Saturday, January 24, 2026

काजीरंगा की तरफ़


 गोवाहाटी से काजीरंगा सुबह चाय पीकर निकल लिए थे। रास्ते में गाड़ी में तेल भराया तो पेट का ईंधन भरवाने की भी याद आई। एक जगह रास्ते में ढाबा दिखा तो नाश्ते के लिए रुके।

ढाबे में पूड़ी सब्जी का नाश्ता किया। भटूरे जैसी मुलायम पूड़ी। आलू की रसेदार सब्जी। अचार। तीन पूड़ी चाँप गए। चाय भी पी। साथ में बिसलरी पानी की बोतल। सब मिलाकर दो लोगों के नाश्ते के दो सौ रुपये हुए।
ढाबा चलाने वाले एक ही परिवार के लोग हैं। महिलायें पूड़ी सब्जी और दूसरे नाश्ते बना रही हैं। पुरुष लोग चाय और समर्थक नाश्ते। लोग प्लेट और चाय खुल ले के रहे हैं। कुछ लोगों को महिलायें सर्व भी कर रही हैं। धूप में बैठकर नाश्ता करना और भी स्वादिष्ट अनुभव रहा।
ढाबे ने नाश्ता करने वालों में तीन बाइकर भी मिले। गुवाहाटी से म्यांमार जा रहे हैं बाइक पर। म्यांमार बार्डर ढाबे से करीब एक हज़ार किलोमीटर दूर है। तीन लोगों में से एक राज से बात की तो उन्होंने बताया कि एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। अक्सर समय निकालकर यात्राएँ करते रहते हैं। कई वर्षों से ऐसा कर रहे हैं। उनका दोस्त भी प्राइवेट जॉब करता है। साथ में म्यांमार बार्डर तक जा रहा है।
उनके साथ एक महिला बाइकर भी है। स्कूटी पर। हिना नाश्ता करने के बाद हेलमेट पहनकर चलने के लिए तैयार थीं। बात की तो पता चला कि वो दस साल से यात्राएँ कर रही हैं। पेशे से फिजियोथेरापिस्ट हैं। दोस्तों के साथ म्यांमार जा रही हैं।
हमने कहा -‘ तुम फ़िजियो हो ये अच्छा है। कहीं टीम में किसी को चोट लगी तो एजसरसाइज करा कर ठीक कर दोगी।’
हिना ने हंसते हुए स्कूटी स्टार्ट की और साथियों के साथ आगे बढ़ गईं।
अपन भी काजीरंगा की तरफ़ बढ़ लिए।

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