Sunday, June 22, 2025

श्रीलंका में सीता माता मंदिर

 



श्रीलंका में राम कथा से जुड़े दो प्रमुख स्थल हैं। एक रावण का क़िला और दूसरा अशोक वाटिका (सीता वाटिका) । रावण का क़िला तो हमारे टूर प्रोग्राम से अलग रास्ते पर था इसलिए उसे तो देखने नहीं जा पाये। अलबत्ता सीता वाटिका देखने को जरूर मिला।
रामकथा के अनुसार लंका के राजा रावण ने सीता जी का अपहरण करके उनको अशोक वाटिका (सीता वाटिका) में रखा था। सीता जी का पता लगाने के लिए हनुमान जी भेजे गए थे। वे सीता वाटिका पहुंचे और सीता जी के दर्शन करके उन्होंने भगवान राम की अंगूठी निशानी के तौर पर दी। सीता वाटिका वह जगह कही जाती हैं सीता माता से हनुमान जी की भेंट हुई थी।सीता जी के नाम पर यहाँ बना मंदिर सीता माता मंदिर कहलाता है।
एक दिन पहले हम लोग ट्रेन से यात्रा करके नानू ओया स्टेशन आए थे। वहाँ नुआरा एलिया शहर में रात को रुके। सुबह वेलेंटाइन डे था। उस दिन सुबह की चमकदार धूप में वैलेंटाइन डे की शुभकामनाएं ले-देकर हम लोग सीता वाटिका देखने के लिए चले। सीता वाटिका होटल से कुछ ही दूरी पर थी । आधे घंटे से भी कम समय में वहाँ पहुँच गए। मंदिर के नाम पर वह जगह सीता एलिया कहलाती है।
सीता माता का मंदिर हाई वे (Peradeniya-Badulla-Chenkaladi Highway) पर बना हुआ है। गाड़ियाँ आती-जाती हैं। संभलकर सड़क पार करना होता है। मंदिर में प्रवेश करने की फीस सौ श्रीलंकाई रुपए थे। भारत के हिसाब से क़रीब तीस रुपए। सबके टिकट लेकर हम लोग अंदर गए।
मंदिर के अंदर राम-सीता-लक्ष्मण जी की काले संगमरमर की मूर्ति बनी हुई है। मंदिर के अंदर सबको मुकुट पहनाकर तिलक लगाया जाता है । तीस रुपए में मुकुट और तिलक मंहगा सौदा नहीं है। मंदिर के अंदर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी मना थी इसलिए लोग धड़ल्ले से कैमरे चमका रहे था। पुजारी के एकदम सामने फ़ोटोग्राफी करने पर पुजारी जी फोटोग्राफी से मना करने की औपचारिकता निभा रहे थे। लोग भी औपचारिक रूप से उनके टोंकने पर कैमरे दूसरी तरफ़ करके फ़ोटो खींचने लगते थे।
मंदिर में राम कथा से संबंधित फोटो और विवरण लगे थे। उसमें सीता हरण और राम जी से जुड़ी अन्य कथायें भी शामिल थीं।
मंदिर में हनुमान जी की भी मूर्ति थी। आम तौर पर हनुमान जी की मूर्तियां 'लाल देह लाली लसे' के अनुसार लाल रंग की होती हैं। लेकिन यहाँ काली मूर्ति थी हनुमान जी की। एक और रोचक बात यह कि हनुमान जी की मूर्ति में 108 पान के पत्तों की माला थी। यह अनूठी परंपरा है यहाँ श्रीलंका में जिसमें हनुमान जी को फूलों की माला न पहना कर पान के पत्तों की माला पहनाई जाती है।
मंदिर के पीछे की तरफ़ वह जगह बनी थी जहाँ माना जाता है कि हनुमान जी अशोक वाटिका में उतरे थे। एक जगह पर पैर के आकार का गड्ढा बना था। माना जाता है वह गड्ढा हनुमान जी के अशोक वाटिका में उतरने का निशान है। उसके अगल-बगल भी कई गड्ढे बने हुए हैं। विश्वास किया जाता है वे सब भी हनुमान जी के पैरों के निशान है।
लोग हनुमान जी के पैरों के निशान के पास बैठकर तरह-तरह से फ़ोटो खिंचवा रहे थे। वीडियो बना रहे थे। जगह काफ़ी संकरी है इसलिए लोग बारी-बारी से उस जगह पहुँचकर फ़ोटो खिंचवा रहे थे।
पास में ही एक नदी बह रही थी। किंवदंती के अनुसार सीता जी के सीता वाटिका में प्रवास के दौरान सीता जी इसी नदी में स्नान करती थीं । उनके नाम पर ही इसे सीता नदी कहा जाता है। सीता नदी के ऊपर बने इस पुल से नीचे उतरते ही हनुमान जी के पैर बने थे। लोग पुल पर खड़े-खड़े हमुनान जी के पैर के निशान के साथ लोगों को फोटो खिंचाते देखते हुए अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे।
मंदिर में लगे सूचना पट्टों के अनुसार मंदिर की मरम्मत और संचालन में श्रीलंका सरकार के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। कुछ भारतीय संस्थाओं के नाम भी मंदिर प्रबंधन में सहयोग में लगे दिखे।
तमिल में लिखी कम्बन लिखित राम कथा के अनुसार हनुमान जी जब सीता जी की खोज-खबर लेने के लिए लंका गए थे तो राम जी सीता जी की खबर पाने को उतावले और व्याकुल थे। हनुमान जी को राम जी की व्याकुलता का अंदाजा था। इसलिए श्रीलंका से वापस लौटने पर राम जी को देखते ही उन्होंने कहा -"देखा, मैंने सीता को।" हनुमान जी को अंदाज़ था राम जी लंबा विवरण सुनने की स्थिति में नहीं है। " देखा" सुनते ही उनको तसल्ली हो गई कि सीता जी का पता चल गया है। इसके बाद हनुमान जी ने तसल्ली से पूरी लंका कथा सुनाई होगी।
इस कहानी से अंदाज़ लगता है -"काम की बात करने के लिए बहुत कम शब्दों की जरूरत होती है।"
सीता माता मंदिर देखने के बाद हम लोग आगे बढ़े। हमारी अगली मंजिल एक चाय का बागान और उससे जुड़ी चाय की फैक्ट्री थी।

https://www.facebook.com/share/v/1aBsfFVbhC/

No comments:

Post a Comment