"एक नज़र से देखने पर लगता है कि कवितायें गहन चिंतन से उपजी और बड़े उद्धेश्य को समर्पित कविताएँ हैं।" वरिष्ठ आलोचक Virendra Yadav जी ने Nirupma Ashok जी के दूसरे काव्य संग्रह 'वसंत में बारिश' के लोकार्पण के मौक़े पर अपने विचार व्यक्त करते हुए यह बात कही।
निरुपमा दीदी के पहले कविता संग्रह 'वसंत है' का लोकार्पण पिछले वर्ष जून माह में लखनऊ के शीरोज कैफ़े में हुआ था। साल भर से भी कम के अंतराल में दूसरा कविता संग्रह आना उनकी सृजन क्षमता का परिचायक है। कविता संग्रह छप तो जनवरी में ही गया था लेकिन उनकी अमेरिका यात्रा के कारण उसका लोकार्पण स्थगित रहा। जो उनके अमेरिका से वापस लौटने पर कल हुआ।
अमेरिका यात्रा के दौरान यात्रा वृत्तांत भी लिखने शुरू किया हैं दीदी ने। कविता से गद्य की ओर की उनकी यात्रा का स्वागत करते हुए वीरेंद्र यादव जी ने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में कि वे गद्य लेखन की तरफ़ भी अग्रसर होंगी।
कविता संग्रह का लोकार्पण इंदिरा नगर स्थित दीदी के आवास में हुआ। नज़दीकी इष्ट मित्र शामिल हुए। कुछ लोग आ पाए , कुछ लोग नहीं आ पाए। 'वसंत है ' का विमोचन शीरोज कैफ़े में हुआ था। तमाम लोग शामिल हुए थे उसमें। 'वसंत में बारिश' का विमोचन घर में हुआ।
कार्यक्रम के पहले लोगों का इंतज़ार करते हुए वीरेंद्र यादव जी के हाल में संगत -94 में हुए साक्षात्कार पर चर्चा होती रही। हम लोगों का विचार था कि वीरेंद्र यादव जी सवाल तो खूब हुए जिनके उन्होंने बखूबी जवाब दिए लेकिन इस चक्कर में वीरेंद्र यादव जी के लेखन और व्यक्तित्व पर चर्चा कम हो पायी। वीरेंद्र यादव जी ने Anjum Sharma के व्यवहार और उनके अध्ययन और मेहनत की तारीफ़ भी की। अंजुम शर्मा की खूबियों को स्वीकार करते हुए मित्रों का मानना था कि साक्षात्कार में वीरेंद्र जी को घेरने का प्रयास दिखा जिससे वे सहज रहते हुए बिना आपा खोए बाहर निकले।
लोगों के आने का बाद कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए Ashok Kumar Avasthi भाई साहब ने ने इस कविता संग्रह की छपाई में अपने योगदान को नकारने की कोशिश करते हुए अतिथियों का स्वागत किया। लेकिन बाद में उनके योगदान की असलियत का बखान करते हुए दीदी ने बताया कि किस तरह उनकी सारी लिखाई को देर तक मेहनत करते हुए भाई साहब ने फ़ेसबुक पर पोस्ट किया और फिर किताब छपाने में मेहनत की।
किताब के लोकार्पण के बाद लोगों ने कविता संग्रह पर अपने विचार व्यक्त की। दीदी की छात्रा रही अवंतिका सिंह जी ने दीदी के साथ की याद करते हुए बताया कि किस तरह दीदी उनके लिए शिक्षिका से बढ़कर आदरणीय व्यक्तित्व बन गयीं।
अवंतिका सिंह जी के साथ उनके पति अशोक वर्मा, पूर्व पुलिस अधीक्षक गोंडा, ने भी निरुपमा दीदी के कालेज के प्रधानाचार्य रहते हुए उनकी गतिविधियों की चर्चा करते हुए बताया कि लखीमपुर जैसी जगह में कालेज का अनुशासन बनाए रखकर उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अनुपम योगदान दिया।
आयुध निर्माणियों के भूतपूर्व उप महानिदेशक Niraj Kela जी ने ' वसंत में बारिश' की कविताओं पर चर्चा करते हुए काव्य संग्रह की कविता 'ग्रीष्म' को पढ़ते हुए निराला जी की कविता 'वह तोड़ती पत्थर' से जोड़ते हुए उनकी कविता का पाठ भी किया। कविता के एक अंश :
ये दुपहरिया जेठ की
खून पसीना एकाकार करती
हड्डी चटकाती
चुह चुह कर
उन्हीं का पसीना बहाती
काल बनती दिखती
प्रचंड जानलेवा बनती
यह दुपहरिया जेठ की !!!
