आजकल दिन का बड़ा हिस्सा रील, यूट्यूब और फ़िल्में देखते बीतता है। मोबाइल पर कोई रील खुल जाती है। उसके बाद एक के बाद दूसरी चलती जाती है। यूट्यूब पर वीडियो देखने में भी काफ़ी समय जाता है। छोटे-छोटे पाँच-दस मिनट के वीडियो तो देख लिए जाते हैं। लेकिन घंटे-दो घंटे लंबे वीडियो देखने में हिम्मत जुटानी पड़ती है। किताब पढ़ते हुए तो पन्ने पलटते हुए उसके मजनून का अंदाज़ा लगाया जा सकता है लेकिन वीडियो पूरा ही देखना पड़ता है। इसी चक्कर में तमाम वीडियो बाद में देखने के लिए बचे हैं।
रील्स देखने के बारे में मुस्ताक यूसुफ़ी साहब का जुमला याद आता है -"मूंगफली और आवारगी में एक खराबी ये है कि आदमी एक बार शुरू कर दे तो समझ नहीं आता खत्म कैसे करे।" आज यूसुफ़ी साहब होते तो 'रील्स' को भी मूंगफली और आवारगी के साथ जरूर शामिल करते।
फ़िल्मों के साथ भी मामला कुछ ऐसा ही है। इधर बीच तमाम फ़िल्में देखीं। जिस किसी फ़िल्म के बारे में दोस्त लोग बताते हैं, देख लेते हैं।ज्यादातर फ़िल्में नेटफ्लिक्स पर देखते हैं। प्राइम टाइम और दीगर प्लेटफार्म पर भी देखते हैं लेकिन नेटफ्लिक्स पर ज्यादातर। हर महीने नेटफ्लिक्स के पैसे कटते हैं तो लगता है कम से कम एक फ़िल्म रोज़ देखनी चाहिए। लेकिन ऐसा हो कहाँ पाता है।
कानपुर में रहते हुए देखी फ़िल्मों में गॉडफ़ादर, लेडी चैटरलीज़ लवर, कटहल, लापता लेडीज और तमाम फ़िल्में याद हैं। गॉडफ़ादर, लेडी चैटरलीज़ लवर तो कई बार देखी। इन उपन्यासों को पढ़ा नहीं लेकिन पढ़ने का मन है। हंड्रेड ईयर्स इन सॉलिट्यूड उपन्यास पढ़ने के बाद इस पर बनी फ़िल्म देखने में उतना मजा नहीं आया। लेडी चैटरलीज़ लवर और तमाम फ़िल्में देखते हुए लगा विदेशों फ़िल्मों में रोमांस के दृश्य कितने आम हैं।
the scent of a woman (प्राइम टाइम) में रिटायर्ड सेनाधिकारी की एक्टिंग गजब की है। बंदे को दिखाई नहीं देता लेकिन किसी महिला से मुलाक़ात होने पर उसकी गंध से उसकी उम्र, क़द, रंग का अंदाजा लगाकर सटीक बता देता है। एक दृश्य में रेस्तराँ में डांस फ्लोर का साइज पूछकर साथ आई युवा स्त्री के साथ डांस करते हुए उसके मन से डांस न कर पाने का डर निकाल देता है। फ़िल्म के अंत में अपना देखभाल करने वाले बच्चे को बचाने के लिए की गई उसकी बहस अद्भुत है। महिला के साथ डांस और स्कूल की बहस को देखने के लिए बार-बार यह फ़िल्म देखी है।
OTT प्लेटफार्म पर बनने वाली सीरियल फिल्मों के बारे में सुनते हैं लेकिन अभी तक देखी कम ही हैं। पंचायत, मिर्जापुर टाइम्स जैसी प्रचलित सीरीज भी अभी देखनी हैं। लगता है देख लेंगे।
देखने के लिए फ़िल्मों का चुनाव दोस्तों की पोस्ट पढ़कर करते हैं। मित्र Niraj Kela किसी फ़िल्म के बारे में बताते हैं तो हम कहते हैं -नाम लिखकर भेजो। वो भेजते हैं। हम देख लेते हैं। Sudipti ने जिन फ़िल्मों के बारे में लिखा उनको देखा। लेकिन कुछ फ़िल्में अपने आप भी देख लेते हैं। कई बार सर्च करके भी देखा -"सबसे अच्छी/प्रसिद्ध/रोमांटिक फ़िल्में।" लेकिन लिस्ट पर अमल कम ही हो पाता है।
ऐसी ही अपने आप देखी फ़िल्मों में एक फ़िल्म है Frida . नेटफ्लिक्स पर देखी यह फ़िल्म मेक्सिकन पेंटर Frida Kahlo के बारे में है। Frida Kahlo बचपन से पोलियो ग्रस्त है। बड़े होने पर एक एक्सीडेंट में घायल हो जाती है। तमाम हड्डियां टूट जाती हैं। महीनों बिस्तर पर रहती है। बिस्तर पर पड़े-पड़े पेंटिंग सीखती है। प्रसिद्धि पाती है। अपने से उम्र में बड़े पेंटर से शादी करती है जिसे (क़द में अंतर के कारण) उसकी माँ हाथी और चीटी की शादी कहती है। शादी में धोखा होता है, तलाक होता है फिर साथ रहते हैं। पति की तरह उसके ख़ुद भी कई प्रेम संबंध होते हैं। रूसी कामरेड ट्रॉट्स्की से भी रोमांस चलता है।
Frida में सबसे ज़्यादा प्रभावित करने वाला तत्व उसकी जिजीविषा है। घायल, बीमार होने के बावजूद पेंटिंग करती रहती है। एक सेमिनार में अपने बिस्तर सहित जाती है। हास्य बोध भी गजब का है। अपने एक्सीडेंट के बारे में बताते हुए कहती है -I lost my verginity by the rod in accident (मेरा कौमार्य दुर्घटना में लोहे की रॉड से भंग हुआ). अपने आसपास जब लोगों को जरा-जरा सी तकलीफ़ों के बारे में रोते हुए देखते हैं तो लगता है Frida Kahlo जैसी महिलायें भी हुई हैं जो तमाम तकलीफ़ों के बावजूद उनका रोना रोए बिना अपनी शर्तों पर जीवन जीते हैं। सफल, प्रसिद्ध होते हैं। अपनी कमजोरियों का स्पीडब्रेकर तोड़ते हुए आगे बढ़ते हैं।
अभी तक समय का अभाव रहा इसलिए फ़िल्में देख नहीं पाये। अब उसकी भरपाई कर रहे हैं। मन है कि हर भाषा की कालजई फ़िल्में देख सकें। जो फ़िल्में अच्छी लगी उनसे जुड़ी किताबों को पढ़ने का भी मन है।
आप अपनी पसंदीदा फ़िल्मों के नाम बतायें (टिप्पणी या मेसेज करके)। हम देखने वाली लिस्ट में शामिल करके क्या पता उनको देख ही लें।
फोटो मेरे बेटे Anany Shukla की जो आजकल Firgun Travels के टूर पर स्पेन में हैं।
https://www.facebook.com/share/p/1Griwk7PxD/

No comments:
Post a Comment