Tuesday, November 11, 2025

अवस्थी पराठा भंडार

 





सबेरे HAL के सामने वाली सड़क से मुख्य सड़क पर आए। बायीं तरफ़ इंदिरा नगर मेट्रो स्टेशन दायीं तरफ़ भूतनाथ मेट्रो स्टेशन। भूतनाथ की तरफ़ चल दिए। सोचा कि कुछ पैसे बचेंगे।

सड़क किनारे ही एक ठेलिया पर लिखा देखा -‘अवस्थी पराठा भंडार।’ लोग खड़े होकर पराठे खा रहे थे। मन किया हम भी खा लें लेकिन याद आया नाश्ता करके निकले हैं। नहीं खाये। आगे ही ‘अली बाइक प्वाइंट’ भी मिला। सोचा, अब बाइक तो चलाते नहीं। आगे बढ़ गए।
आगे एक ठेलिया पर बाटी चोखा बिकता दिखा। फिर मन किया खाया जाये। लेकिन एक ही बहाना बनाना ठीक नहीं इसलिए इस बार बहाना बनाया -‘ देर हो जाएगी।’
भूतनाथ स्टेशन पर एस्केलेटर बंद थे। महिला सुरक्षा गार्ड ने बताया -‘अभी तो चल रही थी।’ मुझे लगा -‘ बिजली बचत का जुगाड़ है।’
प्लेटफार्म पर एक सफाई करनी महिला हाथ में लंबी बांस वाली झाड़ू पकड़े बैठी स्मार्ट फ़ोन पर बतिया रही थी। झाड़ू का डंडा उसके सर के कई फुट ऊपर था। हमने फ़ोटो लेने के लिए उससे पूछा तो उसने मोबाइल हिलाते हुए मना कर दिया। हम मान गए। सुरक्षा गार्ड महिला ने बताया -‘ इनको मोबाइल लाना एलाउड है। हमको अनुमति नहीं है।’ आगे कुछ बात करते तब तक मेट्रो आ गई।
ट्रांसपोर्ट नगर उतरे तो पता चल भूतनाथ से और इंदिरा नगर से यहाँ का किराया एक ही है। बेकार एक किलोमीटर आगे आए।
ऑटो बुक किया तो फ़ौरन उसने पहुँच जाने का मेसेज लगा दिया। इसके बाद ‘कैप्टन इंतज़ार कर रहे हैं ' का मेसेज आने लगा। मतलब देर करने पर हमारा पैसा कटेगा। तीन मिनट बात ऑटो में बैठने पर उसको हिंदी में हड़काए -‘ इतनी स्मार्टनेस काहे को दिखाते हो कि सवारी तक पहुँचने के पहले ही पहुँचने की घोषणा कर दिए।’ बेचारा कुछ बोला नहीं।
हम भी कुछ बोले नहीं। चुपचाप बढ़े हुए तीन रुपये सहित किराया दे दिए। साथ में सलाह भी -‘ ऐसी हरकत मत किया करो।’ उसने बिना हील हुज्जत के मेरी सलाह ग्रहण कर ली। नमस्ते करके चला गया।
दिन भर काम कराने के बाद वापस लौटते हुए मेट्रो खाली ही दिखी। रास्ते में एक सार्वजनिक सुलभ शौचालय पर लिखा दिखा -‘मानव मल्ल पर आधारित बायो गैस प्लांट।’ ‘मल’ की जगह ‘मल्ल’ गलती से लिखा गया या जानबूझकर ताकि हर जगह युद्ध का स्कोप बना रहे। सुबह की 'शुक्ला' और 'शुक्ल' वाली पोस्ट पर राय देने वाले Suresh Pant जी , Pradeep Sharma जी और दूसरे मित्र जी बतायें।
सुबह से शाम तक मैट्रो , ऑटो वाले , प्लंबर , कारपेंटर, पुताई करने वाले , चाय वाले, फल वाले , फ़ोटो कॉपी वाले , मेडिकल स्टोर वाले से बातचीत के दौरान कहीं किसी ने दिल्ली ब्लास्ट, बिहार की चर्चा नहीं की । किसी ने यह भी नहीं कहा कि माननीय प्रधामंत्री जी की भूटान यात्रा का किसी ठेके से कोई मतलब है।
हमको लगा वास्तविक दुनिया फेसबुक की दुनिया के मुक़ाबले ज़्यादा सुकून देह है।

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