नीरज केला के साथ उनकी जीवन रेखा जीवन संगिनी Renu Kela जी भी अपनी सदाबहार मुस्कान के साथ कार्यक्रम में मौजूद रहीं।
Avdhesh Nigam जी कालेज के दिनों से निरुपमा दीदी से जुड़े रहे हैं। उन्होंने पुराने दिनों की याद करते हुए बताया कि कैसे उनकी रचना यात्रा एक साथ शुरू हुई थी। कैसे Jai Narain Budhwar और निरुपमा दीदी के साथ उनका साझा कविता संग्रह 'शीर्षक नहीं' प्रकाशित हुआ था। दीदी की रचना यात्रा के फिर से शुरू होने पर ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए उन्होंने आशा व्यक्त की कि आगे भी उनका सृजन कार्य चलता रहेगा।
निरुपमा दीदी के साथ आर्यकन्या डिग्री कालेज में अध्यापन करने वाली गुरूमीत कलसी दीदी ने अपने कालेज के दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे उन दोनों ने चुनौतियों के दिन साथ रहते हुए, गाते-गुनगुनाते साथ बिताये है।
निरुपमा जी के पड़ोसी पुनीता सिंघल जी और दीपक सिंघल जी ने उनके साथ जुड़ी यादों की चर्चा की।
अनूप शुक्ल ने निरुपमा दीदी के शुरुआती दिनों की रचना यात्रा फिर से शुरू होने पर बधाई देते हुए आशा ज़ाहिर की यह यात्रा और आगे बढ़ेगी। उनकी नयी कृतियाँ आएँगी। साथ ही यह भी आशा की भई भाई साहब भी अपना लेखन कार्य फिर से शुरू करेंगे। उन्होंने दीदी की कविता स्त्री का पाठ भी किया :
"स्त्री-मन
शब्द बहुत कम
भावुकता के मोती ज़्यादा !
स्त्री-मन
स्वप्न बहुत कम
आभासी सुख का मृग जल ज़्यादा! "
अपनी बात कहते हुए निरुपमा जी ने अपनी साहित्यिक रुचियों का श्रेय अपने माता-पिता को देते हुए बताया कि किस तरह उनके पापा जी ने उनका नाम निराला जी के उपन्यास' निरुपमा' पर रखा था। अपनी मम्मी को याद करते हुए उनके संघर्षों के दौर में भी संवेदना बनाए हुए साहित्यिक संस्कार दिए। उन्होंने अपनी रचना यात्रा में अपने पति प्रोफ़ेसर अशोक अवस्थी जी के सहयोग और योगदान की चर्चा करते हुए कहा -'यह कहावत अधूरी है कि हर सफल पुरुष के पीछे एक महिला का सहयोग होता है। किसी महिला की सफलता के पीछे उसके पति का योगदान होता है।' यह बात सुनकर फ़ौरन सर्वसम्मति से यह बयान लिंग निरपेक्ष बयान जारी हुआ-' हर इंसान की सफलता के पीछे उसके जीवन साथी का हाथ होता है।' यहाँ जीवन साथी व्यापक अर्थ में है वह इंसान जो किसी के जीवन में साथ रहा हो। जीवन साथी के लिए पति/पत्नी होना ज़रूरी नहीं है।
अपने कविता 'वसंत में बारिश' की रचना प्रक्रिया की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे वसंत के मौक़े हुई अनायास बारिश में उनके देखते-देखते पेड़ के सारे फूल तेज बारिश के आघात से झर गए:
"अकाल बारिश वसंत की
झर झर झर गयीं पत्तियाँ पीली
झर गए लाल पीले धवल फूल
कमजोर शाखें टूट टूट हो गयीं भूलूँठित
तूफ़ानी झोंको से -
आम्र मंजरियों के गुच्छ-दर-गुच्छ
मटियारे-हरित-पीत यों बिखरे
नन्हे नन्हें बिखरे हों मोती जैसे
पानी और तूफ़ानी हवा की साँय-साँय संग
वसंत और बारिश ने
सपनों का रचा उजाड़ दिया संसार। "
इसी कविता के आख़िर में कहतीं हैं:
" अतिरेक के बावजूद/फिर भी
करो प्रतीक्षा वसंत की।।
तांडव की उमर लम्बी कब हुई ?
