पिछले दिनों हमारे कंप्यूटर की सेटिंग गड़बड़ाई रही। जो भी लिखते उसके चारो तरफ़ घेरा बन जाता। बक्से जैसा। मानों हमारे लिखे को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया हो। सुरक्षा घेरा एक तरफ़ वीआईपी होने का एहसास है। दूसरी तरफ़ बवाल भी। आपकी हर पल की गतिविधियों का पता सुरक्षा मुहैया कराने वाले को चलता रहता है।
आशीष विज्ञान से संबंधित लेख लिखते रहते हैं।विज्ञान विश्व (। https://vigyanvishwa.in/ ) साइट चलाते हैं। कुछ दिन पहले उनकी पहली किताब आई है -
ब्रह्मांड के संरचना। इस किताब में आशीष ने ब्रह्मांड के बनने से लेकर उसके संभावित अंत के बारे में सरल भाषा में जानकारी दी है ।अरबों -खरबों साल पहले कैसे एक महाविस्फोट से ब्रह्मांड का बनना शुरू हुआ और कैसे आज भी यह फैलता जा रहा है, इसका विवरण किताब में दिया है। 180 पेज की किताब 299 रुपए की है। आनलाइन आर्डर करके मंगा सकते हैं। लिंक टिप्पणी में दिया है।
ब्रह्मांड के संरचना। इस किताब में आशीष ने ब्रह्मांड के बनने से लेकर उसके संभावित अंत के बारे में सरल भाषा में जानकारी दी है ।अरबों -खरबों साल पहले कैसे एक महाविस्फोट से ब्रह्मांड का बनना शुरू हुआ और कैसे आज भी यह फैलता जा रहा है, इसका विवरण किताब में दिया है। 180 पेज की किताब 299 रुपए की है। आनलाइन आर्डर करके मंगा सकते हैं। लिंक टिप्पणी में दिया है।
अरबों-खरबों साल पहले ब्रह्मांड की शुरुआत से अब तक न जाने दुनिया में कितने बदलाव हुए होंगे। न जाने कितने आकाशगंगाएँ, तारे, ग्रह, नक्षत्र पैदा हुए होंगे, ख़त्म हो गए होंगे। न जाने कितनी दुनियायें, बनी होंगी, उजड़ गयीं होंगी। कितनी कहानियाँ बनी होंगी, कितनी सभ्यताएँ शुरू हुई होंगी, ख़त्म हो गई होंगी। इतने बड़े पटल में हमारी धरती की कुल कहानी एक बिंदु भर से बड़ी नहीं होगी। उसमें भी अगर इंसान की कहानी देखी जाये तो वो तो और भी छोटी और लगभग अस्तित्वहीन होगी।
ऐसे समय में आजकल चल रही लड़ाइयाँ के बारे में सोचते हैं तो ब्रह्मांड की तुलना में इसकी कोई गिनती ही नहीं होगी। इराक़ और इजरायल आपस में लड़ने पर आमादा हैं। इसको लड़ाने वाले जमूरे बंदर की तरह कहीं दूर सुरक्षित बैठे दोनों देशों को बिल्लियों की तरह उकसा रहे होंगे- 'चढ़ जा बेटा सूली पर, भली करेंगे राम।'
आज जितने भी देश लड़ाई के लिए आमादा हैं उन सभी देशों के राष्ट्राध्यक्ष अपनी मर्जी को अपने देश मर्जी समझते हुए लड़ाई कर रहे हैं। किसी भी देश के लोग शायद अपनी तरफ़ से लड़ाई नहीं करना चाहते हैं। लेकिन हो रही है लड़ाइयाँ, मर रहे हैं लोग, बन रहे हैं किस्से। लड़ाई से जिन लोगों को फ़ायदा होता है वे लोग अपनी तरफ़ से घी डाल रहे हैं युद्धयज्ञ में।
लड़ाई की रिपोर्टिंग से पता लगाना मुश्किल होता है कि कौन जीत रहा है, कौन हार रहा है। अपन न्यूज चैनल तो देखते नहीं। न्यूज चैनल सबसे अधिक झूठ का प्रचार करने वाले लगते हैं।
यूट्यूब पर खबरें देखते हुए भी असलियत का अंदाज़ नहीं लगता है। एक समाचार में इजरायल हावी दिखता है, उसके बगल की दो खबरें ईरान का पलड़ा हावी बताती हैं। कुछ लोग ईरान की तबाही चाहते हैं, कुछ मनाते हैं इजरायल निपट जाये। सबके अपने-अपने तर्क हैं, अपने-अपने पूर्वाग्रह हैं, अपनी-अपनी जानकारियाँ है। अपने-अपने हिसाब से लोग पोस्ट लिख रहे हैं, वीडियो बना रहे हैं।
कुछ लोग ईरान, इजरायल के अतीत के किस्से बताते अपना पक्ष तय कर रहे हैं। ऐसे लोग अपनी सुविधानुसार पीछे जाते हुए किसी बिंदु पर खड़े होकर उस समय की कहानियाँ सुनाते हुए अपना तर्क पेश करते हैं। ऐसे लोग भूल जाते हैं कि पीछे जाने की कोई सीमा नहीं होती। पीछे जाते-जाते वहाँ तक पहुँचा जा सकता है जहाँ ब्रह्मांड की शुरुआत हुई थी।
फ़िलहाल यूट्यूब पर उत्तर भारत में बरसात के किस्से आने शुरू हो चुके हैं। इजराइल, ईरान की लड़ाई के किस्से भी चल ही रहे हैं, सोनम और राजा के किससे भी अभी जारी हैं। एयरइंडिया की दुर्घटना की जांच के इतने एंगल सामने आ गए हैं कि दुर्घटना का जो भी कारण जाँच कमेटी बतायेगी उससे अलग ही कहानियाँ बनेंगी। पिछले दिनों एयर इंडिया की उड़ाने वापस हुई हैं, जहाज़ रोके गए हैं। सबको देखकर लगता है कि एयरइंडिया को टाटा वालों को सौंपते समय उनके सिस्टम के काम वाले पुर्जे निकाल लिए गए हों। सरकारी कारखानों की नीलामी वाले मशीनें कबाड़ में बेंचते हुए ऐसा ही किया जाता है।
बात कहाँ से शुरू हुई थी, कहाँ पहुँच गई। मुफ्त के प्लेटफार्म पर लिखने-लिखाने में ऐसा ही होता है।
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