Thursday, August 14, 2025

शम्भूनाथ शुक्ल जी से मुलाक़ात

 


कल Shambhunath Shukla जी से लगभग सात साल बाद मुलाक़ात हुई। पिछली बार मुलाकात कानपुर में Anoop Shukla के साथ हुई थी। उस मुलाक़ात का जिक्र करते हुए पोस्ट लिखी पोस्ट में शंभुनाथ जी के बारे लिखा था :

"प्रभाष जोशी जी के साथ जनसत्ता से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले शम्भूनाथ जी के पास पत्रकारिता से जुड़े अनगिनत अनुभव हैं, जानकारियों का खजाना है। सहज भाषा में अपनी बात कहने का बेमिशाल अनुभव है। उनके ' भक्तों' की बड़ी कतार उनके अनुभव सुनकर कृतार्थ होती है, उनकी झिड़कियां खाकर भी उनसे जुड़ी रहती है। फेसबुक को मौज मजे लेते हुए खुद को अभिव्यक्त करने का गजब का हुनर है शम्भूनाथ जी के पास।
शुक्ल जी ब्राह्मण होते हुए भी ब्राह्मणों को लगातार गरियाते रहते हैं इससे ब्राह्मणों की आत्मालोचना की बात प्रमाणित होती है।
राजनैतिक लेखन में शम्भूनाथ जी भोलेनाथ की तरह हर दल को गरियाते हैं और हर दल में संभावनाएं भी खोज लेते हैं। अपने किसी सीनियर की सलाह का जिक्र करते हुए कहा -'पत्रकार को पीएम, सीएम, डीएम और अपने इलाके के दरोगा की खिलाफ सीधे लिखने से बचना चाहिए।'
शम्भूनाथ जी अपने 'भक्तों' के मोहजाल में ऐसे फंसे रहते हैं कि अपने विपुल लेखन को किताब की शक्ल देने में देरी करते रहते हैं। कल उनसे तीन-चार चाय के दौरान यह वादा कराया गया कि वे जल्द ही अपने पत्रकारीय जीवन, संस्मरणों , कानपुर के इतिहास से जुड़ी किताबें फाइनल करेंगे। आशा है कि वे जल्द ही इस पर अमल कर पाएंगे।"
लगभग सात साल पहले लिखी पोस्ट को देखा कि शम्भूनाथ जी का किताब लिखने का वादा अभी भी अधूरा है। इस बीच उनका कनाडा का यात्रा संस्मरण भी जुड़ गया। 'कानपुर से कनाडा' यात्रा संस्मरण लिखना है। इस दौरान हर महीने बारह लेख जो वे टीवी9 में लिखते हैं उनको मिला लिया जाये तो पाँच-छह सौ लेख हो जाएँगे। उनको छाँट के कम से कम दो किताबें तो बन ही सकती हैं।
कल हुई मुलाक़ात में एक बार फिर से शंभुनाथ शुक्ल जी से तकादा किया किताबों के बारे में तो उन्होंने हामी भरी है इस पर काम करने की। सारा कुछ लिखा रखा है कंप्यूटर में। बस फ़ाइनल करना है। देखिए कब होता है। आशा है जल्दी ही होगा।
कल के मुलाक़ात के दौरान हम लोगों का भूटान भ्रमण का प्लान भी बना। देखिए कब प्लान पर अमल होता है। वाली असी साहब के शेर हैं न :
"मैं रोज मील के पत्थर शुमार (गिनती) करता था
मगर सफ़र न कभी एख़्तियार (शुरू)करता था।
तमाम काम अधूरे पड़े रहे मेरे
मैँ जिंदगी पे बहुत एतबार (भरोसा)करता था।"
लेकिन प्लान बनाया है तो क्या पता अमल भी हो जाये और किसी दिन शम्भूनाथ शुक्ल जी अनूप शुक्ल के साथ भूटान की किसी सड़क, किसी होटल, किसी पहाड़ी से फ़ोटो लगाते दिखें।

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