएगा।
आभूषण वाले शो रूम में हमारा कोई काम नहीं था सिवाय बैग थामने के, शापिंग के खतम होने का इंतज़ार करने के और ख़रीद फ़ाइनल हो जाने पर भुगतान के लिए कार्ड का पिन डालने के। अपनी ज़िम्मेदारी तसल्ली बक्स तरीक़े से पूरी की हमने। इसके बाद दुकान से बाहर निकलकर बस में बैठे हम लोग और अगली मंज़िल की तरह चल दिए।
हमारी अगली मंज़िल गाले के क़िला थी।
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