दूर से अपना घर देखना चाहिए
मजबूरी में न लौट सकने वाली दूरी से अपना घर
कभी लौट सकेंगे की पूरी आशा में
सात समुंदर पार चले जाना चाहिए
जाते-जाते पलटकर देखना चाहिए।
विनोद कुमार शुक्ल जी की कविता की तर्ज पर शहर से बाहर गए लोग दूर से अपना शहर देखते हैं। अपने शहर से बाहर बस गए लोगों के ज़ेहन में उनका वह शहर ज़िंदा रहता जो कभी उन्होंने देखा है। शहर में बिताए समय की यादों की रोशनी में वे अपने शहर को देखते हैं। उनकी यादों में बीस-पचीस-तीस या उससे भी पुराना शहर धड़कता है । भले ही इस बीच शहर कितना ही बदल गया हो।
बीते शनिवार को कानपुर से बाहर बस गए तीन कनपुरियों ने कानपुर को याद किया। Shambhunath Shukla जी का बचपन, युवावस्था और नौकरी के दौरान लंबा समय कानपुर में बिताने के बाद अब गाजियाबाद रहते हैं, Atul Arora का बचपन में कानपुर में गुजरा ,पढ़ाई HBTI में करने के बाद पिछली सदी के आख़िरी दिनों के Y2K की आँधी के समय पके आम की तरह की तरह अमेरिका की गोद में आकर गिरे। दोनों लोगों ने कानपुर से जुड़े किस्सों को याद किया। सवाल अतुल अरोरा के थे। उनके जबाब देते हुए शंभूनाथ शुक्ल जी कानपुर के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उनके साथ फ़िलर के रूप में अनूप शुक्ल भी थे जिनका बचपन और नौकरी के समय का बड़ा हिस्सा कानपुर से जुड़ा रहा।
बातचीत के दौरान यादों के थान के थान खुले। कानपुर से जुड़े लोगों के नाम फ़्लैश की तरह चमकते रहे। कानपुर से जुड़े लोगों की चर्चा के बहाने विशम्भर नाथ कौशिक, गिरिराज किशोर, श्रीनाथ अरोरा, प्रियंवद, Krishna Bihari , अमरीक सिंह दीप , Govind Upadhyay , राजू श्रीवास्तव , मृदुल कपिल, Sanjiv Mishra , अन्नू अवस्थी, Kapil Kanpuriya, Anoop Shukla आदि का जिक्र हुआ।
Anoop Shukla का जिक्र करते हुए उनसे अपेक्षा की गई कि वे कानपुर से जुड़े किस्सों को Rajesh Vikrant जी की 'आमची मुंबई' की तर्ज पर व्यवस्थित करके छपायें।
कानपुर की भाषा और साहित्य के बहाने कानपुर की हुई इस बातचीत को आप अतुल अरोरा के यू ट्यूब चैनल @Rojnamcha में पहुंचकर सुन सकते हैं। वीडियो का लिंक टिप्पणी में दिया है। अतुल अरोरा की पोस्ट (https://www.facebook.com/share/p/1TKnSktGV2/) पर पहुँचकर भी आप कनपुरिया भौकाल देख-सुन सकते हैं। वीडियो में कानपुर का सिग्नेचर लोकगीत भी सुन सकते हैं :
"कानपुर कनकैया
जंह पर बहती गंगा मइया
ऊपर चलै रेल का पहिया
नीचे बहती गंगा मइया
चना जोर गरम...... "
करीब घंटे भर की बातचीत को अतुल अरोरा ने अपनी मेहनत से संवार कर 47 मिनट में अपनत्व की आक्सीजन के रूप में पेश किया है। देखिए वीडियो और बताइए अपनी राय कि इस सिलसिले में क्या कुछ जोड़ा जा सकता है।
https://www.facebook.com/share/p/186kAViMwa/

No comments:
Post a Comment