अमेरिका में उद्योगपतियों का एक गुट सड़क पर किसी आदमी को पकड़ता है,उसे व्हाइट हाउस ले जाता है और देशवासियों से कहता है-यह तुम्हारा राष्ट्रपति है।
-विल्सन (भूतपूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति)
साल भर पहले पकड़कर लाए गया आदमी, अमेरिका का वर्तमान राष्ट्रपति , अमेरिकी उद्योगपतियों की मंशा के अनुरूप वेनेजुएला के राष्ट्रपति को पकड़कर अमेरिका ले आया। उसको अमेरिका की उस जेल में रख दिया जो अपनी ख़राब हालत, कैदियों के बीच हिंसा और बार-बार बिजली गुल होने जैसी समस्यायों के लिए जानी जाती हैं।
वेनेजुएला के राष्ट्रपति मुदारो की हथकड़ी लगी हुई फ़ोटो शायद वेनेजुएला के उन लोगों को भी अच्छी नहीं लगी होगी जो मुदारो को नापसंद करते होंगे। यह हथकड़ी एक आदमी के हाथ में नहीं, एक देश के राष्ट्रपति के हाथ में हैं जिसे दूसरे देश ने सोते से उठाकर अपहरण किया।
राष्ट्रपति ट्रम्प 'अब और युद्ध नहीं'(No more wars) के नारे के रथ पर बैठकर चुनाव जीते थे। कहा था राष्ट्रपति बनते ही रूस-यूक्रेन युद्ध रुकवा देंगे। इजरायल-फ़िलिस्तीन समस्या निपटा देंगे। दोनों जगह लोग अभी तक मारे जा रहे हैं। इस बीच भारत-पाकिस्तान और कई और देशों के बीच युद्ध रुकवाने का दावा करते हुए अपने लिए 'नोबल शांति पुरस्कार' माँग चुके हैं। लेकिन 2025 का नोबल शांति पुरस्कार वेनेजुएला की Maria Corina Machado को मिल गया। लगता है इसी से भन्नाये हुए ट्रम्प ने वहाँ के राष्ट्रपति को उठवा लिए।
कल अमेरिकन अख़बार 'वासिंगटन पोस्ट' में इस बारे में कई ख़बरें पढ़ीं। कई लोगों ने यह माना कि अमेरिका का यह एक्शन अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है। लेकिन अमेरिकी कानूनों के अनुसार अमेरिकी अदालतों में मुक़दमा चलाने और सजा देने कोई बाधा नहीं है।
कुछ लोगों ने यह भी कहा है कि अमेरिका के इस एक्शन के बाद अमेरिका किस मुँह से चीन को ताइवान और रूस को यूक्रेन पर कब्जा करने से रोकने का तर्क लायेगा।
ट्रम्प के अनुसार अमेरिका कुछ दिन वेनेजुएला में सीधे व्यवस्था देखेगा। बाद में कोई ऐसी सरकार बनवायेगा जो वेनेजुएला के लोगों का भला कर सके। फ़िलहाल वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोडीग्रेज को अंतरिम राष्ट्रपति बनाया गया है। डेल्सी रोडीग्रेज को वेनेजुएला के राष्ट्रपति 'शेरनी' कहा करते थे। अमेरिका द्वारा अपहृत राष्ट्रपति की 'शेरनी' पर ट्रम्प ने भरोसा जताते हुए कहा है -'वह बहुत विनम्र हैं।' इन बयानों को जोड़कर कोई कह सकता है -'शेरनियां विनम्र होती हैं।'
विपक्षी नेता और नोबल शांति पुरस्कार प्राप्त नेता कोरिना मचाडो के बारे में ट्रम्प ने कहा -'उनके पास देश चलाने के लिए आवश्यक समर्थन नहीं है।' वासिंगटन पोस्ट के संपादकीय ने अमेरिकी कार्यवाही का समर्थन किया लेकिन कोरिना मचाडो की जगह डेल्सी रोडीग्रेज को अंतरिम राष्ट्रपति बनवाने के निर्णय की आलोचना करते हुए लिखा -Trump fires from his hips (ट्रंप अपने कूल्हे से गोली चलाते हैं)।
ट्रम्प ने मादुरो के अपहरण के पीछे उनके ड्रग तस्करी में सहयोग करने और उससे पैसा कमाने और उस पैसे से वेनेजुएला पर अवैध कब्जा करने को कारण बताया है। लेकिन कमला हैरिस समेत दुनिया के तमाम लोगों का मानना है -'नशे की बात तो बहाना है, असली मकसद तेल पर कब्जा जमाना है।'
पहले दबे छुपे होता होगा लेकिन अब यह बात साफ़ हो गई है कि विकसित देशों की उन्नति लूटपाट, छल, कपट पर आधारित है। अमेरिका को यूक्रेन से खनिज चाहिए, वेनेजुएला से तेल, भारत में मार्केट। लूटपाट और पिंडारी हरकतों पर ही अमेरिका की संपन्नता का कंगूरा टिका है।
नेताओं के बयान तो अपने-अपने दलों के हिसाब से होते हैं। लेकिन पिछले 20-22 दिसंबर को हुए एक सर्वे में 52 प्रतिशत लोगों ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को हटाने के लिए मिलिटरी कार्यवाही का विरोध किया था। 22 प्रतिशत लोगों ने समर्थन किया था। जबकि 26 प्रतिशत लोगों ने कोई राय नहीं जाहिर की थी।
