Sunday, July 27, 2025

कृष्ण बलदेव वैद

 


आज प्रख्यात लेखक कृष्ण बलदेव वैद जी का जन्मदिन है। वैद जी अगर आज होते तो आज अपना 98 वाँ जन्मदिन मनाते। इस मौके पर वैद जी की डायरी के कुछ अंश यहाँ पेश हैं :

1. "मैं एक बदतमीज, बदकलाम, बदजबान, बदनसीब , बदमिजाज बूढा बनता जा रहा हूं। लेकिन अब मैं अपना तौर तरीका बदल नहीं सकता, लाख कोशिश करूं तब भी नहीं। मुझे अपने गुस्से और गम को काम में ढालते रहना चाहिये, अपने किरदार और व्यवहार में नहीं। जैसा जीता-सोचता हूं, करीब-करीब वैसा ही लिखता हूं, जैसा लिखता हूं करीब-करीब वैसा ही जीता -सोचता हूं।
अब पढना कम कर देना चाहिये- एक तो इसलिये कि आंखें थक जाती हैं और एक इसलिये कि अब पढने से कोई फ़ायदा होता नजर आता है, न कोई खास लुत्फ़ मिलता। पढा हुआ पहले भी याद कम ही रहता था, अब और कम। अब हर क्षण खीझ को, हर अनुभव की आंच को हर ख्याल की खाक को , हर सांस की सुरसुराहट को, हर दर्द के धुयें को दर्ज करते रहना चाहिये। लेकिन क्यों?"
2. "आज अपने काम में आ गयी रुकावट के कारणों को फिर कुरेदना चाहता हूँ। मुख्य कारण तो शायद आलस्य ही है और निरन्तरता का टूट जाना, टूटते रहना। एक नागा, अपने पीछे अनेक नागों की संभावना छोड़ जाता है।'
3. "कुछ मर्दों की आंखों में उनका लिंग लहराता है।"
4. "तितलियों की बेकरारी और खामोशी के इनाम के तौर पर ही उनको उनके रंग दिए गए हैं, उनके परों पर नक्कासी की गई है।"
5. "कोई भी लम्बा सहवास कई प्रकार की आपसी तल्खियों, शिकायतों, चिड़चिड़ाहटों, बेवफ़ाइयों के बावजूद और कारण ही बना रह सकता है। सिर्फ आपसी लगाव के कारण नहीं।"
6. "बिमल इन बाग' के प्रूफ तो पढ़ डाले, लेकिन उसके प्रकाशन को लेकर उत्साहित कम हूँ, चिंतित अधिक। उत्साह की कमी का कारण प्रकाशक 'नेशनल'। वहां से प्रकाशित होकर पुस्तक शायद ही कहीं पहुंचे। चिंता का कारण यह कि लोग फिर उसकी अश्लीलता को पकड़कर बैठ जाएंगे: वैद यौन ग्रंथियों का कथाकार है, बीमार है.....। जब तक कोई प्रकाशक तैयार नहीं हुआ मैं कोशिश करता रहा। अब वह मिल गया है तो मैं ठंडा हो गया हूँ।"
7. "बुश बिल्कुल बांगड़ू नजर आता है, उसी की तरह बोलता और बिफरता है।"
8. "सेमिनारों का अपना एक संसार है -एक पूरा तंत्र। एक सेमीनार की कोख से दूसरा , दूसरे की कोख से तीसरा...... । मैं इस संसार से दूर हूँ।"
9. "पाली ने फोन पर बताया कि साहित्य अकादमी के हिन्दी पुरस्कार के लिए इस बार राजेश जोशी और मुझमें चुनाव था। अशोक, केदारनाथ सिंह और लीलाधर जगूड़ी ज्यूरी में थे। अशोक ने मेरा पक्ष लिया, बाकी के दोनों ने राजेश जोशी का। यह सब पाली को 'आउटलुक' (हिन्दी) में प्रकाशित विमलकुमार की रिपोर्ट से मालूम हुआ।"
10. "गर्मी की धमकियाँ शुरू। देश का छकड़ा ढिचकूँ-ढिचकूँ। सब नेता थके-मांदे और बिके -चुके। अधिकतर के चेहरों पर चिकनी-चुपड़ी चालाकी। यह मैं किधर भटक गया। मुझे देश के नेताओं( और अभिनेताओं) से क्या लेना-देना। मुझे 'तड़पने' के लिए साहित्य के नेता(और अभिनेता) ही काफी हैं, खासतौर पर अब जब कोई काम नहीं कर पा रहा।"
11. "इराक अमरीकी सरकार के जुनून का शिकार बनकर रहेगा, बावजूद इस हकीकत के कि दुनिया भर की अक्सरियत इस हमले के खिलाफ है। तबाही होगी। इराक टूट-फूट जाएगा। सद्दाम हुसैन बच जाए या मार दिया जाए उस से कोई फरक नहीं पड़ेगा। दहसत-पसंदगी बढ़ जाएगी। इस्लामी कट्टरवाद बढ़ेगा, भारत-पाक झमेला और उलझेगा।
12. "दिल्ली जी महदूद मिडल क्लास जिंदगी के बाहर भारत में भयंकर दुख है, दरिद्र है, बीमारियां हैं, बदसूरती है , अन्याय है जिसके बावजूद करोड़ों लोग जी रहे हैं , ऐसे जैसे सब अनिवार्य हो। दिल्ली के अंदर भी दुख कम नहीं।
13. "मैंने अपने काम में गरीबी और दरिद्र और भूख को उकेरने की कई कोशिशें की हैं, लेकिन कोई बड़ा शाहकार अभी तक इस विषय पर नहीं लिख पाया। "
14. "इराक पर हमला होने वाला है। सद्दाम हुसैन अगर पागल है तो बुश काम पागल और खतरनाक नहीं ।"
15." इराक पर चल रहे हमले की जो तस्वीरें टीवी पर देखने को मिलती हैं उन से वहां हो रही हौलनाक तबाही की तसवीर सामने नहीं आती। लगता है जैसे आतिशबाजी हो रही हो, आकाश में होली खेली जा रही हो। कोई चीखोपुकार सुनाई नहीं देती, कोई दुख दिखाई नहीं देता, एक मनसूई सी रंगीनी , एक रंगीन खेल तमाशा।"
16. "इराक पर हमला जारी है। यह लड़ाई महीनों चलेगी। खत्म होने के बाद भी खत्म नहीं होगी। अमरीकी सरकार नुकसान उठाएगी। इस्लामी कट्टरपन और दहशत पसंदगी को बढ़ावा मिलेगा।"

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