'सैंड बैंक' से लौटते हुए शाम हो गई थी। लौटते हुए कुछ लोग वेस्टलैंड से होटल चले गए। बाक़ी लोग पास ही स्थित लैगून बीच गए। खरीदारी करनी थी लोगों को ताकि लक्षद्वीप ट्रिप की सनद रहे।
लैगून बीच पर ज़्यादा भीड़ नहीं थी । बहुत कम सैलानी थे वहाँ। ज्यादातर स्थानीय लोग ही थे। आसपास के घरों में रहने वाले। महिलाएं, बच्चियाँ आपस में बतिया रहे थे। बच्चे बीच किनारे बालू में खेल रहे थे।बुजुर्ग लोग भी इधर-उधर बैठे गप्प रट थे। लहरें समुद्र के उछल-कूद रहीं थीं।
खरीदारी के लिए वहाँ एक ही दुकान थी। सीप, मूँगे से बने हुए सामान, हैट, लक्षद्वीप लिखे हुए चाबी के गुच्छे, फ्रिज मैग्नेट जैसी चीजें। सीप, मूँगे वाले सामानों में हैंड बैंड, कान की बालियाँ और माला प्रमुख थे। दाम भी ज़्यादा नहीं था। सौ रुपए की बालियाँ, हैंड बैंड। डेढ़ सौ रुपए का हैट।
महिला साथियों ने छाँट-छाँट कर, देख-देख कर तमाम सामान ख़रीदे। तसल्ली होने पर ही। हमने पहले तो सोचा कि क्या करेंगे ख़रीदकर। सब बेकार। कोई जरूरी थोड़ी है कुछ लेना, ले जाना। लेकिन दुकान के पास जाने पर कुछ ईयर रिंग और माला ले लिए। इसके बाद हैट भी पसंद आया तो वो भी ले लिये। हैट खूबसूरत लग रहे थे। कीमत डेढ़ सौ होने के कारण और ख़ूबसूरत लगे। दो हैट लेने के बाद सोचा कि और ले लिए जाएँ। लेकिन तब तक ख़त्म हो गए थे। हमें अगले दिन भी रुकना था तो कुछ और हैट का आर्डर दे दिया।
सामान खरीदने के बाद पास की दुकान पर चाय पीने गए। काउंटर पर चाय देने वाली बच्ची से चाय पीते हुए बात की। उसकी पढ़ाई लिखाई के बारे में पूछा। उसने बताया कि वह नवोदय विद्यालय में पढ़ती है। हाई स्कूल में। छुट्टियों में घर आई है। पिता की चाय की दुकान है। इसलिए चाय की दुकान पर सहायता के लिए आ गई। नाम बताया उसने सादिया।
सादिया के पापा और उसका भाई भी दुकान में थे। मुझे लगा भाई छोटा होगा। लेकिन उसने बताया कि भाई बड़ा है। ग्याहरवीं में पढ़ता है।
नवोदय विद्यालय में बच्चे हॉस्टल में रहते हैं। कंप्टीशन से सेलेक्ट होते हैं बच्चे। हमारे कई दोस्त नवोदय स्कूल के पढ़े हैं। मतलब पढ़ने में अच्छी होगी सादिया। मुझसे बात करते हुए मोबाइल पर अपने दोस्तों से चैटिंग भी करती जा रही थी सादिया। पूछने पर बताया कि स्कूल के दोस्तों का ग्रुप है। उसी में मेसिजिंग हो रही है।
हमारे बारे में पूछने पर हमने अपना नाम बताया तो बोली -"हमारे स्कूल में कई टीचर शुक्ला हैं।" उसने यह भी कहा -" शुक्ला, मिश्रा वगैरह उधर के ही होते हैं।" अपने प्रिंसिपल के बारे में बताया " त्रिवेदी हैं।" मतलब ट्रांसफर पर गए होंगे। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के होंगे। लक्षद्वीप में ड्यूटी कर रहे हैं। जहाँ हम गए मजे के लिए वहाँ से वापस आने के वे छटपटा रहे होंगे।
सादिया अंग्रेजी में बात कर रही थी। टूटी-फूटी हिंदी भी जानती थी। लेकिन बात अंग्रेजी में ही हुई। हमको लगा जब हम हाईस्कूल में थे तब हमारी अंग्रेजी कितनी टूटी-फूटी , लड़खड़ाती हुई थी। जबकि यह बच्ची सहजता से बतिया रही थी।
हमने सादिया का फ़ोटो लिया। उसको दिखाया तो खुश हो गई। बोली -'मुझे भेज दो।' मैंने उसके व्हॉट्सएप पर भेज दिया। भाई और पिता के साथ भी ली फोटो। काफ़ी देर तक बातचीत हुई उससे। अपने स्कूल, दोस्तों, अध्यापकों के बारे में बताती रही। चाय और दूसरे सामान भी बेचती रही। इसके बाद हम लौट आए।
यह दिन हमारे लक्षद्वीप ट्रिप का आख़िरी दिन था। अगले दिन अधिकांश लोगों को जाना था। रात को डिनर के बाद फिर समुद्र बीच पर बैठे। सभी ने अपनी अपनी यादें साझा कीं। ज्यादातर महिला साथियों ने अपने बच्चों के जन्म से जुड़ी यादों को अपने जीवन की यादगार घटना बताया। पुरुष साथियों की यादगार घटनाओं में उनकी पढ़ाई और कैरियर से जुड़ी यादें थीं।
अगले दिन सुबह नाश्ते के बाद लोग विदा होना शुरू हुए। विदा होने के पहले सबके साथ ग्रुप फ़ोटोग्राफ़ हुआ। इसके बाद पहली खेप में विदा होने वालों की वीडियो ग्राफी भी हुई। किरन शुक्ला जी सबसे गले मिलकर रोने की एक्टिंग करते हुए विदा हुई तो लोगों ने गाना -"बाबुल की दुआयें लेती जा, जा तुझ को सुखी संसार मिले।" (वीडियो लिंक टिप्पणी में)
ट्रिप के साथियों को विदा करने के बाद हम लोग वापस अपने कमरे में पहुँचे। आराम किया। हमको अगले दिन निकलना था। शाम को एक बार हमको फिर लैगन बीच जाना था। घूमने के अलावा हमको गिफ्ट आइटम भी लेने थे।
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