अंधेरा अनंत नहीं होता
वसंत के पहले
और बाद बहुत कुछ होता है.....!
निरुपमा दीदी ने अपनी रचना यात्रा और लिखने के विविध अनुभवों का ज़िक्र करते हुए ख़ुशी ज़ाहिर की उनका लिखना फिर से शुरू हुआ। उन्होंने वहाँ मौजूद सभी अतिथियों भी किया कि वे लोग आए और इस कार्यक्रम को सफल बनाया।
वीरेन्द्र यादव जी ने अपने सम्बोधन के अशोक अवस्थी जी से लम्बे जुड़ाव की याद से बात शुरू की। यह बताया कि वे लोग 1972 से इस कालोनी में साथ रह रहे हैं। उनके लम्बे साथ की तमाम ख़ुशनुमा यादें हैं।
कविता संग्रह की कविताओं पर बात करते हुए वीरेंद्र यादव जी ने कहा कि एक नज़र से देखने पर लगता है कि कवितायें गहन चिंतन से उपजी और बड़े उद्धेश्य को समर्पित कविताएँ हैं। इनमें जीवन के विविध पहलुओं पर लिखे विचार हैं। इनमें प्रेम है, प्रकृति है, संवेदना है, युद्ध की विभीषिका की वर्णन है। सभी कवितायें अपने से आगे बढ़कर समाज की चिता की कवितायें हैं।
वीरेंद्र यादव जी निरुपमा जी हाल में लिखे यात्रा संस्मरणो का स्वागत करते हुए कहा -'यह ख़ुशी की बात है। कविता स्वतःस्फूर्त होती है। भावआधारित होती है। गद्य जीवन संघर्ष की कहानी कहता है। निरुपमा जी को गद्य लेखन में सक्रिय होना चाहिए।
वीरेंद्र जी ने आज के समय में, जब मिलना जुलना कम होता जा रहा है, ऐसी गोष्ठी के आयोजन को सुखद अनुभव बताते हुए आशा की ऐसे आयोजन और होते रहने चाहिए।
कार्यक्रम में उपस्थिति सभी लोगों के यही विचार थे कि मिलना-जुलना होता रहना चाहिए।
कार्यक्रम के बाद और बीच में भी फ़ोटोग्राफ़ी होती रही। चाय-नाश्ता भी। Suman -दीप्ति की जोड़ी सारे इंतज़ाम देखती रही। रेशमा, दिलीप और प्रदीप जिन्होंने कोई कविता नहीं पढ़ी है दीदी के कार्यक्रम में सक्रिय सहयोग करते रहे।
कार्यक्रम के अधिकतर फ़ोटो दीप्ति Deepti ने खींचे। बाद में अनौपचारिक बातचीत में दीप्ति ने कहा दीदी की कवितायें ध्यान से पढ़नी पड़ती हैं। दो बार पढ़कर समझती हैं। मौक़े का फ़ायदा उठाते उन्होंने यह भी कहा- अनूप जीजा के लेख समझने के लिए दो-तीन बार पढ़ने पड़ते हैं। इस पर देर तक चर्चा होती रही कि दीप्ति के इस बयान को अनूप शुक्ल की तारीफ़ समझा जाए या उन पर व्यंग्य।
लखनऊ में विधि के प्रोफ़ेसर डा मनोज पांडेय, अमर उजाला से सम्बद्ध रहे संजय त्रिपाठी, नीरज मिश्रा-रेनु मिश्रा अपनी बिटिया शक्ति के साथ भी कार्यक्रम में उपस्थित थीं। नीरज दीदी निरुपमा के पहले काव्य संग्रह के विमोचन में भी उपस्थित थे। उनकी बिटिया शक्ति हाल ही में अपने टेनिस प्रशिक्षण के लिए तीन माह के लिए अमेरिका रहकर वापस आई हैं। बाक़ी के विवरण फ़ोटो और वीडियो में देख सकते हैं।
कुल मिलाकर एक ख़ुशनुमा अनुभव रहा 'वसंत में बारिश' के विमोचन का।
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