कुछ महीने पहले 4 पीएम यूट्यूब चैनल पर डाक्टर मेडुसा का नाम सुना। मेडुसा दुखदर्शन के नाम से अपने वीडियो बनाती थीं। रोचक , व्यंगात्मक अंदाज़ में ख़बरें पढ़ते हुए समसामयिक घटनाओं पर तंज करती हुई उनके वीडियो का इंतजार रहता था। बाद में पता चला कि मेडुसा कई वर्षों से वीडियो बना रही हैं। उनके पुराने वीडियो देखते हुए लगा इनको पहले क्यों नहीं देखा।
बाद में पता चला कि मेडुसा छद्म नाम है जिसको रखने के बारे में उन्होंने एक वीडियो में जानकारी दी है (लिंक टिप्पणी में)।
यह भी पता चला कि मेडुसा भाषा विज्ञान से जुड़ी हैं। उनके शोध का विषय भाषा के माध्यम से अल्जाइमर (भूलने की समस्या) की पहचान करने से जुड़ा था। जिन समाजों में चिकित्सा की आधुनिक सुविधाएं नहीं हैं ऐसे समाज के लोगों में अल्जाइमर रोग के शुरुआती पहचान के लिए अल्जाइमर की शुरुआत में भाषा में कैसे बदलाव आते हैं , यह उनके शोध का विषय था।
मेडुसा के शुरुआती वीडियो भाषा विज्ञान के सहारे शब्दों की व्याख्या के बहाने व्यंग्य तक सीमित थे। उस समय उनको लगता था कि उनके व्यंग्य का स्तर ऐसा है कि लोगों को समझ में नहीं आयेगा इसलिए कोई उन पर एतराज या उनके ख़िलाफ़ शिकायत नहीं करेगा।
दुखदर्शन के बाद मेडुसा ने धड़ल्ले से व्यंग्य वीडियो के माध्यम से अपनी बात कहनी शुरू की। ऐसे ही एक वीडियो में पहलगाम पर आतंकी हमले के बाद इस घटना के जिम्मेदार लोगों से सवाल करने और देश में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के प्रयास को भी आतंकवाद बताते हुए एक वीडियो पोस्ट किया। इस पोस्ट को देश के ख़िलाफ़ बताते हुए उनके विश्वविद्यालय के कुछ लोगों ने उनके ख़िलाफ एफ़आईआर की ।
यह खबर छपने पर पता चला कि मेडुसा लखनऊ विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफ़ेसर हैं। उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर होने से एक फ़ायदा तो हुआ कि अनाम मेडुसा कौन हैं यह पता चल गया। पिछली लखनऊ यात्रा के दौरान उनसे मुलाकात भी हुई।
मेडुसा के कई इंटरव्यू यूट्यूब पर उपलब्ध हैं। इनमें से एक में उन्होंने अपने पसंदीदा उपन्यास 415 फ़ारेनहाइट का जिक्र किया था। 1953 में लिखे गए इस अमेरिकी उपन्यास में ऐसे समाज की कहानी बताई गई है जहां किताबें कानूनी रूप से बैन हैं। किताबों को जलाने के लिए लोग लगाए गए हैं। पढ़ने-लिखने और अभिव्यक्ति पर बन्दिश की कथा कहता है यह उपन्यास।
डॉ मेडुसा को कल माननीय उच्च न्यायालय से अंतरिम जमानत मिली। आशा है जल्द ही उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर निरस्त हो जायेगी।
डॉ मेडुसा को उनके सृजनात्मक जीवन के लिए शुभकामनाएं।
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