भारत के 90 % लोग बेवकूफ हैं। - Markandey Katju
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व माननीय न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू जी का यह बयान मीडिया में काफ़ी दिनों तक चर्चा में रहा। अभी भी लोग यदा-कदा अपनी बात उनके इस बयान के बहाने कहते दिखते हैं।
जस्टिस काटजू के बारे में उत्तर प्रदेश के कर्मचारी वर्ग में आम धारणा थी कि उनके फ़ैसले आम जनता के हित में होते थे ।
रिटायरमेंट के बाद माननीय सुप्रीम कोर्ट पर की गई उनकी एक टिप्पणी उच्चतम अदालत को नागवार लगी थी। अदालत की अवमानना की कार्यवाही उनके द्वारा अपनी टिप्पणी पर खेद प्रकट करने से समाप्त हुई।
कुछ दिन रुके भले हों लेकिन काटजू साहब के तीखे, चटपटे और मजेदार भी बयान जारी रहे। बीते दिनों पूर्व न्यायाधीश चंद्रचूड़ जी पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने उनको 'कैरियरिस्ट' बताते हुए उनके द्वारा उठाए कई कदमों पर तीखी टिप्पणी की थी।
राजनीति के हर दल को बेकार, वर्तमान नेतृत्व को नाकारा बताते हुए, उन्होंने देश में सुधार के लिए देश में जनोन्मुखी तानाशाही की बकालत की थी।
काटजू साहब ने गहन अध्ययन किया है। इसका प्रयोग वे अपनी बात रखने में करते हैं।
पूर्व न्यायाधीश महोदय का हास्य बोध भी गजब का है। एक पोस्ट में उन्होंने पुरुषों के युवा बने रहने का फ़ामूला बताया था। फ़ामूले के अनुसार पुरुषों को अपनी उम्र के आधे में आठ जोड़कर जो संख्या बनती है उस उम्र की महिला से मित्रता करनी चाहिये। मतलब अगर किसी की उम्र 60 वर्ष है तो उसको 30+8 =38 वर्ष की उम्र की महिला से दोस्ती करनी चाहिए। उस पोस्ट में आई तमाम टिप्पणियों में महिला पाठकों ने एतराज भी जताया था कि उन्होंने महिलाओं के युवा बने रहते का कोई फार्मूला नहीं बताया था।
काटजू साहब को यह शिकायत भी है कि कुछ लोग उनके हास्य को समझ नहीं पाते। इस बात को वो इशारे में अपनी 90% वाले बयान से जोड़ते हैं। इसी तरह की एक टिप्पणी में उन्होंने सलाह दी थी कि पाकिस्तान अगर कश्मीर मांगता है तो उसको इस शर्त पर दे देना चाहिए कि उसको बिहार भी साथ में लेना पड़ेगा।
इस टिप्पणी से बिहार के लोग ख़ासे नाराज हुए थे। काटजू साहब का पुतला जलाया गया।पुतले पर कालिख पोती गई। नीतीश कुमार जी ने भी नाराजगी जताई।
इसी तरह एक टिप्पणी पर बंगाल के लोगों और ममता बनर्जी के भी नाराज होने की बात लिखी थी काटजू जी ने।
हाल ही में एक और टिप्पणी के लिए काटजू साहब की खिंचाई हुई। उन्होंने अपनी एक पोस्ट में लिखा -"जो महिला वकील बहस के दौरान मुझे आँख मारती/पलक झपकातीं थीं/ (Wink at me ) मैं उनके पक्ष में फैसले देता था।
इस पोस्ट पर कुछ लोगों ने तो मजे लिए। लेकिन अधिकतर ने तीखी टिप्पणी की। काटजू साहब ने जबाब में लिखा -" यह एक मजाक था। क्या मैं मजाक भी नहीं कर सकता?"
लेकिन दिल्ली की सुप्रीम कोर्ट की महिला एसोसियेशन काटजू साहब की मजाक वाली सफ़ाई से संतुष्ट नहीं हुई। संगठन ने उनकी पोस्ट की निंदा की और उनसे लिखित माफ़ी मांगने का आग्रह किया।
इस पर काटजू साहब ने सुप्रीम कोर्ट की महिला वकीलों से माफ़ी माँगते हुए अपनी पोस्ट हटा ली।
काटजू साहब अपनी साइट पर नियमित लिखते हैं। नियमित इंटरव्यू देते हैं। उनके इंटरव्यू देखते हुए लगता है कि उनसे इंटरव्यू लेना भी एक चुनौती पूर्ण काम है क्योंकि कई बार वे बीच में सवाल पूछने वाले को हड़का भी देते हैं-"मैडम आप ध्यान से सुनती तो हैं नहीं।"
भूतपूर्व न्यायाधीश काटजू साहब से सहमत/असहमत होना अलग बात है लेकिन उनको पढ़ना, सुनना अपने आप में रोचक है।
https://www.facebook.com/share/p/1Hfoz6YBEM/

No comments:
Post a Comment