वेनेजुएला में अमेरिकी क़ब्ज़े के बाद अमेरिकन तेल लॉबी खुश हो गई होंगी। उनके चुने आदमी ने उनके हिसाब से काम किया। दुनिया का 18 प्रतिशत तेल वेनेजुएला में है। भारत की रिफायनरी के अनुसार भी सबसे सस्ता और अच्छा तेल वेनेजुएला का है। वहाँ पर अमेरिकी कब्जे के बाद तेल के दाम उछलेंगे। हमारे यहाँ मंहगाई बढ़ेगी। रूस से तेल पहले ही आना कम हो गया है। अपने देश की परेशानियां बढ़ेंगी। बवाल बढ़ेंगे।
इजरायल द्वारा फ़िलिस्तीन के गाजा में तबाही के बाद ट्रम्प की योजना वहाँ के लोगों को विस्थापित करके वहाँ इमारतों का मलवा हटाकर फिर से नई इमारतें बनवाकर उनमें फ़िलिस्तीन के लोगों को फिर से बसाने की थी (है)। मतलब अमेरिका की निर्माण कंपनियों के लिए कमाई का अवसर पैदा करने का इंतजाम है गाजा के लाखों लोगों की तबाही।
दुनिया के तमाम देशों में लोकतंत्र बहुराष्ट्रीय कंपनियों और पूंजीपतियों के मर्जी के मुताबिक लूटने का जरिया बन गया है। कॉर्पोरेट का समर्थन से कोई आदमी सत्ता हासिल करता है फिर अपने मालिकों के फ़ायदे के लिए काम करता है। कॉर्पोरेट अपने उस आदमी की इमेज बनाता है जिससे वह उस देश के लिए अपरिहार्य हो जाता है। उस देश की जनता बाँगड़ुओं की तरह लुटती, पिटती रहती है। कार्पोरेट्स द्वारा पकड़कर लाए जमूरों को झेलती रहती है।
कुछ लोगों का मानना है -" 'एपस्टीन फाइल्स' में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण में ट्रम्प के खिलाफ पक्के प्रमाण हैं और उन्हीं के आधार पर ट्रम्प डीप स्टेट द्वारा ब्लैकमेल होकर पूरी तरह उसके बंधक बन चुके हैं।" मतलब दुनिया के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्रपति को भी धमकी दी गई होगी -" वेनेजुएला के राष्ट्रपति को उठवाओ वरना तुम्हारी करतूतें जाहिर कर दी जायेंगी।" बेचारे ट्रंप ने मजबूरी में कहा होगा -"उठा लाओ भाई मादुरो को।कुछ दिन यह नाटक भी चले। "
पता नहीं सच क्या है लेकिन यह सब देखकर लगता है कि पूरी दुनिया चंद लोगों की सनक का शिकार है। सत्ता में बैठे लोगों के हाथों में असीमित अधिकार दुनिया का सबसे बड़ा खतरा है। एक आदमी की सनक पूरे देश और दुनिया को बर्बाद कर सकती है। कभी दुनिया के लिए गेंहू का सबसे बड़ा निर्यातक देश रहा यूक्रेन आज बर्बादी के कगार पर बैठा है। दुनिया में लोकतंत्र सबसे बड़ा हिमायती देश आज दुनिया में अपहरण करके फिरौती मांगने जैसे काम में जुटा है।
जिन लोगों के हाथों में ताक़त है वे दुनिया के लिए बड़ा खतरा हैं। यह बात फिर याद आती है :
"दुनिया का आधा नुक़सान उन लोगों के चलते होता है जो अपने को ख़ास समझते हैं।"( Half of the harm in the world is done by the people who think that they are imporatant)
इस बीच ट्रम्प ने फिर एक बयान जारी करते हुए कहा है -"मैंने वेनेजुएला पर कब्जा करके राष्ट्रपति को उठाया। पूरा विश्व अमेरिका की ताक़त देख रहा है।(मैंने ही भारत पाक युद्ध रोका। दोनों देश मुझसे डरते हैं)। भारत में अब इंदिरा गांधी जैसे निडर शासक नहीं हैं। मनमोहन सिंह के बाद 12 साल में भारत में प्रेस कान्फेंस भी नहीं होती।"
BBC के हवाले से प्रसारित इस बयान को पढ़कर लगता है अमेरिका कॉर्पोरेट का यह आदमी कुछ भी कहता रहता है। भारत के प्रधानमंत्री का यह कैसा दोस्त है जो भारत की खिल्ली उड़ाने वाले बयान जारी करता रहता है।
ट्रंप के चार साल के कार्यकाल का अभी एक साल ही हुआ है। साल भर में ही दुनिया में इतनी उथल-पुथल मचा दी। आगे के तीन साल क्या होगा इसका अनुमान लगना मुश्किल है और बेकार भी। पता नहीं बड़े-बड़े लोग क्या प्लान कर रहे हों। डीप स्टेट क्या तय कर रहा हो। हमारे हाथ में आम इंसान की तरह दुनिया में घर रही घटनाओं पर चकित होना, अफ़सोस करना और कभी-कभी ख़ुश होना ही बचा है।
आज दुनिया में ताकतवर देशों/लोगों की हरकतें देखकर नंदन जी की कविता 'समय और हम' का यह अंश याद आता है:
"शताब्दियाँ
होकर रह जाती हैं
इतिहास की तहरीर
और इतिहास
खंडहरो में बदल जाते हैं
सोते रहते हैं दस्तावेज
शताब्दियों के सीने पर पसरे हुए
और उसी सीने से
सभ्यताओं के
जनाजे निकल जाते हैं।"
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