Tuesday, May 20, 2025

नेकचंद की वाइफ नहीं रहीं

 ‘साहब, वो नेकचंद की वाइफ नहीं रहीं।’ -सोसाईटी के गेट पर दरबान ने बताया। उसकी आवाज में हल्की हकलाहट थी। मैंने सोचा बचपन में देखभाल हो जाती तो उसकी आवाज ठीक हो जाती।

दूसरों के बारे में फ़ौरन निष्कर्ष निकालना हमारी आदतों में शुमार है।
इन दरबान से कभी मेरी बातचीत नहीं हुई थी। हो सकता है नेकचंद से बात करते हुए उसने मुझे देखा हो। इसलिए उनकी पत्नी के निधन की सूचन मुझे दे रहा हो।
नेकचंद से दो बार बात हुई थी। वह भी गाड़ी का इंतजार करते हुए। टाइमपास के बहाने हुई बातचीत। हालचाल लेने के बहाने हुई बातचीत।
नेकचंद हरदोई के रहने वाले हैं। हमको हरदोई बताया तो हमने कहा -‘हददोई कहो।’
वो मुस्कुराए और बातचीत की गाड़ी सरपट दौड़ने लगी। हरदोई का नाम भले हरदोई है लेकिन कहा हददोई ही जाता है। हरदोई मतलब हरि द्रोही। बातचीत में ‘ र ‘ ग़ायब रहता है। हरदोई वालों से जुड़ने का पासवर्ड है ‘ र ‘ गोल करके शहर का नाम लेना।
नेकचंद ने बताया कि उनके एक बेटी और एक बेटा हैं। बेटी की शादी कर दी। बेटा अच्छी नौकरी करता था लेकिन माँ के इलाज में सहयोग के लिए नौकरी छोड़ दी। अब माँ की देखभाल करता है। नेकचंद दरबान का काम करते हैं। दस-बारह हज़ार पाते होंगे।
पत्नी की बीमारी के बारे में बताया कि पीलिया हो गया। कैसे हो गया पता नहीं चला।अब अहमदाबाद से इलाज हो रहा है। कुछ फ़ायदा है लेकिन खाना-पीना नहीं हो रहा। जो खाती हैं उलट देती हैं। नेकचंद हैरान हैं कि कोई बीमारी नहीं थी पता नहीं कैसे पीलिया हो गया और इतना गंभीर हो गया कि इलाज मुश्किल।
पीलिया कानपुर में आम रोग है। सीवर लाइन और पानी की लाइनें आपस में गलबहियाँ करके पूरे शहर में फैली हैं। कहीं लीकेज हो जाता होगा। दोनों अपने-अपने माल-मत्ता एक दूसरे से साझा कर देती होंगी। इस लाइन मिलन की सौग़ात शहर के लोगों पीलिया के रूप में मिलती है। हरदोई वाली पाइप लाइनों ने भी देखा-देखी आपस में दोस्ती कर ली होगी।
नेकचंद ने अपनी उम्र बताई 55 साल। पत्नी की 65 साल। आम तौर पर इस तरह की जोड़ी फिल्मी दुनिया में ही बनती है। लेकिन वहाँ के लोग पीलिया पीड़ित नहीं होते।
अब आते-जाते गेट पर नेकचंद को देखते हैं। लेकिन पूछने की हिम्मत नहीं होती, वापस आए कि नहीं?
लेकिन कल एक काम वाली से बात की तो उसने बताया कि वह हरदोई की रहने वाली है। प्रेस का काम करती है। उससे पूछा तो उसने बताया कि वह नेकचंद को नहीं जानती।
नेकचंद की पत्नी 65 साल की उम्र में चली गईं। उनके घर परिवार के लोगों को उनकी याद होगी। कुछ घटनाएं। लेकिन वे ख़ुद अपने आप में बड़ा आख्यान होंगी। बचपन से लेकर गुज़र जाने तक न जाने कितनी यादें होंगी उनके ज़ेहन में। क्या पता कोई लेखक होता तो उनके बारे में उपन्यास लिख देता। लेकिन वे विदा हो गईं। पीलिया जैसी सामान्य बीमारी से जिसका पता भी नहीं चला उनके परिवार वालों को।
काश बीमारियों की भी एंटी मिसाइल होती। बीमारी के हमला करते ही उसकी पहचान करके उसको मार गिराती। होती तो हैं ऐसी ऐंटी मिसाइल लेकिन अभी आम इंसान की पहुँच से बहुत दूर हैं।
फ़िलहाल तो देश का आम आदमी अपने देश की सुरक्षा में तैनात एंटी मिसाइल के कारनामे देखकर ही ख़ुश है।

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