Thursday, August 07, 2025

टहलना भी एक काम है


 

किसी भी काम की तरह टहलना भी एक काम है। शुरुआत करने में हिचक होती है। एक बार शुरू हुए तो मामला चल निकलता है।

दो दिन ऐसा ही हुआ मेरे साथ। टहलने के बारे में सोचते ही रहे। लेकिन आज सोचे नहीं, सीधे निकल लिए। निकल लिए तो शुरू हो गया।
गेट के बाहर ही माँ-बेटी दिखे । बच्ची की स्कूल बस का इंतजार कर रहे थे दोनों। बच्ची बस्ता पीठ पर लादे जाने को तैयार। दोनों चुप थे। हम भी उनको देखते हुए चुपचाप आगे बढ़ गए।
सामने से एक लड़की तेजी से आती दिखी। देखकर लगा गुस्से में टहल रहे है। चेहरे के साइन बोर्ड पर गुस्से का विज्ञापन जैसा चस्पा था। जो टी शर्ट वह पहने हुए थे उस पर बोल्ड अक्षरों में लिखा था -SMILE . मतलब ख़ुद ग़ुस्से में रहते हुए सामने वाले से मुस्कराने का आह्वान।
दुनिया में यह चलन बढ़ता जा रहा है। जिस गुण की कमी होती है लोग उसका ही विज्ञापन करते हैं। कायर लोग इकट्ठा होकर सबसे तेज वीरता की हुंकार भरते हैं। ख़ुद डरे हुए लोग दूसरों को डराते हैं।
सड़क पर लोगों की आवाजाही बढ़ गई थी। लोग बिना आपस में बातचीत किए तेजी से आते-जाते, टहलते हुए दिख रहे थे। कल ही अमेरिका के राष्ट्रपति ने भारत पर 50% टैरिफ की घोषणा की। उसका किसी पर कोई फ़र्क़ पड़ता नहीं दिखा। कोई इस पर बात करता नहीं दिखा।
एक आदमी सड़क डिवाइडर पर देश-दुनिया से बेपरवाह बीड़ी फूँकता दिखा। पालीथीन की बोरी सर में सर के नीचे दबा कुछ सामान, केवल पैंट पहने बीड़ी का धुंआ उड़ाते हुए शायद इस बात मुजाहिरा कर रहा था -"ऐसे मुकाबला किया जाता है अमेरिकन टैरिफ का।" हर फ़िक्र को धुँए में उड़ाता चला गया वाले अंदाज में।
शास्त्री जी के प्रधानमंत्री रहते देश में अन्न की कमी थी तब शास्त्री जी ने आह्वान किया था देश के लोग सप्ताह में एक समय का भोजन छोड़ें। ख़ुद वे अमल भी करते थे। अपने देश को भी अमेरिकी सामानों पर दोगुना टैरिफ ठोंक देना चाहिए। लेकिन मसला टैरिफ के चलते अपने देश की चीजें अमेरिका में मंहगी होने का और उसके चलते देश का निर्यात कम होने का है। देश की बड़ी आबादी इससे प्रभावित होगी। इसके हल अर्थशास्त्री बतायेंगे।
जब तक कोई हल निकले इसका तब तक देश के टीवी चैनल इस बात का ज्ञान देना शुरू ही कर चुके हैं कि इससे अमरीका को ही परेशानी होने वाली है क्योंकि ज़्यादा टैरिफ़ से वहाँ महंगाई बढ़ जायेगी। टेलीविजन के भक्त एंकर से कोई पूछने वाला नहीं कि जब टैरिफ के चलते अपने यहाँ की चीजें महंगी हो जायेंगी अमेरिका में तो उनको ख़रीदेगा कौन?
लौटते हुए ओवर ब्रिज से आए। शाम के समय लोग गाड़ियों में घर लौट रहे थे। हम भी घर के लिए लौट लिए। रास्ते में एक लड़की अपने साथ के लड़के को कंधे से चिपटाये उसके गाल पर हाथ रखे हुए उसको प्यार से समझाते हुए कह रही थी -"गुस्सा मत किया करो।" लड़का चुपचाप, बिन बोले, उस लड़की के कन्धे से सटा चलता जा रहा था। आगे की बातचीत हम सुन नहीं पाये क्योंकि हमारे रास्ते एक-दूसरे के विपरीत थे।
घर लौटकर खाना खाया। उसके बाद सोचा पोस्ट लिख दें। सोचते तो रोज़ ही हैं। आज अमल भी हो रहा है।

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