Sunday, November 02, 2025

मेट्रो में सेल्फी



 मेट्रो में बगल की सीट पर बैठी बच्ची अपने परिवार के साथ सेल्फी ले रही थी। परिवार में बच्ची के साथ दो महिलाएं और एक पुरुष था। बच्ची और महिलाएं आपस में बतिया रहीं थीं। पुरुष मुँह सामने किए चुपचाप बैठा था। सेल्फी लेते समय भी उसका कड़क सा चेहरा भावहीन था। ऐसा लगा कोई लफ्फ़ाज़ आदमी किसी मीटिंग में गंभीरता का आवरण ओढ़कर बैठा हुआ है। उसको देखकर हमें जिनकी याद आई उनके बारे में हम कुछ कहेंगे नहीं।

बच्ची सेल्फी लेकर देख रही थी। बगल में बैठी महिलाओं को दिखा रही थी। कई सेल्फी के बाद हमने उससे कहा -' थोड़ा मुस्कराओ भी सेल्फी लेते हुए। इतना गंभीर मुँह बनाकर थोड़ी सेल्फी ली जाती है।'
सुनकर बच्ची ज़ोर से मुस्काई। फिर मुस्कान को थोड़ा सीमित करके मुस्कराते हुए सेल्फी ली। मोबाइल देखकर मुस्कराई। जरूर इस बार पहले से बेहतर आई होगी सेल्फी।
बच्ची के बगल में बैठी महिला के बाँह में नीले रंग के टैटू से लिखा था -" घई लाल सिंह की औरत।" मतलब वह महिला घई लाल की पत्नी थी।
इस तरह का टैटू पहलू बार देखा था। बचपन से महिला का नाम कुछ रहा होगा। लेकिन शादी होने के बाद अब वह सिर्फ़ 'घई लाल सिंह की औरत' बन कर रह गई।
हमने पूछा -" घई लाल ने भी तुम्हारा नाम अपने बाँह में गुदाया है क्या इस तरह ?" महिला ने बगल में बैठे आदमी की तरफ़ मुस्कराते हुए देखा। उसकी मुस्कान का मतलब था कि इस बात का जवाब तो ये देंगे। उस आदमी का नाम घई लाल था।
हमने उस आदमी से भी पूछा -"तुमने नहीं लिखवाया इनका नाम अपनी बांह पर?"
आदमी ने अपनी मुस्कान पर बंदिश लगाते हुए शातिर अंदाज में कहा -" लिखवायेंगे।" कब लिखवायेंगे यह उसने नहीं बताया।
महिला ने बताया कि उसकी शादी बीस साल पहले हुई थी। तबसे उसकी बाँह पर यह टैटू खुदा है। उसका पति बिना टैटू के घूम रहा है। पत्नी पति की है लेकिन पति पत्नी का नहीं है। पत्नी पति के नाम के खूंटे से बंधी है लेकिन पति छुट्टा घूम रहा है। समाज में आदमी-औरत की स्थिति का एक परिचायक।
मन किया कि उस महिला के हाथ के टैटू का फ़ोटो लें। लेकिन लिया नहीं।
दूसरी बगल में दो बच्चियाँ भी बैठी सेल्फी ले रहीं थीं। दस-बारह साल की होंगी बच्चियाँ। उनमें से एक बच्ची अपनी आँखों के आगे अपनी दो अंगुलियों को V के आकार में लिटाकर फ़ोटो ले रही थी। हमने उससे पूछा -"इस तरह सेल्फी लेने से चेहरा तो छिपा जाएगा। फोटो पहचान में नहीं आयेगा। क्या फ़ायदा इस तरह सेल्फी लेने का?"
"आजकल इसी तरह सेल्फी लेने का ट्रेंड है" - बच्ची ने बताया।
"यह कैसे पता चलता है कि आजकल इस तरह के फ़ोटो लेने का ट्रेंड है? "- मैंने पूछा।
" ट्रेंड पता चल जाता है। किसी स्टाइल की फ़ोटो वायरल हो जाती है तो वही ट्रेंड बन जाता है।" -बच्ची ने बताया ।
यह ज्ञान पाकर हमने बच्ची से कहा -"अच्छा दिखाओ फ़ोटो कैसी आई तुम्हारे नए ट्रेंड के अंदाज़ में फ़ोटो खिंचाते हुए।"
"मोबाइल में स्पेस नहीं था तो फ़ोटो सेव नहीं हो पाया। डिलीट हो गया।" -बच्ची ने कहा।
शायद बच्ची अपनी फ़ोटो दिखाना नहीं चाहती होगी। मेरी समझ में मोबाइल में स्पेस नहीं होगा तो फ़ोटो खिंचेगी ही नही। थोड़ी देर बाद बच्चियाँ उठकर सामने वाली सीट पर बैठी अपनी मम्मी के पास जाकर बैठ गई।
हमने सोचा हम भी नए ट्रेंड के हिसाब से अपनी सेल्फी लेकर पोस्ट करें। लेकिन फिर लगा कि क्या पता इस बीच ट्रेंड बदल गया हो। ऐसे में पुराने ट्रेंड के हिसाब से सेल्फी लेने का क्या फ़ायदा?
हम कुछ और सोचें तब तक हमारा स्टेशन आ गया। हम अपना झोला उठाकर मेट्रो से बाहर आ गए।
घर पहुंचकर नेट में देखा कि आजकल सेल्फी का क्या ट्रेंड चल रहा है? पता चला आजकल 'मिरर सेल्फी का ट्रेंड' चलन में हैं। 'मिरर सेल्फी' मतलब शीशे के सामने खड़े होकर सेल्फी लेना। यह भी पता चला कि रूस की ग्रैंड डचेस अनास्तासिया निकोलायेवना , 13 वर्ष की उम्र , 1914 में, अपने एक मित्र को भेजने के लिए आईने का उपयोग करते हुए अपनी तस्वीर ली थी। तस्वीर के साथ भेजे गए पत्र में उन्होंने लिखा था, "मैंने दर्पण में देखते हुए अपनी यह तस्वीर ली है।"
हमने सोचा कि बताओ भला, 111 साल पहले शुरू किया हुआ चलन आज ट्रेंड में है। लेकिन बच्ची तो बता रही थी कि आजकल आँखों के आगे V का निशान बनाते हुए सेल्फी लेने का चलन है। हम समझ नहीं पा रहे हैं कि किसकी बात सही है?
आप बताओ क्या ट्रेंड चल रहा है आजकल?

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