अमेरिका में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के विरोध और धमकी के बावजूद न्यूयार्क के मेयर का चुनाव युवा ममदानी ने जीता । सूचनाओं के अनुसार अमेरिका का कारपोरेट भी ममदानी के खिलाफ था । ट्रम्प अपने भाषणों में ममदानी के मुस्लिम होने और और उनके कम्युनिष्ट सोच का होने की बात कहकर उनकी खिल्ली उड़ाते थे, विरोध करते थे। उन्होंने यहाँ तक धमकी दी थी कि अगर ममदानी न्यूयार्क के मेयर बने तो वो न्यूयार्क की ग्रांट कम करेगें। इसके बावजूद ममदानी जीते।
अपनी जीत के बाद दिए भाषण में ममदानी ने इसे अप्रवासियो की जीत बताया, न्यूयार्क में रहने वाले कामगारों की जीत बताया। आमलोगों की जीत बताया। न्यूयार्क में रहने वाले लोगों की परेशानियों की चर्चा करते हुए उनके जीवन को बेहतर बताने के लिए कोशिश करने की बात कही। अपने भाषण के लगभग दो तिहाई हिस्से पर ममदानी ने कहा :
"I am young, despite my best efforts to grow older. I am Muslim. I am a democratic socialist. And most damning of all, I refuse to apologize for any of this."
"मैं जवान हूँ, भले ही मैं बूढ़ा होने की लाख कोशिश करूँ। मैं मुसलमान हूँ। मैं एक लोकतांत्रिक समाजवादी हूँ। और सबसे बुरी बात यह है कि मैं इनमें से किसी के लिए भी माफ़ी मांगने से इनकार करता हूँ।"
ममदानी के भाषण का यह अंश ट्रम्प के उन बयानों का जवाब था जिसमें ट्रम्प ने उनके मुस्लिम और समाजवादी होने की बात कहते हुए उनको वोट न देने का आह्वान किया था।
मामदानी की जीत पर कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा कि उनको अपने आप को मुस्लिम नहीं कहना चाहना था। अमेरिकन कहना चाहिए था। कुछ लोगों ने अपने स्टेट्स में कुछ न लिखते आँसू (ख़ुशी के या दुःख के कहना मुश्किल) भी छलकाये।
हो सकता है कि ममदानी असफल हों, जो वायदे उन्होंने किए उनको पूरा न कर पायें, उनका कोई लफड़ा निकल आए। लेकिन उनकी शानदार स्पीच में उनकी स्वीकारोक्ति को उनकी संकीर्णता के रूप में प्रचारित करना लोगों की संकुचित, पक्षपाती और संकीर्णता की परिचायक है।
टिप्पणी में ममदानी का पूरा भाषण (वीडियो और टेक्स्ट) तथा रवीश कुमार की टिप्पणी दी है। भाषण शायद बिना टेलीप्रोम्पटर के दिया गया है। सुनने लायक है।

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