[आज परसाई जी की पुण्यतिथि के मौके पर परसाई जी का यह लेख पढ़ें- 'गर्दिश के दिन' । यह लेख परसाई जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर लिखे लेखों के संकलन आंखन देखी (प्रकाशक वाणी प्रकाशन ,नई दिल्ली)से लिया गया। इसका संपादन प्रसिद्ध लेखक स्व. कमला प्रसाद ने किया था।]
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Tuesday, August 10, 2021
गर्दिश के दिन -परसाई
Sunday, August 01, 2021
जगदीश्वर चतुर्वेदी जी से बातचीत
आज पहली बार आदरणीय जगदीश्वर चतुर्वेदी जी से बात हुई। लम्बी बातचीत। पहली बार बात होने के बावजूद ऐसा नहीं लगा नहीं कि पहली बार बात हो रही है। सहज रूप में बातचीत के दरम्यान बहुत सारी रोचक जानकारियां हासिल हुई। उनके गुरु नामवर जी पर भी बातचीत हुई। उसी सिलसिले में मेरे अनुरोध पर जगदीश्वर चतुर्वेदी जी ने अपने गुरु नामवर जी पर बात करना स्वीकार किया । आभार इस बातचीत के लिए।
बातचीत की कड़ी: https://www.youtube.com/watch?v=ikJbkaOZVkc
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Tuesday, July 27, 2021
नेता का चरित्र जनता की मौत से बनता है
नेता का चरित्र जनता की मौत से बनता है। जनता जितना अंधेरा देगी, नेता उतना ही चमक सकेगा।
भय अफवाह से चलता है
भय नहीं, भय अफवाह से चलता है, राजनीतिज्ञों का जीवन। राजनेता के लिए उगाया गया भय उसके चरित्र को चासनी देता है। उसमें चमक आती है। इस सारे प्रबन्ध के पीछे सुरक्षा से अधिक विज्ञापन का ध्यान रहता है। यह एक ऐसा ब्योरा है जो साधारण आदमी को अपनी ओर खींचता है। पंजों पर खड़े होकर , कामधाम छोड़कर रास्ते की बाड़ से गर्दन उचकाने का मौका देता है।
Thursday, July 22, 2021
दुनिया में पैसे के सब साथी होते हैं
Monday, July 19, 2021
मजदूरों को कोरोना नहीं होता
Saturday, July 17, 2021
तकनीक के सहारे विकास कितना आसान काम है
काउंटर पर लिखा था -'फोटोकॉपी डाउनलोडिंग होती है।' हमको लगा है कि समाज आदमी के पतन से बेकार-बेफालतू हलकान है। हमको समझना चाहिए कि समाज, आदमी पतित नहीं हो रहा है। वास्तव में वह डाउनलोड हो रहा है। तकनीक का समाज के विकास में योगदान किया जाना चाहिए। आदमी को पतित नहीं डाउनलोड होता बताया जाना चाहिए। पतन से लगता है कुछ गड़बड़ हो रहा है। डाउनलोड होने से उन्नति का एहसास होता है। एक बार फिर लगा कि तकनीक के सहारे विकास कितना आसान काम है।
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Tuesday, July 13, 2021
आज मजहब भी पूंजीपतियों ने पूंजी के बल पर अपने अधीन कर लिया है
वास्तविकता यह है कि आज मजहब भी पूंजीपतियों ने पूंजी के बल पर अपने अधीन कर लिया है। ऐसे में ईश्वर का सच्चा धर्म शेष नहीं रहता। सच्चा ईश्वरीय धर्म तो प्राणियों की सेवा, प्रेम, मोहब्बत, इंसाफ वफादारी और ईमानदारी है। उसमें ईश्वर के प्राणियों का हित और लाभ है। यह आज आप जो कुछ देख रहे हैं, यह पूंजीपतियों ने केवल अपने उद्देश्य पूरे करने के लिए धर्म के नाम पर एक खेल बनाया है। यह वर्तमान मजहब तो मात्र कुछ लोगों के ऐशो आराम के लिए है। ईश्वर के प्राणियों के आराम के लिए नहीं है। जब धर्म स्वार्थी लोगों के हाथों में चला जाता है तो यही हाल होता है। कुरान तो यह कहती है कि मुसलमान वही है जिसे कुर्रान पर विश्वास हो और इससे पहले जो किताबें ईश्वर की ओर से आई हैं उन पर भी। हम नहीं समझते कि दुनिया में धर्म के नाम पर ये झगड़े और लड़ाई क्यों और कैसे पैदा हुई?
Monday, July 12, 2021
लोगों की दुआयें और मन का सुकून असली कमाई है
Sunday, July 11, 2021
सीट रिजर्व है
Saturday, July 10, 2021
अंधकार निरोधक अध्यादेश
कल सुबह टहलने निकले। बहुत दिनों के बाद। सड़क पर चलता पहला इंसान ऊंघता हुआ दिखा। बेमन से टहलता। चेहरे पर उबासी लादे चलता। फुटपाथ की ठोकर से सहम कर चौकन्ना हो गया। ठोकरें हमको चौकन्ना बनाती हैं, सावधान करती हैं।
Monday, July 05, 2021
हमको छोटी-छोटी खुशियों का आनंद उठाना सीखना चाहिए
हमको छोटी-छोटी खुशियों का आनंद उठाना सीखना चाहिए।
इंसान और प्रेम
इंसान के व्यक्तित्व का एक हिस्सा होता है जो हमेशा प्रेम को अस्वीकार करता है। यह वह हिस्सा होता है जो नष्ट होना चाहता है। ऐसे हिस्से को हमेशा अनदेखा/माफ किया जाना चाहिए।
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Sunday, July 04, 2021
प्यार के बगैर दुनिया मौत की तरह सूनी है
*इंसान को मुसीबतजदा लोगों की तरफ से जरूर लड़ना चाहिए, लेकिन अगर वह लड़ाई के सिवा हर चीज में दिलचस्पी लेना बंद कर दे तो लड़ाई का क्या फायदा?
हारा वही जो लड़ा नहीं
"कोई लक्ष्य
Friday, July 02, 2021
जहां-जहां उपस्थित हो तुम
जहां-जहां उपस्थित हो तुम ,
